NDTV Yuva 2026 Submit : मुंबई में आयोजित NDTV Yuva 2026 के मंच पर IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने भारत के बदलते स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश ने संक्रामक बीमारियों के खिलाफ बड़ी लड़ाई जीती है, लेकिन अब नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज तेजी से बढ़ रही हैं, जिसमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कैंसर और हार्ट डिजीज की चपेट में लाखों लोग आ रहे हैं.
उन्होंने समिट के दौरान कहा, अगर 1947 के भारत और आज के भारत की स्वास्थ्य स्थिति की तुलना की जाए तो तस्वीर काफी बदल चुकी है. पहले लोगों की सबसे बड़ी चिंता संक्रामक बीमारियां थीं, लेकिन अब लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं.
60 फीसदी से अधिक बढ़े नॉन-कम्युनिकेबल के मामले
तुकाराम मुंढे ने कहा कि आजादी के बाद देश ने पब्लिख हेल्थ के क्षेत्र में काफी प्रगति हासिल की, जिसमें कम्युनिकेबल बीमारियों के मामलों में 60 से 70 फीसदी तक सुधार देखने को मिला है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था और जागरूकता अभियानों की सफलता को दर्शाता है. हालांकि, इसके साथ ही एक नई चुनौती भी तेजी से उभरकर सामने आई है.
उन्होंने कहा कि नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज यानी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के मामलों में 60 से 70 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कैंसर और हृदय रोग जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं. मुंढे के मुताबिक, इसके पीछे हमारी बदलती खानपान की आदतें और जीवनशैली बड़ी वजह हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि हम क्या खा रहे हैं, क्या पी रहे हैं और रोजमर्रा की हमारी आदतें स्वास्थ्य पर किस तरह का असर डाल रही हैं.
क्या खा रहे हैं और क्या पी रहे हैं, इस पर देना होगा ध्यान
उनका कहना है कि लोगों में बढ़ती इन बीमारियों के पीछे हमारी बदलती जीवनशैली और खानपान एक बड़ा कारण है. आज हमारी थाली में क्या आ रहा है, हम कौन सी पैक्ड चीजें खा रहे हैं और कौन से ड्रिंक ले रहे हैं, इन सभी बातों का असर सीधे हेल्थ पर पड़ता है.
ऐसे में हर किसी को अपने खानपान की चीजों को लेकर ज्यादा जागरूक बनें रहना जरूरी होता है. सिर्फ स्वाद या ब्रांड देखकर किसी प्रोडक्ट्स का चयन करने के बजाय उसकी गुणवत्ता और हेल्थ पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना भी जरूरी है.
जागरूकता से ही बदल सकते हैं हेल्थ
इस बात का ध्यान रखें कि बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियों से निपटने के लिए सिर्फ सरकार या डॉक्टर्स की कोशिशें पर्याप्त नहीं होती हैं. इसके लिए लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होती है. इसलिए नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज से सुरक्षित रहने के लिए सही खानपान, नियमित व्यायाम, स्वास्थ्य जांच और जागरूक जीवनशैली अपनाना जरूहै.
आने वाले समय में देश के सामने सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती यही होगी कि लोग अपनी आदतों में बदलाव लाएं और बीमारी के इलाज से ज्यादा उसकी रोकथाम पर ध्यान दें.
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