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पहाड़ों पर पहुंचते ही पेट क्यों बिगड़ जाता है? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कारण, जाने से पहले कर लें ये तैयारी

Mountain Sickness: सवाल यह है कि आखिर ऊंचाई पर ट्रैवल करते समय पेट क्यों बिगड़ जाता है और इससे बचने के लिए पहले से क्या तैयारी करनी चाहिए? आइए जानते हैं.

पहाड़ों पर पहुंचते ही पेट क्यों बिगड़ जाता है? न्यूट्रिशनिस्ट ने बताया कारण, जाने से पहले कर लें ये तैयारी
Mountain Sickness: ऊंचाई पर पेट खराब होने की सबसे बड़ी वजह है हाइपोक्सिया, यानी ऑक्सीजन की कमी.

Stomach Problems at High Altitude: नए साल की शुरुआत होते ही बहुत से लोग पहाड़ों, हिल स्टेशनों और ऊंची जगहों पर घूमने का प्लान बना लेते हैं. बर्फ से ढकी वादियां, ठंडी हवा और खूबसूरत नजारे हर किसी को आकर्षित करते हैं. लेकिन, अक्सर ऐसा देखा गया है कि जैसे ही लोग ऊंचाई पर पहुंचते हैं, उनका पेट खराब होने लगता है. कहीं गैस बनती है, कहीं पेट फूल जाता है, तो कहीं कब्ज या उलझन जैसी समस्या शुरू हो जाती है. सवाल यह है कि आखिर ऊंचाई पर ट्रैवल करते समय पेट क्यों बिगड़ जाता है और इससे बचने के लिए पहले से क्या तैयारी करनी चाहिए?

ऊंचाई पर पेट खराब होने की असली वजह

सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा के अनुसार, ऊंचाई पर पेट खराब होने की सबसे बड़ी वजह है हाइपोक्सिया, यानी ऑक्सीजन की कमी. जैसे-जैसे हम समुद्र तल से ऊपर जाते हैं, हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है. इसका असर सिर्फ सांसों पर नहीं, बल्कि पूरे नर्वस सिस्टम पर पड़ता है.

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वेगस नर्व और पाचन का कनेक्शन

हमारे पाचन तंत्र को कंट्रोल करने में वेगस नर्व की अहम भूमिका होती है. यह नर्व आंतों की गति (GI मोटिलिटी), एंजाइम्स के रिलीज और पेट के खाली होने की प्रक्रिया को कंट्रोल करती है. लेकिन, ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी के कारण वेगस नर्व ठीक से काम नहीं कर पाती,जिसकी वजह से पाचन धीमा पड़ जाता है, पेट देर से खाली होता है, गैस और ब्लोटिंग बढ़ जाती है, भारीपन और असहजता महसूस होती है.

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स्टडी क्या कहती है?

न्यूट्रिशनिस्ट बताती हैं कि एक स्टडी के मुताबिक हाइपोक्सिया GI मोटिलिटी को स्लो कर देता है, यानी आंतों की मूवमेंट सुस्त हो जाती है. जब खाना आगे बढ़ने में देर करता है, तो फर्मेंटेशन बढ़ता है और गैस बनने लगती है. यही वजह है कि ऊंचाई पर कई लोगों को बिना ज्यादा खाए भी पेट फूला हुआ लगता है.

ठंड का असर भी करता है पाचन को स्लो

ऊंचाई पर सिर्फ ऑक्सीजन ही कम नहीं होती, बल्कि मौसम भी काफी ठंडा होता है. ठंड के कारण शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है, जिसे आम भाषा में फाइट या फ्लाइट मोड कहा जाता है. इस मोड में शरीर एनर्जी बचाने पर ध्यान देता है, न कि पाचन पर. नतीजा यह होता है कि पाचन और धीमा हो जाता है, भूख कम लगती है, पेट भारी और सुस्त महसूस होता है.

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माइक्रोबायोम भी हो जाता है गड़बड़

एक्सपर्ट के मुताबिक, ट्रैवल का असर हमारे गट माइक्रोबायोम यानी आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन पर भी पड़ता है. खानपान में बदलाव, नींद की कमी और रूटीन बिगड़ने से यह बैलेंस पहले ही प्रभावित होता है. ऊंचाई पर पहुंचकर हाइपोक्सिया इस असर को और बढ़ा देता है, जिससे पेट की समस्याएं गंभीर हो सकती हैं.

सफर से पहले पेट को कैसे करें तैयार?

न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह है कि जैसे हम ट्रैवल से पहले सूटकेस सोच-समझकर पैक करते हैं, वैसे ही पेट की तैयारी भी जरूरी है. जाने से पहले ध्यान रखें कि:

  • बहुत भारी या तला-भुना खाना न खाएं.
  • हल्का, आसानी से पचने वाला भोजन लें.
  • पानी पर्याप्त मात्रा में पिएं, डिहाइड्रेशन से बचें.
  • फाइबर और प्रोबायोटिक फूड्स को डाइट में शामिल करें.
  • यात्रा के दौरान छोटे-छोटे मील लें, ओवरईटिंग से बचें.

ऊंचाई पर पेट खराब होना सिर्फ एयर प्रेशर या ठंड की समस्या नहीं है, बल्कि यह ऑक्सीजन की कमी, नर्वस सिस्टम और माइक्रोबायोम के बिगड़ने का नतीजा है. अगर आप पहाड़ों की यात्रा से पहले अपने पाचन तंत्र को तैयार कर लेते हैं, तो छुट्टियों का मजा बिना पेट की परेशानी के आराम से लिया जा सकता है.
 

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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