Cause of Death: मौत की सटीक वजह (Cause of Death) क्या है, अब इसकी पहचान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए होगी. इसको लेकर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने एल्गोरिदम पर काम शुरू किया है और अगर सबकुछ सही रहा तो यह सिस्टम जल्द ही विकसित होगा. जानकारी के अनुसार, इसमें देश के शोध संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से सहायता ली जाएगी, जिसके तहत फोरेंसिक विशेषज्ञ डाटा साझा करेंगे.

बीमारी-वार मृत्यु दर के मिलेंगे सटीक आंकड़े
आईसीएमआर के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने अनुसार, चेन्नई स्थित राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (NIR) की निगरानी में अस्पतालों के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर कॉज ऑफ डेथ तय किया जाएगा. इसके लिए आईसीएमआर ने देश के मेडिकल कॉलेज, विश्वविद्यालय, इंजीनियरिंग कॉलेज, रिसर्च लैब, एनजीओ, सरकारी और निजी संस्थानों से 17 अप्रैल तक सहयोग करने के लिए आवेदन मांगा है. इसमें उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी, जिनके पास एआई, लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) और हेल्थ डाटा एनालिटिक्स का अनुभव होगा. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सिस्टम अस्पतालों के क्लिनिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण कर मृत्यु के वास्तविक कारणों की पहचान करेगा और डेटा को मानकीकृत रूप में प्रस्तुत करेगा. इससे बीमारी-वार मृत्यु दर के अधिक सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे, जो स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण और संसाधनों के बेहतर आवंटन में सहायक होंगे.
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बीमारियों के वास्तिवक ट्रेंड की होगी पहचान
नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के एक फॉरेसिंक विशेषज्ञ ने बताया कि मौजूदा समय में बड़ी संख्या में मृत्यु के कारण सामान्य या अधूरे रूप में दर्ज किए जाते हैं, जिससे बीमारियों के सही रुझान साफ नहीं हो पाते. एआई आधारित विश्लेषण इस कमी को दूर करने में सहायक हो सकता है. हालांकि, यह पहल अस्पतालों में उपलब्ध डाटा और डिजिटल रिकॉर्डिंग व्यवस्था पर निर्भर करेगी. कई क्षेत्रों में अब भी मेडिकल रिकॉर्ड पूरी तरह डिजिटल नहीं हैं और मौत प्रमाणन की प्रक्रिया में मानकीकरण की कमी है.
मौत की सही वजह नहीं होती दर्ज
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ के डायरेक्टर दिलीप मावलंकर ने बताया कि देश में जन्म और मृत्यु प्रणाली व्यवस्थित नहीं है. उन्होंने उत्तर प्रदेश के दो जिलों का उदाहरण देते हुए कहा कि बलिया और देवरिया में साल 2023 में 15 से 22 जून के बीच 140 से अधिक लोगों की मौत हुई. उस समय बलिया में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस था. यहां जांच करने गई टीम ने भी भीषण गर्मी को मौत की वजह बताई लेकिन कागजों पर यह नहीं लिखा गया क्योंकि अधिकांश मरीजों को पहले से ही स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं थीं. अगर कोई हृदय रोगी है और उसकी मौत गर्मी से होती है तो कागजों पर अचानक से आए हार्ट अटैक को डेथ ऑफ कॉज लिख दिया जाता है.
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