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एम्बुलेंस को लगा झटका, ज‍िंदा हो गईं 'ब्रेन डेड' महिला! चमत्कार या मेडिकल चूक, क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर

डॉक्टर भी हैरान हैं कि यह कैसे संभव हुआ. जहां कुछ लोग इसे चमत्कार कह रहे हैं, वहीं विज्ञान के नज़रिए से इसके पीछे की वजह कुछ और भी हो सकती है.

एम्बुलेंस को लगा झटका, ज‍िंदा हो गईं 'ब्रेन डेड' महिला! चमत्कार या मेडिकल चूक, क्‍या कहते हैं डॉक्‍टर

कौन कहता है कि चमत्कार नहीं होते? उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक ऐसा वाक्या हुआ है जिसे सुनकर आप भी दांतों तले उंगली दबा लेंगे. डॉक्टरों ने जिस महिला को लगभग 'ब्रेन डेड' मान लिया था और जिसके अंतिम संस्कार की तैयारियां घर पर शुरू हो चुकी थीं, उसी महिला की सांसें अचानक एम्बुलेंस में लौट आईं. इलाज के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर वापस पहुंच चुकी हैं. जहां एक ओर परिवार अंतिम विदाई की तैयारी कर रहा था, वहीं नियति को कुछ और ही मंजूर था. आइए, इस पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं.

मौत के मुंह से वापसी की कहानी

पीलीभीत की रहने वाली विनीता शुक्ला 22 फरवरी को अचानक अपने घर पर बेहोश होकर गिर पड़ी थीं. कई दिनों तक वेंटिलेटर पर रहने और डॉक्टरों द्वारा उम्मीद छोड़ देने के बाद, जब उन्हें अंतिम संस्कार के लिए घर ले जाया जा रहा था, तभी एम्बुलेंस को लगे एक ज़ोरदार झटके (गड्ढे के कारण) ने उनकी सांसें लौटा दीं. अब डॉक्टर भी हैरान हैं कि यह कैसे संभव हुआ. जहां कुछ लोग इसे चमत्कार कह रहे हैं, वहीं विज्ञान के नज़रिए से इसके पीछे की वजह कुछ और भी हो सकती है.

केस की टाइमलाइन और लक्षण

22 फरवरी: विनीता शुक्ला अचानक बेहोश हुईं, उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया.
रेफरल: स्थिति गंभीर होने पर उन्हें बरेली के एक बड़े निजी अस्पताल में रेफर किया गया.
वेंटिलेटर: यहां उन्हें दो दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया.

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उस समय दिखने वाले लक्षण:

  • शरीर में किसी भी तरह की हलचल (Movement) का न होना.
  • हाथ-पैर पूरी तरह सुन्न होना.
  • आँखों की पुतलियों का फैल जाना (Dilated Pupils).
  • डॉक्टरों को आशंका थी कि वेंटिलेटर हटते ही उनकी मृत्यु हो जाएगी.

मेडिकल दृष्टिकोण: कब माना जाता है किसी को 'ब्रेन डेड'?

इस विषय पर राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML), दिल्ली के न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी ने विस्तार से जानकारी दी. उनके अनुसार, किसी को 'ब्रेन डेड' घोषित करने से पहले निम्नलिखित परीक्षण अनिवार्य हैं:

1. मेड्यूला परीक्षण: मस्तिष्क का वह हिस्सा जो सांस और धड़कन को नियंत्रित करता है.
2. रिफ्लेक्स टेस्ट: कफ रिफ्लेक्स, आई-बॉल मूवमेंट और पुतलियों की प्रतिक्रिया.
3. कोल्ड कैलोरी टेस्ट: कान के जरिए मस्तिष्क की प्रतिक्रिया जांचना.
4. एप्निया टेस्ट (Apnea Test): यह अंतिम क्लिनिकल टेस्ट है जिसके आधार पर ही किसी को आधिकारिक तौर पर 'ब्रेन डेड' घोषित किया जाता है.

क्या 'ब्रेन डेड' व्यक्ति दोबारा जीवित हो सकता है?

जब डॉ. अजय चौधरी से यह पूछा गया कि क्या वाकई कोई ब्रेन डेड व्यक्ति दोबारा जीवित हो सकता है, तो उन्होंने स्पष्ट किया:

"मेडिकली यह संभव नहीं है कि ब्रेन डेड घोषित व्यक्ति दोबारा जीवित हो जाए. विनीता शुक्ला के केस में संभव है कि जांच के दौरान कोई तकनीकी त्रुटि हुई हो या 'क्लिनिकल डेथ' और 'ब्रेन डेथ' के बीच के बारीक अंतर को समझने में चूक हुई हो."

क्या किसी अन्य बीमारी में भी ऐसे लक्षण दिख सकते हैं?

जी हां, कुछ स्थितियां जैसे गहरा कोमा (Deep Coma), गंभीर हाइपोथर्मिया (शरीर का तापमान बहुत गिर जाना), या कुछ विशेष प्रकार के ड्रग ओवरडोज़ में शरीर ऐसे लक्षण दिखा सकता है जो 'ब्रेन डेड' जैसे लगते हैं, लेकिन उनमें वापसी की संभावना बनी रहती है.

(यह लेख दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल (RML) में न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी से बातचीत पर आधार‍ित है.)

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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