अल्जाइमर बीमारी को आमतौर पर लोग भूलने की समस्या के तौर पर जानते हैं. जब किसी को नाम याद न रहे, चीजें रखकर भूल जाए या जगहों को पहचानने में दिक्कत हो, तब अक्सर कहा जाता है कि यह अल्जाइमर का असर हो सकता है, लेकिन अब वैज्ञानिकों की एक नई रिसर्च ने में खुलासा हुआ है कि दिमाग में बदलाव सिर्फ याददाश्त कमजोर होने के बाद ही नहीं, बल्कि उससे कई साल पहले भी शुरू हो सकते हैं.
यह अध्ययन अमेरिका की टेक्सास ए एंड एम हेल्थ यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया है और इसके नतीजे एक मशहूर वैज्ञानिक जर्नल 'नेचर कम्युनिकेशन्स' में प्रकाशित हुए हैं. रिसर्च में बताया गया है कि अल्जाइमर की शुरुआत में ही दिमाग की नई परिस्थितियों में ढलने की क्षमता, यानी कॉग्निटिव फ्लेक्सिबिलिटी, प्रभावित हो सकती है.
क्या है कॉग्निटिव फ्लेक्सिबिलिटी?
कॉग्निटिव फ्लेक्सिबिलिटी का मतलब होता है, जब कोई स्थिति बदल जाए तो उसके हिसाब से अपनी सोच और व्यवहार को बदल लेना. जैसे अगर आप किसी काम को एक तरीके से कर रहे हैं और अचानक नियम बदल जाए तो तुरंत नए नियम के हिसाब से खुद को ढाल लेना. यही क्षमता दिमाग की एक बहुत जरूरी ताकत मानी जाती है.
चूहों पर हुई रिसर्च
रिसर्च में वैज्ञानिकों ने चूहों पर अध्ययन किया, जिन्हें अल्जाइमर जैसी स्थिति के लिए विकसित किया गया था. इन चूहों का एक खास टेस्ट दिया गया, जिसे रिवर्सल लर्निंग कहा जाता है. इसमें पहले चूहों को एक तरीका सिखाया गया जिससे उन्हें इनाम मिलता था, लेकिन बाद में नियम बदल दिए गए और इनाम पाने का तरीका भी बदल गया.
Cognitive flexibility problems appeared months before memory impairment in an Alzheimer's animal model, pointing to earlier brain changes while the cause-and-effect cycle behind them remains unresolved. @tamu @NatureComms https://t.co/eSvUzmqV4G
— Medical Xpress (@medical_xpress) July 2, 2026
दिलचस्प बात यह रही कि सामान्य चूहों ने जल्दी समझ लिया कि नियम बदल गए हैं और उन्होंने अपना तरीका भी बदल लिया, लेकिन अल्जाइमर वाले चूहों ने पुरानी आदत नहीं छोड़ी. वे बार-बार वही गलत तरीका अपनाते रहे, भले ही उससे कोई फायदा नहीं हो रहा था.
सबसे हैरानी की बात यह थी कि इन चूहों के याददाश्त टेस्ट में कोई बड़ी कमी नहीं दिखी. यानी वे जगहें और चीजें याद रखने में ठीक थे, लेकिन नई स्थिति के हिसाब से खुद को बदल नहीं पा रहे थे. इससे वैज्ञानिकों को लगा कि अल्जाइमर सिर्फ भूलने की बीमारी नहीं है, बल्कि इससे पहले सोचने और समझने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है.
दिमाग के अंदर की गई जांच
दिमाग के अंदर जब जांच की गई तो एक खास हिस्सा, जिसे मीडियल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स कहा जाता है, उसमें ज्यादा गतिविधि देखी गई. यह हिस्सा दिमाग का वह भाग है जो प्लानिंग, निर्णय लेने और बदलते हालात में सोचने में मदद करता है. इसके अलावा स्ट्रिएटम नाम के दूसरे हिस्से से भी इसका संबंध देखा गया, जो व्यवहार को नियंत्रित करता है.
वैज्ञानिकों ने यह भी पाया कि कुछ खास तंत्रिका कोशिकाएं, जिन्हें कोलिनेर्जिक इंटरन्यूरॉन्स कहा जाता है, उनकी गतिविधि कम हो गई थी. ये कोशिकाएं दिमाग को सीखने और नई चीजें अपनाने में मदद करती हैं. जब ये ठीक से काम नहीं करतीं तो दिमाग के लिए नई परिस्थितियों में ढलना मुश्किल हो जाता है.
इस रिसर्च में एक और दिलचस्प प्रयोग किया गया. वैज्ञानिकों ने दिमाग के उस हिस्से की ज्यादा गतिविधि को थोड़ी देर के लिए कम किया. इसके बाद चूहों में सुधार देखा गया. उन्होंने नई चीजें जल्दी सीखनी शुरू कर दीं और उनका व्यवहार पहले से बेहतर हो गया. यहां तक कि कुछ मामलों में अल्जाइमर के लक्षण भी कम होते दिखे.
हालांकि, यह शोध अभी सिर्फ जानवरों पर हुआ है, लेकिन इसके नतीजे काफी उम्मीद जगाने वाले हैं. अगर आगे चलकर इंसानों पर भी यही पैटर्न साबित होता है तो डॉक्टर अल्जाइमर को बहुत पहले पहचान सकेंगे.
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