दुनिया के कई देशों में एचआईवी/एड्स अब भी एक बड़ी पब्लिक हेल्थ चुनौती बना हुआ है. हाल ही में फिजी सरकार ने एचआईवी संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए एड्स को नेशनल इमरजेंसी घोषित किया है. ऐसे समय में भारत ने अफ्रीकी देश बोत्सवाना की मदद के लिए एचआईवी/एड्स के इलाज में इस्तेमाल होने वाली करीब 10 टन एंटी-रेट्रोवायरल (ARV) दवाओं की खेप भेजकर वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है.
इस पहल की अच्छी बात ये है कि बोत्सवाना भेजी गई इन जीवनरक्षक दवाओं का निर्माण हरियाणा के अंबाला स्थित Mcneil & Argus Pharmaceuticals Limited ने किया है. इन दवाओं का इस्तेमाल एचआईवी संक्रमित मरीजों के इलाज और संक्रमण को नियंत्रित रखने के लिए किया जाता है.
भारत ने भेजी 10 टन दवाओं की खेप
भारत सरकार ने बोत्सवाना के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत करने के लिए करीब 10 टन एंटी-रेट्रोवायरल दवाएं भेजी हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी इस कदम को ग्लोबल साउथ के देशों के साथ स्वास्थ्य सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है.
Dispatched 10 tons of Anti-Retroviral medicines to Botswana today, to support their public health system for HIV/AIDS treatment.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 15, 2026
An affirmation of our commitment to strengthening health cooperation with our Global South partners.
🇮🇳 🇧🇼 pic.twitter.com/gwLi74E7IU
ये सहयोग ऐसे समय में सामने आया है, जब दुनिया के कई विकासशील देश संक्रामक रोगों और स्वास्थ्य संसाधनों की चुनौतियों से जूझ रहे हैं. एक्सपर्ट का मानना है कि भारत की फार्मास्युटिकल क्षमता वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रही है.
अंबाला में बनीं तैयार हुई है जीवनरक्षक दवाएं
इस उपलब्धि में हरियाणा के अंबाला की Mcneil & Argus Pharmaceuticals Limited की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. कंपनी के चेयरमैन डॉ. भाई जी.डी. छिब्बर ने इसे अंबाला और पूरे भारत के लिए गर्व का विषय बताया.

उन्होंने कहा, 'ये अंबाला और पूरे भारत के लिए गर्व की बात है कि यहां निर्मित जीवनरक्षक दवाएं दूसरे देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र की मदद के लिए भेजी जा रही हैं.'
कंपनी के अनुसार, दवाओं को आपूर्ति से पहले सभी जरूरी गुणवत्ता परीक्षणों और नियामकीय मानकों से गुजरना पड़ा, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके.
HIV मरीजों के लिए क्यों अहम हैं एंटी-रेट्रोवायरल दवाएं?
एचआईवी एक ऐसा वायरस है, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है. अगर समय पर इलाज न मिले, तो ये एड्स का रूप ले सकता है. एंटी-रेट्रोवायरल दवाएं वायरस को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं, लेकिन उसके फैलाव को काफी हद तक कंट्रोल कर सकती हैं. इससे मरीज लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है और संक्रमण से होने वाली गंभीर जटिलताओं का जोखिम कम हो जाता है.
एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) आज एचआईवी प्रबंधन का सबसे प्रभावी तरीका मानी जाती है. यही कारण है कि जिन देशों में एचआईवी संक्रमण की दर अधिक है, वहां इन दवाओं की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है.
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