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बरसात में पानी भरी सड़क पार करने से पहले जान लें ये खतरा, हो सकते हैं लेप्टोस्पायरोसिस के शिकार

बरसात के मौसम में जगह-जगह पर पानी भरा रहता है लेकिन लोगों को काम नहीं रूकता है. कई लोग इस भरे हुए पानी को पार करते हुए अपने कामों के लिए निकलते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बारिश के भरे पानी में जाने से आप एक गंभीर बीमारी के शिकार हो सकते हैं. आइए जानते हैं क्या है  लेप्टोस्पायरोसिस जो भरे हुए पानी में जाने से हो सकता है.

बरसात में पानी भरी सड़क पार करने से पहले जान लें ये खतरा, हो सकते हैं लेप्टोस्पायरोसिस के शिकार
बारिश के मौसम में भरे हुए पानी में चलना इस बीमारी का खतरा बढ़ा देता है.

बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने गुरुवार को नागरिकों से लेप्टोस्पायरोसिस से बचाव के उपाय करने का आग्रह किया. निगम ने चेतावनी दी कि मानसून के मौसम में खुले घावों के साथ बारिश के पानी या कीचड़ में चलने से संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है. 

जन स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी में कहा, "नगर निकाय ने उन लोगों से अपील की है, जो जमा हुए बारिश के पानी या कीचड़ से होकर गुजरे हैं, वे 24 से 72 घंटों के भीतर डॉक्टरी सलाह लें और बचाव की दवा लें."

 लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा किसे

मुंबई में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश हो रही है, जिसके कारण शहर के कई हिस्सों में जलजमाव हो गया है. बीएमसी ने कहा कि इस दौरान, जमा हुए या धीरे-धीरे बहने वाले पानी में चलने वाले लोगों को लेप्टोस्पायरोसिस होने का खतरा अधिक होता है, खासकर अगर उनके शरीर पर कट, घाव या मामूली खरोंच भी हो. 

निगम ने चेतावनी दी कि लेप्टोस्पायरोसिस एक गंभीर बीमारी है और समय पर पता न चलने और इलाज न होने पर यह जानलेवा हो सकती है.

क्या होती है  लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी

जन स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, दूषित कीचड़ के साथ बारिश के पानी में लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया (स्पाइरोकीट्स) हो सकते हैं, जो लेप्टोस्पायरोसिस का कारण बनते हैं. ये बैक्टीरिया त्वचा पर छोटे कट या खरोंच के माध्यम से भी शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है. जो कोई भी बारिश के पानी या कीचड़ के संपर्क में आया हो, वह बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह ले और बताई गई 24 से 72 घंटे की अवधि के भीतर बचाव की दवा ले.

नागरिकों से कहा गया है कि वे हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे क्लीनिक, बीएमसी डिस्पेंसरी, स्वास्थ्य केंद्रों और नगर निगम के अस्पतालों में जाएं, जहां डॉक्टरी सलाह, स्वास्थ्य जांच, मार्गदर्शन और बचाव की दवाएं मुफ्त में दी जा रही हैं.

नगर निकाय ने निवासियों से यह भी आग्रह किया है कि वे परिवार के सदस्यों, दोस्तों और पड़ोसियों के बीच इस बीमारी और शुरुआती बचाव के इलाज के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाएं.

इन बातों का रखें ख्याल 

विभाग ने लोगों को मानसून के मौसम में बुखार को नजरअंदाज न करने की भी सलाह दी, क्योंकि यह लेप्टोस्पायरोसिस, डेंगू या मलेरिया का लक्षण हो सकता है. बुखार या अन्य संबंधित लक्षणों का अनुभव करने वाले निवासियों से आग्रह है कि वे खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टरी सलाह लें.

बीएमसी ने बचाव के उपाय के तौर पर पैरों पर कट या घाव वाले नागरिकों को सलाह दी है कि वे जमा हुए पानी में चलने से बचें. अगर ऐसा करना जरूरी हो, तो उन्हें रबर के जूते या सुरक्षा वाले दूसरे जूते पहनने चाहिए. बारिश के पानी के संपर्क में आने के बाद, लोगों को संक्रमण का खतरा कम करने के लिए अपने पैर साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोने चाहिए और उन्हें ठीक से सुखाना चाहिए.

लेप्टोस्पायरोसिस के शुरुआती लक्षण

बैक्टीरिया से संक्रमण होने के बाद 2 दिन से 4 हफ्तों के अंदर लक्षण दिखाई दे सकते हैं-

  • अचानक तेज बुखार आना और ठंड लगना
  • मांसपेशियों (पिंडलीयों) में तेज दर्द और सिरदर्द
  • आंखों का लाल होना
  • उल्टी, दस्त या पीलिया (त्वचा का पीला पड़ना) 

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