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दिल्ली में कैंसर बन रहा साइलेंट किलर! रोज 70-80 मौतें, देर से पहचान सबसे बड़ी वजह

Delhi Cancer Cases: सबसे चिंताजनक बात यह है कि कैंसर से होने वाली ज्यादातर मौतों की जड़ बीमारी की देर से पहचान है. जब तक मरीज अस्पताल पहुंचता है, तब तक कैंसर गंभीर या आखिरी स्टेज में पहुंच चुका होता है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है.

दिल्ली में कैंसर बन रहा साइलेंट किलर! रोज 70-80 मौतें, देर से पहचान सबसे बड़ी वजह
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में दिल्ली में कुल 3,01,168 मौतें दर्ज की गईं.

Delhi Health Alert: देश की राजधानी दिल्ली से सामने आ रहे कैंसर से जुड़े आंकड़े लगातार डराने वाली तस्वीर पेश कर रहे हैं. दिल्ली सरकार की दिल्ली में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण पर वार्षिक रिपोर्ट - 2024 के मुताबिक, राजधानी में कैंसर अब मौत के बड़े कारणों में शामिल हो चुका है. यह बीमारी न सिर्फ बुजुर्गों को बल्कि मध्यम उम्र और कई मामलों में युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि कैंसर से होने वाली ज्यादातर मौतों की जड़ बीमारी की देर से पहचान है. जब तक मरीज अस्पताल पहुंचता है, तब तक कैंसर गंभीर या आखिरी स्टेज में पहुंच चुका होता है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है.

आज के समय में जब आधुनिक जांच तकनीक और इलाज मौजूद हैं, तब भी इतनी बड़ी संख्या में लोगों का कैंसर से जान गंवाना इस बात की ओर इशारा करता है कि जागरूकता, नियमित जांच और समय पर इलाज में अभी भी बड़ी कमी है.

2023 में कैंसर से गईं हजारों जानें:

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में दिल्ली में कुल 3,01,168 मौतें दर्ज की गईं. इनमें से करीब 9 से 10 प्रतिशत मौतों की वजह कैंसर रहा. इसका मतलब है कि एक ही साल में लगभग 27 से 30 हजार लोगों की जान कैंसर ने ले ली.

अगर औसत निकाला जाए, तो हर दिन 75 से 80 मौतें सिर्फ कैंसर के कारण हुईं. हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह आंकड़ा साफ तौर पर दिखाता है कि कैंसर से मौतें अब एक गंभीर पब्लिक हेल्थ समस्या बन चुकी है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक साबित हो सकता है.

2024 में कुल मौतें घटीं, लेकिन खतरा बरकरार:

साल 2024 में दिल्ली में कुल 2,94,464 मौतें दर्ज की गईं. हालांकि कुल मौतों की संख्या में थोड़ी कमी जरूर आई, लेकिन कैंसर से होने वाली मौतों का अनुपात लगभग वही बना रहा.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भी करीब 26 से 28 हजार लोगों की जान कैंसर ने ली. यानी औसतन हर दिन 70 से ज्यादा मौतें कैंसर की वजह से हुईं. इससे साफ है कि बीमारी की पकड़ अभी भी मजबूत बनी हुई है और हालात में कोई बड़ा सुधार नजर नहीं आ रहा.

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कैंसर की देर से पहचान क्यों होती है?

डॉक्टरों के अनुसार, कैंसर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं:

  • लगातार थकान
  • अचानक वजन कम होना
  • लंबे समय तक खांसी
  • शरीर में किसी जगह गांठ
  • बार-बार बुखार
  • खून की कमी

इन संकेतों को लोग अक्सर सामान्य समस्या समझकर टाल देते हैं. यही लापरवाही आगे चलकर जानलेवा साबित होती है। जब लक्षण गंभीर होते हैं, तब तक बीमारी काफी फैल चुकी होती है.

समय पर पहचान ही सबसे बड़ा बचाव

हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर कैंसर की पहचान शुरुआती स्टेज में हो जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. इसके लिए जरूरी है:

  • नियमित हेल्थ चेकअप.
  • तंबाकू और शराब से दूरी.
  • किसी भी असामान्य लक्षण को हल्के में न लेना.
  • डॉक्टर की सलाह पर समय पर जांच कराना.

दिल्ली में 2023 और 2024- दोनों ही सालों में कैंसर से होने वाली मौतों की संख्या बेहद चिंताजनक रही है. हर दिन औसतन 70 से 80 लोग इस बीमारी के कारण अपनी जान गंवा रहे हैं. एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर जांच ही इस जानलेवा बीमारी से बचने का सबसे मजबूत और कारगर तरीका है. जागरूकता ही कैंसर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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