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आ गया AI वाला डिजिटल स्टेथोस्कोप, हार्ट डिजीज का दोगुनी तेजी से लगाएगा पता, बच सकती हैं कई जिंदगियां

AI Digital stethoscope: हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में यह सामने आया है कि AI वाला डिजिटल स्टेथोस्कोप दिल की गंभीर वाल्व बीमारी (Valvular Heart Disease - VHD) की पहचान पारंपरिक स्टेथोस्कोप की तुलना में लगभग दोगुनी सटीकता से कर सकता है.

आ गया AI वाला डिजिटल स्टेथोस्कोप, हार्ट डिजीज का दोगुनी तेजी से लगाएगा पता, बच सकती हैं कई जिंदगियां
AI Digital Stethoscope: AI स्टेथोस्कोप डॉक्टरों की जगह नहीं ले रहा, बल्कि उनकी मदद कर रहा है.

AI Stethoscope Heart Disease Detection: आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेजी से हेल्थकेयर का चेहरा बदल रहा है. जहां पहले डॉक्टर केवल अपने अनुभव और पुराने उपकरणों पर निर्भर रहते थे, वहीं अब डिजिटल तकनीक उनके काम को और सटीक बना रही है. हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में यह सामने आया है कि AI वाला डिजिटल स्टेथोस्कोप दिल की गंभीर वाल्व बीमारी (Valvular Heart Disease - VHD) की पहचान पारंपरिक स्टेथोस्कोप की तुलना में लगभग दोगुनी सटीकता से कर सकता है. यह स्टडी जर्नल यूरोपियन हार्ट डिजिटल हेल्थ में प्रकाशित हुई है.

यह खोज इसलिए मायने रखती है क्योंकि दिल की वाल्व बीमारी अक्सर लंबे समय तक बिना लक्षण के रहती है और जब तक पता चलता है, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी होती है. ऐसे में अगर प्राइमरी लेवल पर ही बीमारी का सही अंदाजा लग जाए, तो समय रहते इलाज संभव हो सकता है.

वाल्वुलर हार्ट डिजीज क्या है? | What is Valvular Heart Disease?

वाल्वुलर हार्ट डिजीज (VHD) वह स्थिति है जिसमें दिल के एक या एक से ज्यादा वाल्व जैसे एओर्टिक, माइट्रल, ट्राइकसपिड या पल्मोनरी वाल्व सही तरीके से खुलते या बंद नहीं होते. इससे खून का प्रवाह प्रभावित होता है.

मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • सांस फूलना
  • थकान
  • सीने में दर्द
  • धड़कन तेज या अनियमित होना

हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार आधे से ज्यादा मरीजों में शुरुआती स्टेज में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते. यही वजह है कि समय पर पहचान चुनौतीपूर्ण होती है.

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अध्ययन कैसे किया गया?

यह एक प्रॉस्पेक्टिव अध्ययन था, जो जून 2021 से मई 2023 के बीच तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में किया गया. इसमें 50 साल या उससे ज्यादा उम्र के 357 ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जिन्हें हार्ट डिजीज का खतरा था, लेकिन पहले कभी वाल्व बीमारी का निदान नहीं हुआ था.

दो तरह की जांच की गई:

  • पारंपरिक जांच (Standard of Care) - डॉक्टरों ने सामान्य स्टेथोस्कोप से दिल की आवाज सुनी.
  • AI डिजिटल स्टेथोस्कोप- डिजिटल रिकॉर्डिंग लेकर AI एल्गोरिद्म ने हार्ट बीट का विश्लेषण किया.

सभी प्रतिभागियों की इकोकार्डियोग्राफी भी की गई, जिससे असली स्थिति की पुष्टि की जा सके.

क्या रहे प्रमुख नतीजे?

AI सिस्टम की संवेदनशीलता (Sensitivity) 92.3% रही, जबकि पारंपरिक जांच की केवल 46.2%. यानी AI ने गंभीर मामलों की पहचान लगभग दोगुनी संख्या में की. AI ने 12 नए मध्यम से गंभीर मामलों की पहचान की, जबकि डॉक्टरों ने केवल 6. हालांकि, AI की विशिष्टता (Specificity) 86.9% रही, जो डॉक्टरों (95.6%) से थोड़ी कम थी. इसका मतलब है कि AI में गलत-सकारात्मक (false positive) मामले थोड़ा ज्यादा थे.

इसका क्या मतलब है?

AI स्टेथोस्कोप डॉक्टरों की जगह नहीं ले रहा, बल्कि उनकी मदद कर रहा है. इसे एक दूसरी सुरक्षा परत की तरह देखा जा सकता है. इसके फायदों में जल्दी पहचान, बिना लक्षण वाले मरीजों में भी बीमारी पकड़ना, समय पर विशेषज्ञ के पास रेफर करना.

यह अध्ययन बताता है कि AI डिजिटल स्टेथोस्कोप प्राइमरी हेल्थ सर्विस में एक बड़ा बदलाव ला सकता है. हालांकि इससे मरीजों के अंतिम इलाज या जीवन प्रत्याशा (life Expectancy) में कितना सुधार होगा, यह अभी साफ नहीं है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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