गर्मियां शुरू होते ही हमारा खान पान पूरी तरह बदल जाता है. हम ठंडी चीजें ढूंढते हैं, ज्यादा पानी पीते हैं और हल्का खाना पसंद करते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस रोटी को आप रोज खाते हैं, क्या उसका आटा आपकी सेहत को गर्मी में परेशान कर सकता है. जी हां, आयुर्वेद और मॉडर्न न्यूट्रिशन दोनों कहते हैं कि हर अनाज की अपनी तासीर होती है. कुछ अनाज शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं तो कुछ गर्मी बढ़ा देते हैं. अगर आप भी इस कन्फ्यूजन में हैं कि गर्मियों में कौन सा आटा खाना बेस्ट है, तो यह जानकारी आपके बहुत काम आने वाली है.
क्यों बदलना चाहिए गर्मी में अपना आटा
फोर्टिस गुरुग्राम में न्यूट्रिशन हेड दीप्ति खाटूजा ने कहा कि ''सर्दियों में हम बाजरा, मक्का या रागी जैसी चीजें खूब खाते हैं क्योंकि इनकी तासीर गर्म होती है. ये हमें ठंड से बचाते हैं. लेकिन जैसे ही पारा 40 डिग्री के पार जाता है, यही अनाज हमारे पेट में जलन, एसिडिटी या स्किन पर दानों का कारण बन सकते हैं. गर्मियों में हमें ऐसे आटे की जरूरत होती है जो आसानी से पच जाये और शरीर का तापमान कंट्रोल में रखे.''
जौ का आटा है गर्मियों का सुपरफूड
गर्मी के जिए जौ का आटा बेस्ट माना जाता है. जौ के आटे पर हुए बहुत से अध्ययनों में पाया गया कि जौ का आटा ग्लूकॉन, टॉकोल्स और रेजिस्टेंस स्टार्च होता है जो सेहत के लिए काफी अच्छा है. जौ का ग्लूकेन आंतों के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है और ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम कर सकता है. टोकोल्स सीरम कोलेस्ट्रॉल को कम करते हैं, जबकि रेजिस्टेंट स्टार्च आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है और रक्त शर्करा को घटा सकता है.
पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट डॉक्टर समीर भाटी कहते हैं-

जौ के फायदे:
- यह शरीर को हाइड्रेटेड रखता है और यूरिन इन्फेक्शन के खतरे को कम करता है.
- इसमें मौजूद बीटा ग्लूकन कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखता है.
- गर्मियों में होने वाली सुस्ती को दूर कर एनर्जी देता है.
एक्सपर्ट की राय:
फोर्टिस गुरुग्राम में न्यूट्रिशन हेड दीप्ति खाटूजा ने एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में इस बारे में विस्तार से बताया था. उन्होंने कहा था कि

डॉ समीर भाटी ने भी दी सलाह
इसी तरह स्टार इमेजिंग के डायरेक्टर डॉ समीर भाटी ने भी डीटीवी से बातचीत में गर्मियों के खान पान पर जोर दिया था. डॉ समीर भाटी का कहना है कि गर्मियों में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक से बचने के लिए अनाज का सही चुनाव बहुत जरूरी है. उन्होंने जिक्र किया था कि मल्टीग्रेन आटा जिसमें जौ, चना और सोयाबीन शामिल हो, वह गर्मियों के लिए सबसे बैलेंस डाइट है.
डॉ भाटी के अनुसार जब हम गर्मियों में ज्यादा भारी या गर्म तासीर वाला अनाज खाते हैं, तो इससे मेटाबॉलिज्म पर दबाव पड़ता है, जिससे थकान और घबराहट महसूस हो सकती है. इसलिए हल्का और ठंडा अनाज ही बेस्ट है.
ज्वार का आटा भी है अच्छा विकल्प
ज्वार को भी गर्मियों का दोस्त माना जाता है. यह ग्लूटेन फ्री होता है और इसमें मैग्नीशियम व कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है. ज्वार की रोटियां मुलायम बनती हैं और यह पेट को लंबे समय तक भरा रखती हैं. अगर आपको बहुत ज्यादा गर्मी लगती है या पसीना ज्यादा आता है, तो ज्वार की रोटी आपके लिए परफेक्ट है.
चने का आटा यानी सत्तू
सत्तू को तो गरीबों का प्रोटीन कहा जाता है. भुने हुए चने का आटा यानी सत्तू गर्मियों में अमृत की तरह काम करता है. आप इसकी रोटी बना सकते हैं या इसका शरबत पी सकते हैं. यह शरीर को तुरंत ठंडक देता है और लू से बचाता है. चने के आटे में मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों को मजबूत रखता है और थकान नहीं होने देता.

गर्मियों के लिए आटे का परफेक्ट मिक्सचर
अगर आप सिर्फ एक तरह का आटा नहीं खाना चाहते, तो आप घर पर ही गर्मियों का स्पेशल आटा तैयार कर सकते हैं. इसके लिए आप यह रेशियो ट्राई करें:
- 5 किलो गेहूं का आटा
- 1 किलो जौ का आटा
- 1 किलो चने का आटा
- आधा किलो सोयाबीन का आटा
इस मिक्सचर से बनी रोटियां बहुत ही स्वादिष्ट और सेहतमंद होती हैं. यह न तो ज्यादा गर्म होती हैं और न ही बहुत भारी.
गर्मियों में इन आटों से बचें
- बाजरा: इसकी तासीर बहुत गर्म होती है, इसलिए इसे जून जुलाई की गर्मी में खाने से बचना चाहिए.
- मक्का: मक्का भी पचाने में थोड़ा भारी होता है और शरीर में गर्मी पैदा कर सकता है.
- कुट्टू या सिंघाड़ा: ये व्रत के आटे भी काफी गर्म होते हैं, इन्हें सिर्फ खास मौकों पर ही सीमित मात्रा में खाएं.
सेहतमंद रहने का सबसे आसान तरीका है मौसम के हिसाब से अपनी थाली को बदलना. जैसे हम गर्मियों में सूती कपड़े पहनते हैं, वैसे ही हमारे पेट को भी ठंडा अनाज चाहिए. जौ, ज्वार और चने का आटा अपनाकर आप न सिर्फ बीमारियों से दूर रहेंगे बल्कि पूरे दिन एक्टिव महसूस करेंगे. तो इस बार अपनी किचन में जौ के आटे को जगह जरूर दें.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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