Chandigarh News: हरियाणा में फ्रीलांसिंग, डिलीवरी और अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले गिग वर्कर्स (Gig Workers) के दिन अब बदलने वाले हैं. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (Nayab Singh Saini) ने बुधवार (27 मई) को घोषणा की है कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा (Social Security) देने के लिए नई योजनाएं तैयार कर रही हैं. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पूरे राज्य में एक विशेष अभियान चलाकर सभी गिग वर्कर्स का रजिस्ट्रेशन (Registration) किया जाए ताकि उन्हें सरकार की इन कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूक किया जा सके और उनका सीधा लाभ दिया जा सके.
सीएम के सामने रखा गया 5 साल का रोडमैप
मुख्यमंत्री ने यह अहम निर्देश चंडीगढ़ में श्रम विभाग (Labour Department) के अगले पांच सालों के रोडमैप की समीक्षा करते हुए दिए. यह बैठक 'हरियाणा विजन 2047' के तहत बुलाई गई थी. बैठक में मुख्यमंत्री सैनी ने असंगठित क्षेत्र (Unorganised Sector) के श्रमिकों के कल्याण और वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अधिकारियों को कई कड़े दिशा-निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष के बजट में ही गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा और अन्य लाभ देने के लिए बजट का आवंटन कर दिया था और अब केंद्र सरकार भी इनके कल्याण के लिए योजनाओं पर काम कर रही है.
हरियाणा में अभी कितने गिग वर्कर्स रजिस्टर्ड हैं?
बैठक के दौरान श्रम विभाग के प्रधान सचिव राजीव रंजन ने राज्य के मौजूदा आंकड़े साझा किए. उन्होंने बताया कि वर्तमान में हरियाणा में 21,777 गिग वर्कर्स रजिस्टर्ड हैं और बाकी बचे हुए सभी गिग वर्कर्स को इस दायरे में लाने के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है. मुख्यमंत्री ने यह भी साफ किया कि श्रम विभाग के माध्यम से इन श्रमिकों के लिए 30 से अधिक योजनाएं पाइपलाइन में हैं, जिन पर काम किया जा रहा है.
कामकाजी महिलाओं के लिए हर जिले में बनेंगे हॉस्टल और क्रैचकार्यक्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें एक सुरक्षित माहौल देने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक और बड़ा निर्देश दिया है. अब हरियाणा के हर जिले में कामकाजी महिलाओं के लिए वर्किंग वुमन हॉस्टल (Working Women Hostels) बनाए जाएंगे. इसके साथ ही, कामकाजी महिलाओं के छोटे बच्चों की देखरेख के लिए क्रैच (Creches) की सुविधा भी विकसित की जाएगी, ताकि महिलाएं बिना किसी पारिवारिक चिंता के काम कर सकें.
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