अफ्रीकी देश कांगो एक बार फिर इबोला वायरस के गंभीर प्रकोप का सामना कर रहा है. स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस प्रकोप में अबतक 4,018 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, 8,300 से अधिक मामलों की पुष्टि की गई है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये इबोला के इतिहास का सबसे तेजी से फैलने वाला प्रकोप बन चुका है, जिसने स्थानीय प्रशासन और वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है.
मई में शुरू हुआ था प्रकोप
कांगो ने 15 मई को इबोला प्रकोप की आधिकारिक घोषणा की थी, जब दुर्लभ बंडीबुग्यो वायरस के मामले सामने आए थे. यह इबोला वायरस का एक दुर्लभ प्रकार माना जाता है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि फिलहाल इस वायरस के लिए कोई प्रभावी इलाज या स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, जिससे संक्रमण को नियंत्रित करना और भी मुश्किल हो गया है.
क्यों बढ़ रही है चिंता?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि वायरस तेजी से नए स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल रहा है. संक्रमण का दायरा बढ़ने से सीमित स्वास्थ्य संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है. अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को मरीजों के बढ़ते बोझ का सामना करना पड़ रहा है, जबकि कई प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं पहले से ही कमजोर हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, इबोला एक अत्यंत घातक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल सकती है. समय पर इलाज न मिलने पर यह गंभीर जटिलताओं और मृत्यु का कारण बन सकती है.
आंकड़ों में गिरावट, लेकिन चुनौती बरकरार
अफ्रीका CDC का कहना है कि हाल के दिनों में पुष्टि किए गए मामलों की संख्या में कुछ कमी देखने को मिली है. हालांकि, संस्था ने यह भी चेतावनी दी है कि असुरक्षा, संघर्ष और स्थानीय समुदायों के साथ सहयोग की कमी के कारण वास्तविक आंकड़े प्रभावित हो सकते हैं. कई क्षेत्रों में स्वास्थ्यकर्मियों को लोगों तक पहुंचने और संक्रमण की सही जानकारी जुटाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
ये भी पढ़ें - कांगो में बेकाबू हुआ इबोला: अब तक 2300 से ज्यादा मौतें, WHO ने दी दुनिया भर में फैलने की चेतावनी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं