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मौत के बाद भी 'जिंदा' रहे मनुभाई, तीन लोगों को दे गए जिंदगी, जानिए पूरी कहानी

गुजरात के सूरत में एक बुजुर्ग शख्स के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उसके परिवार ने ऐसा फैसला किया जिसकी हर कोई मिसाल दे रहा है.

मौत के बाद भी 'जिंदा' रहे मनुभाई, तीन लोगों को दे गए जिंदगी, जानिए पूरी कहानी
गुजरात के सूरत में मनुभाई के परिवार ने कायम की मिसाल (फोटो- NDTV)
सूरत:

कहते हैं, इंसान की असली पहचान उसके जाने के बाद भी कायम रहती है. सूरत के एक परिवार ने अपने सबसे कठिन समय में ऐसा फैसला लिया, जिसने तीन लोगों को नई जिंदगी की उम्मीद दे दी. 76 वर्षीय मनुभाई लालजीभाई डोबरिया को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित किया, लेकिन उनके परिवार ने अंगदान का फैसला लेकर मानवता की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी हर ओर सराहना हो रही है.

सूरत के एल.एच. रोड स्थित कुबेर नगर सोसायटी में रहने वाले 76 वर्षीय सेवानिवृत्त मनुभाई लालजीभाई डोबरिया 31 जुलाई की सुबह अचानक घर पर बेहोश होकर गिर पड़े. परिजन बिना देर किए उन्हें 108 एम्बुलेंस से कापोद्रा के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे. डॉक्टरों ने लगातार इलाज किया, लेकिन बाद में उन्हें ब्रेन डेड घोषित करना पड़ा.

मनुभाई के परिवार का बड़ा फैसला 

मनुभाई के ब्रेन डेड होने की खबर से पूरा परिवार गहरे सदमे में था. इसी बीच जीवनदीप ऑर्गन डोनेशन फाउंडेशन और श्री सौराष्ट्र पटेल सेवा समाज के प्रतिनिधियों ने परिजनों से मुलाकात कर अंगदान के महत्व को समझाया. दुख की इस घड़ी में पत्नी लाभूबेन, दोनों बेटों और तीनों बेटियों ने एक ऐसा निर्णय लिया, जिसने उनके दर्द को मानव सेवा के सबसे बड़े संदेश में बदल दिया.

परिवार की सहमति के बाद मनुभाई का एक हाथ सूरत के किरण अस्पताल में सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट किया गया. यह हाथ साबरकांठा के 19 वर्षीय युवक को लगाया गया, जिसने वर्षों पहले बिजली के करंट से दुर्घटना में अपना हाथ गंवा दिया था. वहीं, मनुभाई की दोनों आंखें भी दान की गईं, जिनसे दो दृष्टिहीन लोगों की दुनिया फिर से रोशन होगी.

इस अवसर पर गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया भी अस्पताल पहुंचे. उन्होंने दाता परिवार से मुलाकात कर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि अपने प्रियजन को खोने के असहनीय दुख के बीच लिया गया यह फैसला समाज के लिए प्रेरणा है. अंगदान से बड़ा कोई दान नहीं और ऐसे परिवार मानवता की सबसे बड़ी मिसाल हैं. जीवनदीप ऑर्गन डोनेशन फाउंडेशन और श्री सौराष्ट्र पटेल सेवा समाज के संयुक्त प्रयासों से यह 33वां सफल अंगदान संपन्न हुआ. संस्थाओं ने लोगों से अपील की कि ब्रेन डेड की स्थिति में अंगदान का संकल्प लेकर वे भी किसी की जिंदगी बचाने का माध्यम बनें.

मनुभाई डोबरिया अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका यह निर्णय और उनके परिवार का साहस तीन जिंदगियों में नई उम्मीद बनकर हमेशा जीवित रहेगा। यही है इंसानियत. अपनी मौत के बाद भी मनुभाई कई लोगों को जिंदगी दे गए. 

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