- Rising air pollution in India is linked to increased gastrointestinal cancer risk, says experts
- Experts stress need for India-specific research on pollution's role in GI cancers
- Fine particulate matter and ozone cause systemic inflammation affecting the gut lining
जब भी हवा में बढ़ते जहर या स्मॉग की बात होती है, तो हमारे दिमाग में बस खांसी, दमा या फेफड़ों की बीमारी ही आती है. लेकिन अब जो बात सामने आ रही है वो वाकई डराने वाली है. डाक्टरों का कहना है कि हवा में मौजूद PM2.5 और जहरीली गैसें सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं सड़ा रही हैं, बल्कि हमारे पेट और पाचन तंत्र को भी भारी नुकसान पहुचा रही हैं.
हाल ही में सर गंगा राम अस्पताल और ब्रिटेन के द क्रिस्टी एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट की एक कान्फ्रेंस में इस बात पर गंभीर चर्चा हुई.
15 साल के बच्चों में भी दिख रहे लक्षण
गंगा राम अस्पताल के कैंसर विभाग के चेयरमैन डाक्टर श्याम अग्रवाल ने एक बेहद चिंताजनक बात बताई. उनका कहना है कि आज से पांच साल पहले ऐसा देखने को नहीं मिलता था, लेकिन अब ओपीडी में 15-15 साल के बच्चे भी पेट के कैंसर (GI कैंसर) की शिकायत लेकर आ रहे हैं.
- पहले पेट के कैंसर के लिए सिर्फ खराब खानपान, सिगरेट या तंबाकू को ही जिम्मेदार माना जाता था.
- लेकिन अब डाक्टर मान रहे हैं कि जिस जहरीली हवा में हम सांस ले रहे हैं, उसे नजरअंदाज करना भारी भूल होगी.
- दिल्ली जैसे बड़े और प्रदूषित शहरों में कम उम्र के लोगों में ये बीमारी तेजी से पैर पसार रही है.
सांस के रास्ते पेट तक कैसे पहुंचता है जहर
हवा का यह जहर फेफड़ों से पेट तक कैसे पहुंच जाता है, इसे समझना बहुत आसान है:
- जब हम सांस लेते हैं तो PM2.5 के बेहद बारीक कण हमारे फेफड़ों में गहराई तक चले जाते हैं.
- इनमें से कुछ कण खून में घुलकर पूरे शरीर में फैल जाते हैं.
- वहीं कई कण बलगम के जरिए गले तक आते हैं और हम जाने-अनजाने उन्हें थूक के साथ निगल लेते हैं, जिससे वे सीधे पेट और आंतों में पहुंच जाते हैं.
- ये जहरीले कण पेट के अंदरूनी हिस्से में सूजन पैदा करते हैं और वहां मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को खत्म कर देते हैं.
क्या कहती हैं दुनिया भर की रिसर्च
हाल ही में 'एपिडेमियोलॉजिक रिव्यूज' में करीब 70 रिसर्चों को मिलाकर एक बड़ी स्टडी सामने आई है. इसमें पाया गया कि लंबे समय तक PM2.5 के संपर्क में रहने से पेट और आंतों के कैंसर से मौत का खतरा काफी बढ़ जाता है.
इसके अलावा 'नेचर हेल्थ' की एक और स्टडी में 952 जगहों का डेटा देखा गया, जिसमें नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, ओजोन और PM2.5 से कैंसर के खतरे की कड़ी जुड़ी हुई पाई गई.
क्या प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को ही नुकसान पहुंचाता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण का असर केवल श्वसन तंत्र तक सीमित नहीं है. PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण रक्त प्रवाह और पाचन तंत्र तक पहुंच सकते हैं, जिससे सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है.
घबराएं नहीं, पर सतर्क जरूर रहें
डाक्टरों का यह भी साफ कहना है कि प्रदूषण और पेट के कैंसर के बीच सीधा कनेक्शन तलाशने के लिए अभी भारत में और रिसर्च की जरूरत है. कैंसर सिर्फ किसी एक वजह से नहीं होता.
- इसमें परिवार का इतिहास और जेनेटिक्स भी बहुत मायने रखते हैं.
- आपकी डाइट, लाइफस्टाइल और पेट का इन्फेक्शन भी इसके बड़े कारण हैं.
- लेकिन हवा का प्रदूषण इस आग में घी डालने का काम जरूर कर रहा है.
इसलिए जब भी हवा खराब हो तो सिर्फ मास्क लगाकर फेफड़ों को ही नहीं बचाना है, बल्कि अपनी डाइट को मजबूत रखना और समय पर डाक्टर से जांच कराना भी उतना ही जरूरी है.
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे किसी मेडिकल सलाह का विकल्प न समझें. सेहत से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए हमेशा अपने डाक्टर से सलाह लें.
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