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बंगाल में 25 साल बाद सिर्फ दो फेज में मतदान, किसका फायदा-किसका नुकसान?

चुनाव आयोग ने तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और असम में एक ही चरण और पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव कराने का ऐलान किया है. पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा में कमी के कारण चुनाव दो फेज में होंगे, सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों की बड़ी तैनाती हुई है.

बंगाल में 25 साल बाद सिर्फ दो फेज में मतदान, किसका फायदा-किसका नुकसान?
  • EC ने 5 राज्यों के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा की है. तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल एक ही चरण में मतदान होंगे
  • असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए मतदान एक ही दिन 9 अप्रैल को होगा, बंगाल में चुनाव दो फेज में होंगे
  • पश्चिम बंगाल में चुनाव फेज की संख्या 25 साल बाद दो हो गई है जो पहले आठ फेज में होती थी
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नई दिल्‍ली:

चुनाव आयोग ने पांच राज्यों के लिए चुनाव की घोषणा कर दी है और चुनाव की तारीख भी आ चुकी है. जैसा कि उम्मीद थी कि तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में एक ही चरण में मतदान होगा और वैसा ही हुआ. चुनाव आयोग ने केरल और पुडुचेरी में एक ही दिन 9 अप्रैल को वोटिंग कराने का निर्देश दिया है. वहीं तमिलनाडु में एक ही दिन 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. मगर असम जहां पिछली बार तीन फेज में चुनाव हुए थे, वहां की 126 विधानसभा सीटों के लिए एक ही दिन 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे.

अब आते हैं पश्चिम बंगाल पर जहां सिर्फ दो फेज में चुनाव होंगे 23 अप्रैल और 29 अप्रैल. ये पश्चिम बंगाल के इतिहास में 25 साल बाद हो रहा है. पश्चिम बंगाल में 2006 में 5 फेज, 2011 में 6 फेज, 2016 में 7 फेज, 2021 में 8 फेज और अब 2026 में 2 फेज. पश्चिम बंगाल का अभी तक चुनावी हिंसा का इतिहास रहा है ऐसा ही बिहार और उत्तर प्रदेश का भी रहा है, मगर कुछ महीनों पहले हुए बिहार चुनाव में एक भी बूथ पर रिपोलिंग नहीं हुई. कहने का मतलब है कि अब चुनाव के समय होने वाले जातीय संघर्ष में कमी आ गई है. 

बंगाल में अब परिस्थिति बदल चुकी

पिछले कई चुनावों में पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा हुई मगर तब ममता बनर्जी वामदलों के साथ लड़ रही थी तब वामदलों के कैडर और तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों के बीच सत्ता के लिए सड़क पर संघर्ष होता था, मगर अब परिस्थिति बदल चुकी है वामपंथी दल अब कहीं नहीं है और सत्ता संघर्ष वाली वो बात नहीं रही जो पहले थी. ये एक बड़ी वजह है जिसके चलते चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में दो ही फेज में चुनाव कराने का फैसला लिया है. सुरक्षा के सारे इंतजाम कर लिए गए हैं अद्धसैनिक बलों की 480 कंपनी अभी से पश्चिम बंगाल में तैनात है और चुनाव तक और भी बड़ी संख्या में अद्धसैनिक बल वहां भेजे जाएंगे.

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कम फेज से किसको फायदा?

अब सबसे बड़ा सवाल कम फेज में वोटिंग कराने से किसको फायदा होता है कहने को तो जो सत्ता में रहता है उसको हर वक्त एक फायदा रहता है कि अपने ढंग से काम कर सके. तृणमूल कांग्रेस हर फेज में जो अपने कॉडर हर जगह भेजती थी वो शायद इस बार ना कर सकें. मगर ममता बनर्जी ने चुनाव घोषणा से पहले कई योजनाओं की घोषणा कर दी है, जिसमें कर्मचारियों के डीए बढ़ाने से लेकर अन्य चीजें हैं.

आश्चर्यचकित करता रहा है बंगाल चुनाव

चुनाव दो फेज में हो या आठ फेज में पश्चिम बंगाल का चुनाव हमेशा आपको आश्चर्यचकित करता है. इस बार भी देखना होगा कि बीजेपी अपना सीट बढ़ाती या तृणमूल कांग्रेस. ममता ने एसआईआर की लड़ाई चौतरफ़ा लड़ी है. आंदोलन के जरिए पश्चिम बंगाल में, कानून के जरिए सुप्रीम कोर्ट में खुद वकील बन कर और संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग ला कर. पश्चिम बंगाल में बीजेपी इस बार पूरा जोर लगा रही है और ममता बनर्जी भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है. इसलिए पश्चिम बंगाल का यह चुनाव सबकी निगाहों में है, सबको इसका लंबे समय से इंतजार था.

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