- यह पूरे देश के ऑर्गन ट्रांसप्लांट सिस्टम का डिजिटल कंट्रोल सेंटर होगा.
- इस समय इस पोर्टल पर प्लेज करने वालों की संख्या 5,61,936 पहुंच चुकी है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है.
- देश में सबसे अधिक किडनी का ट्रांसप्लांट होता है. दूसरे स्थान पर लिवर और तीसरे पायदान पर हार्ट आता है.
हाल ही में भारत ने 5 लाख अंगदान का एक नायाब रिकॉर्ड बनाया है. अब देश में एक नया रियल टाइम डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च किया गया है जो जरूरतमंदों को पहले के मुकाबले कहीं जल्दी अंगों का आवंटन सुनिश्चित करेगा. इसकी मदद से अब अगर किसी मरीज को किडनी, लिवर, हार्ट और दूसरे अंगों को ट्रांसप्लांट करना है तो उसे अधिक पारदर्शी और तेज व्यवस्था का फायदा मिलेगा.
नैशनल ऑर्गन ऐंड टिशू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) ने यह नया रियल टाइम डिजिटल पोर्टल और मोबाइल एप्प लॉन्च किया है. इसकी मदद से एक वेटिंग लिस्ट तैयार किया जाएगा, यह अंगों का आवंटन रियल टाइम में ट्रैक करेगा, आधार से जुड़े ऑर्गन डोनेशन प्लेज को रिकॉर्ड करेगा और देशभर के अस्पतालों के बीच बिना किसी भेदभाव अंगों का आवंटन सुनिश्चित करने में मदद करेगा.
क्यों पड़ी जरूरत?
हर साल देश में लाखों की संख्या में किडनी, लिवर, हार्ट और फेफड़ों जैसे अंगों के मरीज ट्रांसप्लांट का इंतजार करते हैं. पर इसमें सबसे बड़ी चुनौती यही रहती है कि अलग-अलग राज्यों, अस्पतालों और क्षेत्रीय संस्थानों की अलग-अलग वेटिंग लिस्ट होती है. इसके कारण मरीज को मौजूद अंगों का पता लगाने में ही काफी समय लगता था. साथ ही उपलब्ध अंगों की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं दिखती है. इतना ही नहीं, विभिन्न राज्यों के बीच कोऑर्डिनेशन करना भी काफी मुश्किल होता है. ऐसे में प्रत्यर्पण के लिए मौजूद अंग होने के बाद भी समय पर यह सबसे अधिक जरूरतमंद मरीज तक नहीं पहुंच पाते हैं. इन्हीं समस्याओं को दूर करने के लिए NOTTO ने यह नया डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है.

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नया पोर्टल क्या करेगा?
यह पूरे देश के ऑर्गन ट्रांसप्लांट सिस्टम का डिजिटल कंट्रोल सेंटर होगा. इसके जरिए पूरे भारत की रियल टाइम वेटिंग लिस्ट बनेगी. अंगों का आवंटन लाइव ट्रैक होगा. ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की स्थिति का रिकॉर्ड रखा जाएगा. अस्पतालों के बीच कोऑर्डिनेशन आसान होगा. राज्यों और NOTTO के बीच डेटा तुरंत साझा होगा. सबसे अधिक जरूरतमंद मरीजों के लिए तुरंत अलर्ट जारी किए जा सकेंगे. आधार से जुड़े ऑर्गन डोनेशन प्लेज दर्ज किए जा सकेंगे.
मरीज के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया क्या होगी?
इस पोर्टल पर मरीज खुद अपना नाम दर्ज नहीं कर सकता. यह पूरी प्रक्रिया अस्पताल के जरिए होगी. सबसे पहले मरीज किसी भी अधिकृत ट्रांसप्लांट अस्पताल में जाएगा. जहां अस्पताल उसकी मेडिकल जानकारी पोर्टल पर दर्ज करेगा. इसके बाद मरीज का नाम अस्पताल, राज्य, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर की वेटिंग लिस्ट में शामिल हो जाएगा. अंग उपलब्ध होने पर उसी डेटा के आधार पर आवंटन किया जाएगा. इस पोर्टल तक सिर्फ अधिकृत अस्पताल, राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग, NOTTO को ही लॉगिन आईडी के जरिए पहुंच मिलेगी.

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कैसे बनेगी पूरे देश की वेटिंग लिस्ट?
पहले हर अस्पताल अपना अलग रिकॉर्ड रखता था. अब सभी अस्पताल एक ही पोर्टल पर डेटा दर्ज करेंगे. इसके बाद अपने आप चार स्तरों पर वेटिंग लिस्ट तैयार होगी. पहला, अस्पताल के स्तर पर. दूसरा, राज्य के स्तर पर. तीसरा, क्षेत्रीय स्तर पर और चौथा राष्ट्रीय स्तर पर. इससे पूरे देश में ऑर्गेन का इंतजार कर रहे लोगों को यह साफ दिखाई देगा कि किस मरीज की क्या स्थिति है.
अंगों का आवंटन पोर्टल के जरिए तय नियमों के अनुसार होगा. ऐसे में जिस अस्पताल में किसी व्यक्ति का अंग दान होगा, सबसे पहले उसी अस्पताल को अधिकार मिलेगा कि अगर वहां उपयुक्त मरीज मौजूद है तो उसे अंग दिया जाए.
अगर वहां कोई उपयुक्त मरीज नहीं है या अस्पताल उस अंग का ट्रांसप्लांट नहीं करता, तो अंग राज्य के पूल में चला जाएगा.

किडनी के मामले में क्या होगा?
देश में सबसे ज्यादा ट्रांसप्लांट होने वाला अंग किडनी है. अगर किसी डोनर की दोनों किडनी डोनेट होती है तो नियमानुसार एक किडनी उसी अस्पताल में रह सकती है. जबकि दूसरी किडनी सबसे नजदीकी उस सरकारी केंद्र को दी जाएगी जहां उपयुक्त मरीज मौजूद हो. अगर डोनर के राज्य में कोई मैच नहीं मिलता तो वह किडनी पहले क्षेत्रीय पूल और फिर राज्य के पूल में जाएगा और वहीं से मरीज का चयन होगा. यह पूरी प्रक्रिया पोर्टल पर रिकॉर्ड होगी.
पोर्टल पर बिना भेदभाव कैसे होगा ट्रांसप्लांट?
नई व्यवस्था की यही सबसे बड़ी खासियत है कि यह पारदर्शी होगी. हर आवंटन डिजिटल रिकॉर्ड में रहेगा. इसमें किस मरीज को अंग क्यों मिला? किसी मरीज को प्राथमिकता क्यों मिली? अंग किस अस्पताल से किस अस्पताल ले जाया गया? इस तरह की सभी जानकारियों का रिकॉर्ड पोर्टल पर रहेगा. इससे मनमानी की संभावना काफी कम होगी.

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आधार से कैसे जुड़ेगा ऑर्गन डोनेशन?
अब कोई भी व्यक्ति पोर्टल पर अंगदान का संकल्प लेगा तो उसका यह प्लेज सीधा आधार से लिंक होगा. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अगर भविष्य वह शख्स खुद सहमति देने की स्थिति में नहीं होगा तो उसके आधार से जुड़े रिकॉर्ड के जरिए यह स्पष्ट रहेगा कि उसने अपनी जीवनकाल में अंगदान की इच्छा जताई थी. इससे परिवार और अस्पताल दोनों को निर्णय लेने में आसानी होगी.
सुपर अर्जेंट मरीजों को क्या फायदा?
कुछ मरीज ऐसे होते हैं जिनकी जान बचाने के लिए तुरंत ट्रांसप्लांट जरूरी होता है. अब अस्पताल पोर्टल पर सुपर अर्जेंट अलर्ट भेज सकेंगे. पहले यह काम फोन कॉल और मैसेज के जरिए होता था. पूरी प्रक्रिया में वक्त अधिक लगता था. पर अब इस पोर्टल के माध्यम से पूरा सिस्टम डिजिटल होगा. इससे समय की बचत होगी.
स्वैप डोनर मैचिंग में भी होगी आसानी
मान लीजिए. दो मरीज हैं. दोनों के रिश्तेदार अंग दान करना चाहते हैं. लेकिन दोनों का ब्लड ग्रुप या टिश्यू मैच नहीं कर रहा. ऐसी स्थिति में. अगर दूसरे मरीज का रिश्तेदार पहले मरीज से मैच कर जाए और पहले मरीज का रिश्तेदार दूसरे मरीज से. तो दोनों परिवार आपस में अंगों का आदान-प्रदान करते हैं. इसे स्वैप डोनर मैचिंग कहते हैं. पहले यह सिर्फ अस्पताल स्तर पर होता था. अब पूरे देश में लाखों मरीजों के बीच मैच तलाशा जा सकेगा. इससे ट्रांसप्लांट की सफलता की संभावना पहले के मुकाबले काफी बढ़ जाएगी.

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ट्रांसप्लांट के बाद भी मरीज पर नजर रहेगी
यह पोर्टल केवल अंग प्रत्यारोपण संबंधी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं कराएगा. इस पर अस्पतालों को प्रत्यारोपण के बाद मरीजों के फॉलोअप भी अपलोड करने होंगे. इलाज के दौरान उनके स्वास्थ्य की स्थिति, मेडिकल पैरामीटर, रिकवरी जैसी सभी जानकारी अस्पतालों को पोर्टल पर दर्ज करनी होगी. इससे भारत में पहली बार ट्रांसप्लांट के नतीजों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार होगा.
किन अंगों का सबसे ज्यादा ट्रांसप्लांट होता है?
NOTTO के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक सबसे अधिक ट्रांसप्लांट किडनी का हुआ. दूसरे स्थान पर लिवर और तीसरे पायदान पर हार्ट आता है. सबसे अधिक ट्रांसप्लांट दिल्ली में हुए. इनकी संख्या 4564 रही, जबकि मृतक डोनर से सबसे अधिक ट्रांसप्लांट तमिलनाडु में किए गए.
अब पोर्टल तो लॉन्च हो चुका है पर अभी इसके सभी मॉड्यूल लॉन्च पूरी तरह से सक्रिय नहीं हुए हैं. NOTTO के अनुसार अगले दो महीनों के भीतर सभी सुविधाएं चरणबद्ध तरीके से शुरू कर दी जाएंगी. हालांकि इस समय इस पोर्टल पर प्लेज करने वालों की संख्या 5,61,936 पहुंच चुकी है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है.
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