पत्नी या पार्टनर को उसकी इच्छा के खिलाफ दूसरे पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करना सिर्फ रिश्ते की समस्या नहीं, बल्कि कंट्रोलिंग और एब्यूसिव व्यवहार का संकेत भी हो सकता है. BBC की एक रिपोर्ट में 50 से अधिक महिलाओं ने दावा किया कि उनके पार्टनर ने उन पर अजनबियों के साथ संबंध बनाने का दबाव डाला. इस तरह के मामलों ने सवाल खड़ा किया है कि क्या ऐसा व्यवहार किसी मानसिक समस्या, असुरक्षा या शक्ति के दुरुपयोग से जुड़ा हो सकता है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ मेल पार्टनर्स अपनी फीमेल पार्टनर्स को जबरन दूसरे आदमियों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करते हैं. महिलाएं ना चाहते हुए भी ऐसा करने को मजबूर होती हैं. ये स्थिति ऐसे पुरुषों के मानसिक हालत को लेकर भी सवाल उठाती है कि कैसे कोई पुरुष मानसिक संतुष्टि या पैसों के लिए अपनी ही पत्नी या पार्टनर के साथ ऐसा कर सकता है.
हाल के वर्षों में पार्टनर स्विंगिंग और ओपन रिलेशनशिप जैसे कॉन्सेप्ट्स पर चर्चा बढ़ी है. हालांकि विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि किसी भी तरह का रिश्ता तभी स्वीकार्य माना जाता है जब उसमें शामिल सभी वयस्कों की स्पष्ट और स्वतंत्र सहमति हो.

'मुझे 100 से ज्यादा पुरुषों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया'
बीबीबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूके की पचास महिलाओं ने बताया कि उनके पार्टनर ने उन्हें अजनबियों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया या उन पर दबाव डाला. इसके सबूत फेसबुक और MeWe जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऐप्स पर मिलते हैं, जिनका इस्तेमाल आपसी सहमति वाले जोड़े और सिंगल लोग एक-दूसरे से जुड़ने के लिए करते हैं.
ज्यादातर लोग नकली नाम (स्यूडोनिम) का इस्तेमाल करते हैं और पहली बातचीत के बाद यह देखने के लिए समय लेते हैं कि क्या जोड़े एक-दूसरे के साथ सहज महसूस कर रहे हैं.
एक महिला ने बताया कि उसे 100 से ज्यादा ऐसे लोगों के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया जिन्हें वह जानती भी नहीं थी. सामने आईं कई महिलाओं ने कहा कि उन्होंने न चाहते हुए भी 'स्विंगिंग' के जरिए यौन संबंध बनाया, क्योंकि या तो उन्हें मना करने के नतीजों का डर था या उन्हें लगा कि उन्हें अपने पार्टनर को खुश रखना है. उन्होंने गहरे और लंबे समय तक रहने वाले सदमे (ट्रॉमा) के बारे में बात की.
एक महिला ने कहा-
'ना चाहकर भी करना पड़ा', महिलाओं ने बताया कैसे पार्टनर बनाता था दबाव
एक और महिला ने बताया, "मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे किसी को सौंप दिया गया हो. मुझे लगा कि मेरा इस्तेमाल किया गया. मुझे बहुत गंदा महसूस हुआ."
महिलाओं का कहना है कि ज्यादातर मुलाकातें FabSwingers वेबसाइट के जरिए तय होती थीं. इस वेबसाइट का दावा है कि UK में उसके आधे मिलियन से ज्यादा एक्टिव मंथली अकाउंट हैं. छह महिलाओं ने बीबीसी न्यूज को बताया कि साइट के जरिए मिले पुरुषों ने उनके साथ रेप किया.
क्या यह किसी मानसिक विकार या कंट्रोलिंग व्यवहार का संकेत है?
इस मामले को गहराई से समझने के लिए हमने बात की कामना छिब्बर से, जो मनोविज्ञान में विशेषज्ञ हैं. उनके अनुसार, अगर कोई व्यक्ति अपने पार्टनर पर दबाव, धमकी, इमोशनल ब्लैकमेल या मजबूरी का इस्तेमाल करता है, तो यह कंट्रोलिंग और एब्यूसिव व्यवहार की श्रेणी में आता है.
उनकी बात को कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों का भी समर्थन मिलता है. शोधकर्ताओं के अनुसार, रिश्तों में बार-बार दबाव, डर, निगरानी, धमकी या मजबूरी के जरिए पार्टनर की स्वतंत्रता और फैसलों को नियंत्रित करने की कोशिश को Coercive Control (जबरन नियंत्रण) कहा जाता है, जिसे अब Intimate Partner Violence (IPV) यानी साथी द्वारा किए जाने वाले उत्पीड़न का एक महत्वपूर्ण रूप माना जाता है.
2025 में प्रकाशित एक सिस्टेमैटिक रिव्यू में पाया गया कि coercive control का शिकार होने वाली महिलाओं में लगातार डर, अपनी इच्छा के अनुसार निर्णय लेने में असमर्थता, लंबे समय तक मानसिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आम थीं. अध्ययन के अनुसार, ऐसे रिश्तों में शक्ति का असंतुलन और नियंत्रण की प्रवृत्ति प्रमुख भूमिका निभाती है.
अमेरिकी CDC भी मानता है कि किसी पार्टनर को उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन गतिविधि के लिए मजबूर करना या मानसिक दबाव डालकर सहमति हासिल करना यौन हिंसा और मनोवैज्ञानिक उत्पीड़न की श्रेणी में आ सकता है.
हालांकि कामना छिब्बर यह स्पष्ट करती हैं कि केवल इस तरह के व्यवहार के आधार पर किसी व्यक्ति को किसी विशेष मानसिक रोग से ग्रस्त नहीं कहा जा सकता. कुछ मामलों में असुरक्षा, अधिकार जताने की प्रवृत्ति, व्यक्तित्व संबंधी समस्याएं (personality difficulties) या शक्ति एवं नियंत्रण की जरूरत ऐसे व्यवहार से जुड़ी हो सकती है, लेकिन इसका निदान केवल मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ही कर सकते हैं. हाल के एक अध्ययन में पाया गया कि coercive control और कुछ व्यक्तित्व संबंधी विकृतियों के बीच संबंध हो सकता है, लेकिन दोनों को एक जैसा नहीं माना जा सकता.
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी रिश्ते में सहमति (Consent) सबसे महत्वपूर्ण है. अगर किसी व्यक्ति को डर, दबाव या धमकी के कारण कोई यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर होना पड़े, तो उसे स्वतंत्र सहमति नहीं माना जा सकता.
(कामना छिब्बर फोर्टिस हेल्थकेयर में मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार विज्ञान विभाग में मानसिक स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख हैं. क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमफिल की डिग्री प्राप्त करने के बाद, वह एक प्रशिक्षित थेरेपिस्ट हैं.)
सवाल जो इस लेख से उठते हैं -
1. Coercive Control क्या होता है?
Coercive Control (जबरन नियंत्रण) ऐसा व्यवहार है, जिसमें एक व्यक्ति अपने पार्टनर को डर, धमकी, दबाव, निगरानी, इमोशनल ब्लैकमेल या अलग-थलग करने जैसे तरीकों से नियंत्रित करने की कोशिश करता है. इसका उद्देश्य रिश्ते में सत्ता और नियंत्रण बनाए रखना होता है. विशेषज्ञ इसे Intimate Partner Violence (IPV) यानी साथी द्वारा किए जाने वाले उत्पीड़न का एक महत्वपूर्ण रूप मानते हैं.
2. क्या कंट्रोलिंग व्यवहार मानसिक बीमारी का संकेत है?
जरूरी नहीं. विशेषज्ञों के अनुसार, कंट्रोलिंग या एब्यूसिव व्यवहार को केवल देखकर किसी व्यक्ति को मानसिक रोगी नहीं कहा जा सकता. हालांकि असुरक्षा, अधिकार जताने की प्रवृत्ति, शक्ति का दुरुपयोग या कुछ व्यक्तित्व संबंधी समस्याएं ऐसे व्यवहार से जुड़ी हो सकती हैं. किसी मानसिक बीमारी का निदान केवल प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ही कर सकते हैं.
3. Intimate Partner Violence (IPV) क्या है?
Intimate Partner Violence (IPV) का मतलब है किसी मौजूदा या पूर्व पार्टनर द्वारा किया गया शारीरिक, यौन या मानसिक उत्पीड़न. इसमें शारीरिक हिंसा, यौन दबाव या जबरदस्ती, पीछा करना (stalking), मनोवैज्ञानिक उत्पीड़न और कंट्रोलिंग व्यवहार शामिल हो सकते हैं. CDC और WHO दोनों इसे एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या मानते हैं.
4. रिश्ते में इमोशनल ब्लैकमेल के क्या संकेत हैं?
रिश्तों में इमोशनल ब्लैकमेल के कुछ सामान्य संकेत हो सकते हैं:
- अपनी बात मनवाने के लिए बार-बार अपराधबोध (guilt) पैदा करना
- रिश्ता खत्म करने या छोड़ने की धमकी देना
- पार्टनर के फैसलों को लगातार नियंत्रित करने की कोशिश करना
- डर या दबाव बनाकर सहमति हासिल करना
- दोस्तों और परिवार से दूरी बनाने के लिए मजबूर करना
- "अगर तुम मुझसे प्यार करते हो तो..." जैसी शर्तें रखना
जब यह व्यवहार लगातार होने लगे और व्यक्ति की स्वतंत्रता तथा निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने लगे, तो विशेषज्ञ इसे Coercive Control या एब्यूसिव व्यवहार का हिस्सा मानते हैं.
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