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आंखें ठीक, फिर भी साफ नहीं दिखता? डॉक्टर से जानें किस बीमारी के हैं लक्षण और कैसे करें बचाव

आंखें ठीक होने के बाद कम दिखाई देना सामान्य नहीं, पोस्टीरियर कॉर्टिकल एट्रोफी बीमारी हो सकती है वजह. आपको बता दें कि ये एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है. इसलिए अगर आपको इस आर्टिकल में बताए लक्षण नजर आते हैं, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं.

आंखें ठीक, फिर भी साफ नहीं दिखता? डॉक्टर से जानें किस बीमारी के हैं लक्षण और कैसे करें बचाव
कम क्यों दिखाई देता है.
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अगर आपकी आंखों की जांच सामान्य आती है, चश्मे का नंबर भी सही है, लेकिन फिर भी पढ़ने, चीजों को पहचानने या दूरी का सही अंदाजा लगाने में परेशानी हो रही है, तो इसे केवल आंखों की समस्या मानकर नजरअंदाज न करें. न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, कुछ मामलों में यह पोस्टीरियर कॉर्टिकल एट्रोफी (Posterior Cortical Atrophy) (PCA) नामक दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है. इसे कई विशेषज्ञ अल्जाइमर रोग (Alzheimer's disease) का एक असामाकान्य (Atypical) रूप भी मानते हैं. 

एक्सपर्ट बताते हैं कि इस बीमारी में दिमाग के पिछले हिस्से (Posterior Cortex), जो देखने और दृश्य जानकारी को समझने का काम करता है, उसकी कोशिकाएं धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती हैं. इसलिए शुरुआत में मरीज को आंखों से जुड़ी परेशानी महसूस होती है, जबकि वास्तविक समस्या आंखों में नहीं बल्कि मस्तिष्क में होती है.

 क्या है पोस्टीरियर कॉर्टिकल एट्रोफी? 

पोस्टीरियर कॉर्टिकल एट्रोफी (Posterior Cortical Atrophy) एक प्रगतिशील न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है. इसमें व्यक्ति की देखने, वस्तुओं की पहचान करने, पढ़ने, लिखने और स्थान का सही अनुमान लगाने की क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है. खास बात यह है कि शुरुआती चरण में याददाश्त सामान्य रह सकती है, इसलिए कई बार इसका पता देर से चलता है. 

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इस बीमारी के कारण ठीक से दिखाई नहीं देता है. (Image NDTV) 

क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण- 

शुरुआती लक्षण जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है- आंखों की जांच सामान्य होने के बावजूद धुंधला या असामान्य दिखाई देना- पढ़ते समय शब्दों पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई- सीढ़ियां उतरने या वाहन पार्क करने में दूरी का गलत अनुमान लगना- परिचित वस्तुओं को पहचानने में परेशानी- एक साथ कई चीजों पर ध्यान केंद्रित न कर पाना- बार-बार चीजों से टकराना- नक्शा पढ़ने या रास्ता पहचानने में कठिनाई- लिखने या गणना करने में परेशानी.

किन लोगों में अधिक होता है खतरा? 

यह बीमारी आमतौर पर 50 से 65 वर्ष की आयु के बीच शुरू हो सकती है, हालांकि इससे कम या अधिक उम्र में भी इसके मामले सामने आ सकते हैं. जिन परिवारों में न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का इतिहास है, उनमें जोखिम थोड़ा अधिक हो सकता है. हालांकि अधिकांश मामलों में इसका कोई स्पष्ट कारण नहीं मिल पाता. डॉक्टर का कोट"कई मरीज आंखों से संबंधित शिकायत लेकर पहले आंखों के डॉक्टर के पास जाते हैं. जब आंखों की जांच सामान्य आती है, तब भी यदि देखने, पढ़ने, वस्तुओं को पहचानने या दूरी का अनुमान लगाने में लगातार समस्या बनी रहती है, तो न्यूरोलॉजिकल जांच की जरूरत हो सकती है.

पोस्टीरियर कॉर्टिकल एट्रोफी दुर्लभ बीमारी है, लेकिन इसकी समय पर पहचान मरीज और परिवार को बेहतर देखभाल की योजना बनाने में मदद करती है. शुरुआती पहचान से लक्षणों को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने के उपाय किए जा सकते हैं.

कैसे होती है जांच? 

अगर डॉक्टर को पोस्टेरियर कॉर्टिकल एट्रोफी (PCA) का संदेह होता है, तो सबसे पहले मरीज के लक्षणों और याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता की जांच की जाती है. इसके बाद जरूरत पड़ने पर दिमाग का एमआरआई, पीईटी स्कैन और कुछ स्पेशल टेस्ट कराए जा सकते हैं, जिनसे यह पता लगाया जाता है कि मस्तिष्क दृश्य जानकारी को सही तरीके से समझ और प्रोसेस कर पा रहा है या नहीं. इन टेस्ट से बीमारी की पुष्टि करने और सही इलाज की योजना बनाने में मदद मिलती है. इन टेस्ट का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि समस्या आंखों में है या मस्तिष्क के उस हिस्से में जो दृश्य जानकारी को प्रोसेस करता है.

क्या इसका इलाज संभव है? 

फिलहाल पोस्टेरियर कॉर्टिकल एट्रोफी का कोई स्थायी इलाज उपलब्ध नहीं है. हालांकि समय पर पहचान होने पर दवाओं, कॉग्निटिव रिहैबिलिटेशन, विजुअल थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और परिवार के सहयोग से मरीज की दैनिक गतिविधियों को आसान बनाया जा सकता है. कुछ मामलों में वही दवाएं दी जाती हैं जो अल्जाइमर रोग के कुछ मरीजों में उपयोग की जाती हैं, लेकिन इलाज हमेशा मरीज की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है.

कब जाएं डॉक्टर के पास? 

यदि आंखों की जांच सामान्य होने के बावजूद कई सप्ताह या महीनों तक देखने में परेशानी बनी रहे, पढ़ने में कठिनाई हो, बार-बार चीजों से टकराएं, दूरी का अनुमान न लगा पाएं या परिचित वस्तुओं को पहचानने में दिक्कत होने लगे, तो न्यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेना चाहिए. इन लक्षणों को केवल बढ़ती उम्र या कमजोर नजर समझकर टालना ठीक नहीं है.

हर बार देखने में होने वाली समस्या आंखों की बीमारी नहीं होती. कुछ मामलों में इसके पीछे मस्तिष्क की दुर्लभ बीमारी पोस्टेरियर कॉर्टिकल एट्रोफी छिपी हो सकती है, जिसे अल्जाइमर रोग का एक असामान्य रूप माना जाता है. यदि आंखें स्वस्थ होने के बावजूद दिखने संबंधी समस्याएं लगातार बनी रहें, तो समय रहते न्यूरोलॉजिस्ट से जांच कराना बेहतर होता है. सही समय पर पहचान से बीमारी की बेहतर देखभाल और मरीज की जीवन गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिल सकती है.

डॉ. निकिता धर पारस हेल्थ में सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट हैं. उन्हें ब्रेन और नर्व से जुड़ी बीमारियों के इलाज में 11 से साल से अधिक का अनुभव है.

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