अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस एक बार फिर बहुत तेजी से कहर बरपा रहा है. इस बार हालात इतने ज्यादा बिगड़ चुके हैं कि विश्व स्वास्थ संगठन (WHO) को भी खुली चेतावनी जारी करनी पड़ी है. WHO के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस ने मंगलवार को एक इमरजेंसी मीटिंग में साफ लफ्जों में कहा कि इबोला की यह लहर काबू में आने से कोसो दूर है. यह वायरस जितनी तेजी से फैल रहा है, उसने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और अब इसके दूसरे पड़ोसी देशों में भी फैलने का बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है.
टेड्रोस ने दो टूक शब्दों में कहा कि हमें सच स्वीकार करना होगा. वायरस ने हमसे बहुत पहले रफ्तार पकड़ ली थी और हम अभी तक सिर्फ उसके पीछे भागने और उसे पकड़ने की कोशीश कर रहे हैं. यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब कांगो सरकार ने खुद माना कि देश में करीब 5,000 मामलों में से 2,300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. यह आंकड़ा कांगो के पूरे इतेहास में अब तक का सबसे जानलेवा और डरावना साबित हुआ है.
मई से शुरू हुआ खूनी सिलसिला
कांगो में यह इबोला का 17वां प्रकोप है, जिसे आधिकारिक तौर पर 15 मई को घोषित किया गया था. हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब इसका ऐलान हुआ, उससे कई हफ्ते पहले से ही यह बीमारी लोगों के बीच चुपचाप फैल रही थी. सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि यह वायरस उत्तर और पूर्वी इलाकों में सबसे ज्यादा फैला है, जहां सरकार की पकड़ काफी कमजोर है.
इन इलाकों में बुनियादी अस्पताल, दवाइयां और जरूरी सुविधाएं लगभग न के बराबर हैं. ऊपर से दशकों से कई हथियारबंद गिरोह और विद्रोही गुट इन जंगलों और रास्तों पर सक्रिय हैं, जिसकी वजह से डॉक्टरों और राहत टीमों का वहां पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है.
WHO चीफ के मुताबिक, लगातार हिंसा, लोगों का बेघर होना और खानों, नदियों व सड़कों के रास्ते आम जनता की भारी आवाजाही इस वायरस की आग में घी डालने का काम कर रही है. टेड्रोस ने सभी देशों से मिलकर मदद करने की अपील की है और कहा है कि आने वाले दिनों में कांगो और खतरे की जद में आए देशों के लिए नई गाइडलाइंस जारी की जाएंगी.
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इतनी तेज रफ्तार पहले कभी नहीं देखी गई
इबोला एक ऐसा वायरस है जो शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों (जैसे पसीना, खून, थूक) के संपर्क में आने से फैलता है और इसके बाद तेज बुखार और अंदरूनी ब्लीडिंग शुरू हो जाती है.
अफ्रीका सीडीसी (Africa CDC) के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार के प्रकोप के पहले तीन महीनों में दर्ज किए गए मामले और मौतें, 2013-2016 के ऐतिहासिक पश्चिम अफ्रीकी प्रकोप के शुरुआती तीन महीनों से क्रमशः सात गुना और पांच गुना ज्यादा हैं.
याद रहे कि 2013 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका के लाइबेरिया, सिएरा लियोन और गिनी में इबोला से 11,300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. वहीं, कांगो में 2018 से 2020 के दौरान फैले इबोला को अब तक का सबसे बुरा दौर माना जाता था, जिसमें 3,381 मामलों में 2,299 लोगों ने दम तोड़ा था. मगर इस मौजूदा लहर ने कुछ ही महीनों में उस काले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है.
दुनिया के लिए कितना बड़ा खतरा?
मंगलवार को हुई बैठक 17 मई के बाद WHO की इमरजेंसी कमेटी की दूसरी बड़ी मीटिंग थी, जिसमें इबोला को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया गया था. यह संस्था का दूसरा सबसे ऊंचा अलर्ट लेवल होता है.
फिलहाल WHO ने कांगो के भीतर इस खतरे को "वेरी हाई" (अत्यधिक गंभीर), युगांडा और बाकी सीमावर्ती देशों के लिए "हाई", और बाकी अफ्रीकी देशों व दुनिया के लिए "लो" आंका है.
मगर जमीनी हकीकत यह है कि कांगो के छह प्रांतों में इसके मरीज मिल चुके हैं, जिनमें दक्षिण सूडान की सीमा के पास के इलाके भी शामिल हैं. युगांडा में भी इसके केस सामने आ चुके हैं. टेड्रोस ने चेतावनी दी है कि इसे अगर तुरंत नहीं रोका गया, तो यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत तेजी से फैल सकता है.
न कोई पक्की वैक्सीन, न इलाज
इस मौजूदा प्रकोप के पीछे इबोला का 'बुंडिबुग्यो' (Bundibugyo) स्ट्रेन जिम्मेदार है. सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस खास स्ट्रेन के लिए अभी तक कोई पक्की वैक्सीन या सटीक दवा मौजूद नहीं है, हालांकि इसके क्लिनिकल ट्रायल तेजी से चल रहे हैं.
WHO प्रमुख ने सबसे गंभीर बात यह बताई कि लोग अस्पतालों के बजाय अपने घरों में, अपने गांवों में और बिना किसी निगरानी के दम तोड़ रहे हैं. उन्होंने समझाया कि जब कोई मरीज अस्पताल के बाहर मरता है, तो इसका मतलब है कि संक्रमण की एक पूरी ऐसी कड़ी मौजूद है जिसके बारे में स्वास्थ्य विभाग को भनक तक नहीं है. जब तक हर एक कड़ी को ढूंढकर तोड़ा नहीं जाएगा, यह महामारी थमने वाली नहीं है.
कांगो के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रमुख डियूडोने म्वाम्बा का कहना है कि पिछले तीन-चार हफ्तों में मामले इसलिए बढ़े हैं क्योंकि स्थानीय लोग डर और अविश्वास के कारण सामने नहीं आ रहे हैं. इसके लिए अब नई रणनीति की जरूरत है.
जमीनी स्तर पर रणनीति बदलने की तैयारी
जिनेवा में ब्रीफिंग के दौरान WHO के एक्सपर्ट थिएर्नो बाल्डे ने बताया कि अब राहत कार्यों को बड़े स्तर पर विकेंद्रीकृत किया जा रहा है, ताकि टीमें सीधे उन गांवों और बस्तियों तक पहुंच सकें जहां वायरस फैल रहा है.
मरीजों को लाने-ले जाने वाले मोटरसाइकिल टैक्सी ड्राइवरों को सुरक्छा किट दी जा रही है और उन्हें इस निगरानी तंत्र का हिस्सा बनाया जा रहा है, ताकि कोई भी संदिग्ध मरीज छूट न जाए. हालांकि WHO और उसके सहयोगी आने वाले महीनों में हालात सुधारने की पूरी कोशिश में जुटे हैं, लेकिन किसी के पास इस बात की कोई तय समय-सीमा नहीं है कि यह खौफनाक महामारी आखिर कब तक पूरी तरह काबू में आ पाएगी.
FAQs
1. इबोला वायरस कैसे फैलता है?
संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, थूक और अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क से फैल सकता है.
2. DRC में इबोला से कितनी मौतें हुई हैं?
रिपोर्ट के अनुसार 5,000 मामलों में 2,300 से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं.
3. WHO ने इबोला को लेकर क्या चेतावनी दी है?
WHO ने कहा है कि संक्रमण अभी नियंत्रण से दूर है और पड़ोसी देशों में फैलने का जोखिम बना हुआ है.
4. इबोला के प्रमुख लक्षण क्या हैं?
तेज बुखार, थकान, सिरदर्द, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में ब्लीडिंग.
5. क्या इबोला का इलाज या वैक्सीन उपलब्ध है?
कुछ वैक्सीन और उपचार विकसित किए गए हैं, लेकिन बुंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए प्रभावी समाधान पर अभी शोध जारी है.
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