आजकल इंटरनेट पर 'गट हेल्थ' को बेहतर बनाने के नाम पर कई तरह के ट्रेंड्स और टिप्स देखने को मिलते हैं. कई लोग तो ऐसे भी हैं, जो इन्हें रोजमर्रा की आदतों में शामिल कर भी लेते हैं, लेकिन आज सवाल यह है कि क्या हर वायरल ट्रेंड सच में लाभदायक हो, यह जरूरी है? इसी सवाल को ध्यान में रखते हुए AIIMS, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड जैसे बड़े संस्थानों से पढ़ाई कर चुके मशहूर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक बेहद जानकारी से भरा पोस्ट शेयर किया है, जिसमें उन्होंने कुछ ऐसे गट हेल्थ ट्रेंड्स की चर्चा की है, जो सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन जिन्हें वह अपनी दिनचर्या में शामिल नहीं करते.
फाइबर की मात्रा का ध्यान रखें
डॉ. सेठी के अनुसार, एक साथ बहुत ज्यादा फाइबर लेना शरीर के लिए अच्छा नहीं होता. कई लोग स्मूदी में इसबगोल, इन्यूलिन और चिया सीड्स जैसी चीजें बड़ी मात्रा में मिला लेते हैं, जिससे पेट फूलने और गैस की समस्या हो सकती है. उनका कहना है कि शरीर को ज्यादा फाइबर अपनाने के लिए समय चाहिए, इसलिए धीरे-धीरे मात्रा बढ़ानी चाहिए.
कच्चा दूध है अच्छा
आजकल बिना उबाला या बिना पाश्चराइज़ किया गया दूध पीने का ट्रेंड भी बढ़ रहा है, लेकिन डॉ. सेठी इसके खिलाफ सलाह देते हैं. उनका कहना है कि ऐसे दूध में साल्मोनेला, ई. कोलाई और लिस्टेरिया जैसे खतरनाक बैक्टीरिया हो सकते हैं, जो पेट और आंतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
गट डिटॉक्स के लिए क्लोरोफिल वाटर
कई लोग दावा करते हैं कि क्लोरोफिल वाला पानी पीने से पेट की सफाई हो जाती है, लेकिन डॉ. सेठी के अनुसार, इसके फायदे साबित करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं. उनका मानना है कि क्लोरोफिल वाटर की जगह रोजाना ताजी सब्जियां खाना ज्यादा फायदेमंद है.
बीनटॉक चैलेंज
सोशल मीडिया पर वायरल बीनटॉक चैलेंज में लोगों को रोज 2 कप बीन्स खाने की सलाह दी जाती है ताकि फाइबर की जरूरत पूरी हो सके. हालांकि फाइबर शरीर के लिए अच्छा है, लेकिन अचानक इतनी ज्यादा मात्रा में बीन्स खाने से पेट फूल सकता है और गैस की समस्या हो सकती है. इसलिए इसकी मात्रा धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए.
पेट के कीड़ों का इलाज
कुछ लोग पाचन संबंधी समस्याओं का कारण शरीर में परजीवी (पैरासाइट) बताते हैं और उन्हें हटाने के लिए हर्बल क्लेंज़ अपनाने की सलाह देते हैं. डॉ. सेठी का कहना है कि ज़्यादातर मामलों में पेट की समस्याएं पैरासाइट की वजह से नहीं होतीं. ऐसे क्लेंज़ आंतों में जलन पैदा कर सकते हैं और शरीर में जरूरी पोषक तत्त्वों की कमी भी कर सकते हैं.
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