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जिम में हो रहे लगातार हादसों को कैसे रोकें? फिटनेस कोच ने बताए कौन से कड़े सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे

How To Stop Gym Accidents: जिम में लगातार हो रही मौतों ने फिटनेस कम्युनिटी को सदमे में डाल दिया है, जिससे जिम में कड़े सुरक्षा उपायों की मांग फिर से शुरू हो गई है.

जिम में हो रहे लगातार हादसों को कैसे रोकें? फिटनेस कोच ने बताए कौन से कड़े सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे
फिचनेस कोच कहते हैं, सबसे पहले जरूरी है सेफ्टी और प्रॉपर सुपरविजन.

Gym Accident Prevention: राजस्थान के बीकानेर जिले की 17 साल की गोल्ड मेडलिस्ट पावरलिफ्टर यष्टिका आचार्य (Yashtika Acharya) की जिम में हुई मौत ने एक बार फिर जिम में ट्रेनिंग या एक्सरसाइज करते समय सेफ्टी प्रोटोकॉल को फॉलो करना कितना जरूरी है इसकी ओर इशारा किया है. यष्टिका की कथित तौर पर तब मौत हो गई जब भारी वजन उठाने की कोशिश करते समय 270 किलोग्राम वजन उठाने वाली रोड उसकी गर्दन पर गिर गई. इस दुर्घटना ने फिटनेस कम्युनिटी को सदमे में डाल दिया है, जिससे जिम में कड़े सुरक्षा उपायों की मांग फिर से शुरू हो गई है.

इस घटना के बारे में बात करते हुए भारतीय पोलो टीम, जयपुर के सेलिब्रिटी फिटनेस कोच अजय सिंह ने मीडिया से कहा, “पावरलिफ्टिंग में तीन मेन लिफ्ट होते हैं: स्क्वाट (Squat), बेंच प्रेस (Bench Press) और डेडलिफ्ट (Deadlift). कॉम्पटीटर का लक्ष्य हर कैटेगरी में ज्यादा से ज्यादा वजन उठाना होता है, जिसके लिए इंटेस फिजिकल प्रिपरेशन, टेक्निकल प्रिसीजन और मानसिक दृढ़ता (Mental Fortitude) की जरूरत होती है. लेकिन, इन सब के साथ-साथ एक रिस्क भी होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

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सबसे जरूरी सेफ्टी और प्रॉपर सुपरविजन

सिंह कहते हैं, सबसे पहले जरूरी है सेफ्टी और प्रॉपर सुपरविजन है. “ट्रेनर सिर्फ ऑब्जर्वर नहीं होते हैं. वे लाइफ लाइन होते हैं. उनकी भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि अगर वजन उठाते समय कुछ गलती हो जाए तो कोई हादसा होने से पहले ही उसे संभाल जा सके. हेवी वेटलिफ्टिंग के वक्त, कुछ सेकंड की चूक भी हादसे का सबब बन सकती है, जैसा कि यष्टिका के मामले में हुआ था.”

इक्विपमेंट का रखरखाव भी जरूरी

सिंह कहते हैं, इक्विपमेंट का रखरखाव भी उतना ही जरूरी है. “मैकेनिकल फेल्युअर से बचने के लिए बारबेल (Barbells), रैक (Racks) और वेट प्लेट का नियमित तौर पर निरीक्षण किया जाना चाहिए. सेफ्टी बार (Safety Bars), कॉलर (Collars) और सही फुटवियर की अहमियत को भी नजरअंदाज नहीं जा सकता.

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प्रोग्रेसिव ओवरलोड

एक और जरूरी फैक्टर प्रोग्रेसिव ओवरलोड (Progressive Overload) है. सिंह ने कहा, “यह स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का मूलभूत सिद्धांत है. लिफ्टर को बहुत जल्दी बहुत ज्यादा वजन उठाने के लालच से बचना चाहिए. यह एक ऐसी गलती है जिसके चलते गंभीर चोट लग सकती है. जिम्मेदार कोच जानते हैं कि ट्रेनिंग प्रोग्राम को कैसे स्ट्रक्चर किया जाए जिससे लिफ्टर को स्ट्रेंथ बढ़ाने के साथ साथ रिकवरी का भी समय मिले.”

ट्रस्ट बिल्ड करना

सिंह कहते हैं, "एक कोच सिर्फ एक ट्रेनर नहीं होता है, उन्हें अपने एथलीटों से बात करने और उन्हें कंफर्टेबल महसूस कराना चाहिए क्योंकि ट्रस्ट बिल्ड करना भी उतना ही जरूरी है जितना स्ट्रेंथ बिल्ड करना. इसके अलावा कोच को इस बात को लेकर केयरफुल रहना चाहिए कि सही गाइडेंस और मोटिवेशन प्रोवाइड करते हुए भी एथलीट की एकाग्रता में खलल न पड़े."

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नजर रखने के लिए कम से कम तीन ट्रेनर होने चाहिए

सिंह का मानना है कि 17 साल के लिफ्टर के लिए 270 किलोग्राम वजन उठाने की चुनौती बहुत ज्यादा है. “हर एथलीट की एक अलग क्षमता होती है और एक अच्छा कोच उन सीमाओं को समझता है. बहुत ज्यादा या बहुत कम दबाव डालने से परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, ऐसी कठिन ट्रेनिंग के लिए, एक सिंगल कोच काफी नहीं है, प्रॉपर गाइडेंस, चोट लगने से बचाने और प्रोग्रेस पर नजर रखने के लिए कम से कम तीन ट्रेनर होने चाहिए."

यह घटना भारत में खेल सुरक्षा नियमों (Sports Safety Regulations) के बारे में व्यापक बातचीत की मांग करती है. सिंह कहते हैं, "पावर लिफ्टिंग कोचों के लिए मेंडेटरी सर्टिफिकेशन, स्टैंडर्ड इक्विपमेंट चेक और इमरजेंसी रिस्पांस प्रोटोकॉल जैसे कदम लोगों की जान बचा सकते हैं और इस तरह के हादसों को रोक सकते हैं."

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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