चिकनगुनिया एक ऐसी बीमारी है, जिसमें जोड़ों का दर्द हफ्तों क्या, महीनों तक पीछा नहीं छोड़ता. लोग सालों-साल इसकी वजह से परेशान रहते हैं. लेकिन अब इस बीमारी को मात देने के लिए वैज्ञानिकों ने एक बड़ी और अनोखी कामयाबी हासिल की है. IIT रुड़की (IIT Roorkee) के वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च में पाया है कि आयुर्वेदिक गोमूत्र अर्क (Gau Mutra Ark) में कुछ ऐसे खास तत्व छिपे हैं, जो चिकनगुनिया के वायरस को पूरी तरह खत्म करने की ताकत रखते हैं.
लैब में हुए टेस्ट के दौरान गोमूत्र अर्क ने चिकनगुनिया के वायरस को 90% से ज्यादा कम कर दिया. इतना ही नहीं, जब वैज्ञानिकों ने इसे एक खास कुदरती फॉर्मूले के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया, तो वायरस में 99.85% तक की भारी कमी देखी गई.
IIT Roorkee researchers have identified key bioactive compounds in Ayurvedic Cow Urine Distillate (Gau Mutra Ark), demonstrating significant antiviral activity against the Chikungunya virus.
— IIT Roorkee (@iitroorkee) June 20, 2026
Led by Prof. Shailly Tomar and her team from the Department of Biosciences and… pic.twitter.com/83HbZ6vFIA
कैसे हुई यह बड़ी खोज?
यह पूरी रिसर्च IIT रुड़की के 'बायोसाइंसेज और बायोइंजीनियरिंग' डिपार्टमेंट की प्रोफेसर शैली तोमर और उनकी पूरी टीम ने मिलकर की है. प्रोफेसर शैली तोमर और उनकी टीम लंबे समय से इस पर काम कर रही थी. उन्होंने गोमूत्र अर्क के अंदर मौजूद उन एक्टिव तत्वों (Bioactive Compounds) की पहचान की, जो सीधे वायरस पर हमला करते हैं और उसे बढ़ने से रोक देते हैं.
यह पूरी स्टडी मशहूर साइंस जर्नल 'एसीएस एग्रीकल्चरल साइंस एंड टेक्नोलॉजी' (ACS Agricultural Science & Technology) में छपी है. इस खोज ने दुनिया को दिखा दिया है कि हमारे पुराने आयुर्वेद और आज की मॉडर्न टेक्नोलॉजी (Biotechnology) को अगर सही तरीके से मिला दिया जाए, तो दुनिया की बड़ी से बड़ी बीमारियों का इलाज ढूंढा जा सकता है.
आम आदमी को क्या होगा फायदा?
आज के समय में जब भी कोई नई बीमारी आती है, तो उसकी दवाइयां इतनी महंगी होती हैं कि आम इंसान के बजट से बाहर हो जाती हैं. इसी बात को ध्यान में रखते हुए IIT रुड़की के डायरेक्टर प्रोफेसर कमल किशोर पंत ने इस रिसर्च की तारीफ की है. उन्होंने कहा कि आज के समय में दुनिया के सामने सेहत से जुड़ी कई नई चुनौतियां आ रही हैं. ऐसे में अलग-अलग फील्ड के वैज्ञानिकों को साथ मिलकर काम करना होगा ताकि आम लोगों के लिए सस्ती, सुरक्षित और नई दवाइयां बनाई जा सकें.
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