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दवाओं को मात दे रहा ड्रग-रेसिस्टेंट फंगस, 50 वैज्ञानिकों बताए बचने की 5 सबसे जरूरी उपाय

Drug Resistant Fungus: 50 वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक बड़े अध्ययन में इस समस्या को लेकर चेतावनी दी गई है और इससे निपटने के लिए पांच अहम उपाय सुझाए गए हैं.

दवाओं को मात दे रहा ड्रग-रेसिस्टेंट फंगस, 50 वैज्ञानिकों बताए बचने की 5 सबसे जरूरी उपाय

Fungal Infection Prevention: दुनियाभर में फंगल संक्रमण अब एक नई और गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं. पहले जहां इन्हें सामान्य बीमारी माना जाता था, वहीं अब कई प्रकार के फंगस दवाओं के प्रति प्रतिरोधक (ड्रग-रेसिस्टेंट) बन चुके हैं. इसका मतलब है कि आम एंटीफंगल दवाएं इन पर असर नहीं कर रही हैं, जिससे इलाज मुश्किल और जानलेवा हो सकता है. खासकर कमजोर इम्यून सिस्टम वाले मरीजों के लिए यह खतरा और बढ़ जाता है. हाल ही में 50 वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक बड़े अध्ययन में इस समस्या को लेकर चेतावनी दी गई है और इससे निपटने के लिए पांच अहम उपाय सुझाए गए हैं, जो भविष्य में लाखों जानें बचा सकते हैं.

क्या कहता है नया शोध?

नेचरल मेडिसिन में प्रकाशित इस अध्ययन में नीदरलैंड्स के रैडबौड यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के प्रोफेसर पॉल वेरवेई के नेतृत्व में 16 संस्थानों के 50 वैज्ञानिकों ने भाग लिया.

शोध में पाया गया कि फंगस में दवा-रेजिस्टेंस केवल अस्पतालों में नहीं, बल्कि पर्यावरण में भी तेजी से विकसित हो रहा है. कृषि में उपयोग होने वाले फफूंदनाशक और मेडिकल एंटीफंगल दवाओं की संरचना मिलती-जुलती होती है, जिससे फंगस इनसे लड़ना सीख जाते हैं.

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कौन से फंगस सबसे खतरनाक?

अध्ययन में खास तौर पर दो खतरनाक फंगस का जिक्र किया गया, कैंडिडा ऑरिस, एस्परजिलस संक्रमण. ये संक्रमण तेजी से फैलते हैं और कई बार इलाज के बावजूद काबू में नहीं आते.

फंगस से लड़ने के 5 प्रभावी तरीके | 5 Effective Ways to Fight Fungus

1. जागरूकता बढ़ाना: लोगों और डॉक्टरों को फंगल संक्रमण के खतरे के बारे में जानकारी देना जरूरी है, ताकि समय पर पहचान और इलाज हो सके.

2. निगरानी मजबूत करना: वैश्विक स्तर पर डेटा इकट्ठा कर यह समझना जरूरी है कि कौन-से फंगस कहां और कितनी तेजी से फैल रहे हैं.

3. इंफेक्शन कंट्रोल: अस्पतालों में साफ-सफाई, आइसोलेशन और बेहतर प्रोटोकॉल से संक्रमण को रोका जा सकता है.

4. दवाओं का बैलेंस यूज: एंटीफंगल दवाओं और कृषि में इस्तेमाल होने वाले फफूंदनाशकों का सोच-समझकर उपयोग जरूरी है, ताकि प्रतिरोध न बढ़े.

5. रिसर्च और निवेश बढ़ाना: नई दवाएं, सस्ती जांच तकनीक और बेहतर इलाज के लिए निवेश बढ़ाना समय की मांग है.

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वन हेल्थ क्यों है जरूरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए वन हेल्थ दृष्टिकोण अपनाना होगा, जिसमें इंसान, जानवर और पर्यावरण, तीनों को साथ लेकर रणनीति बनाई जाए.

अगर समय रहते इस खतरे को नहीं रोका गया, तो यह स्थिति एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जैसी वैश्विक आपदा बन सकती है. इसलिए अभी कदम उठाना ही समझदारी है, वरना यह खामोश खतरा आने वाले समय में और भी भयावह रूप ले सकता है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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