Budget 2026 For Health: भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बजट 2026-27 एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है. पहली बार देश का हेल्थकेयर बजट 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है. यूनियन बजट 2026-27 में हेल्थ सेक्टर के लिए कुल 1,04,599 करोड़ का प्रावधान किया गया है. यह न सिर्फ आंकड़ों के लिहाज से बड़ा है, बल्कि सरकार की उस सोच को भी दर्शाता है, जिसमें स्वास्थ्य को विकास की बुनियाद माना जा रहा है. बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कहा कि देश में मजबूत, समावेशी और आधुनिक हेल्थकेयर सिस्टम तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है. इस बजट में इलाज, रिसर्च, मेडिकल टूरिज्म, आयुष और जिला स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं हर पहलू को छूने की कोशिश की गई है.
हेल्थकेयर के लिए 1,04,599 करोड़ रुपये: क्यों है यह खास?
वित्त वर्ष 2026-27 में स्वास्थ्य क्षेत्र को दिए गए 1,04,599 करोड़ रुपये पिछले साल के मुकाबले बड़ा इजाफा है. 2025-26 में हेल्थ मिनिस्ट्री को 98,311 करोड़ मिले थे. अगर पिछले दस वर्षों पर नजर डालें, तो 2015 में हेल्थ बजट सिर्फ 34,286 करोड़ रुपये था, जो अब लगभग 191% बढ़ चुका है. यह दिखाता है कि सरकार ने हेल्थ सेक्टर को धीरे-धीरे मजबूत करने की ठोस रणनीति अपनाई है.
पिछले 12 सालों में हेल्थ बजट में 176% से ज्यादा की बढ़ोत्तरी
इस बार का हेल्थ बजट ऐतिहासिक रहा, जो कि 2025-26 के संशोधित अनुमान से 8.96 प्रतिशत ज्यादा है. पिछले 12 सालों में स्वास्थ्य बजट में कुल मिलाकर 176% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.

मेडिकल टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
बजट 2026 की एक बड़ी घोषणा है, 5 मेडिकल टूरिज्म हब की स्थापना. ये हब निजी क्षेत्र के सहयोग से बनाए जाएंगे. जिन प्रमुख संस्थानों को इसमें शामिल किया गया है, वे हैं अपोलो, मैक्स, फोर्टिस, डॉक्टर लाल पैथ लैब्स और मेट्रोपोलिस. इस पहल से भारत न केवल देशी मरीजों के लिए बल्कि विदेशी मरीजों के लिए भी एक भरोसेमंद मेडिकल डेस्टिनेशन बनेगा.
आयुष और ट्रेडिशनल मेडिसिन पर फोकस:
सरकार ने आयुष सेक्टर को भी मजबूती देने का ऐलान किया है. इसके तहत तीन नए ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद स्थापित किए जाएंगे. आयुष फार्मेसी और ड्रग टेस्टिंग लैब्स को अपग्रेड किया जाएगा. गुजरात के जामनगर स्थित WHO ग्लोबल ट्रेडिशनल मेडिसिन सेंटर को और आधुनिक बनाया जाएगा. इससे आयुर्वेद और ट्रेडिशनल ट्रीटमेंट को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी.
जिला अस्पतालों में 50% क्षमता बढ़ेगी:
बजट में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रॉमा केयर सेंटर बनाकर उनकी क्षमता 50% तक बढ़ाई जाएगी. इससे गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिलेगा और बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी. साथ ही बुजुर्गों के लिए जेरियाट्रिक केयर सिस्टम को भी मजबूत किया जाएगा.
पिछले सालों में हेल्थ बजट का सफर:
साल | बजट करोड़ रुपये में |
| 2018-19 | 52,800 करोड़ |
| 2019-20 | 62,659 करोड़ |
| 2020-21 | 65,012 करोड़ |
| 2021-22 | 73,932 करोड़ |
| 2022-23 | 86,200 करोड़ |
| 2023-24 | 79,221 करोड़ |
| 2024-25 | 90,959 करोड़ |
| 2025-26 | 98,311 करोड़ |
बजट 2026–27 साफ संकेत देता है कि भारत अब हेल्थकेयर को खर्च नहीं, बल्कि निवेश के रूप में देख रहा है. 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का हेल्थ बजट, मेडिकल टूरिज्म हब, आयुष को बढ़ावा और जिला अस्पतालों की मजबूती, ये सभी कदम मिलकर भारत को एक मजबूत और आत्मनिर्भर हेल्थकेयर सिस्टम की ओर ले जाते हैं.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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