France vs Spain FIFA World Cup Head to Head: FIFA वर्ल्ड कप के इतिहास में कुछ मुकाबले ऐसे होते हैं, जिनका इंतजार सिर्फ दो देशों के प्रशंसक ही नहीं, पूरी फुटबॉल दुनिया करती है. फ्रांस और स्पेन की भिड़ंत भी उन्हीं मुकाबलों में शामिल है. मंगलवार को जब दोनों टीमें सेमीफाइनल में आमने-सामने उतरेंगी तो यह FIFA वर्ल्ड कप के इतिहास में सिर्फ दूसरी बार होगा, जब इन दोनों यूरोपीय दिग्गजों की टक्कर होगी. इससे पहले विश्व कप में दोनों टीमें सिर्फ एक बार भिड़ी थीं. जर्मनी में खेले गए 2006 वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 16 में फ्रांस ने पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए स्पेन को 3-1 से हराया था. अब करीब 20 साल बाद दोनों टीमें फिर आमने-सामने हैं और इस बार इनाम सीधे फाइनल का टिकट है.
एम्बाप्पे बनाम यामल, दो पीढ़ियों का मुकाबला
यह सेमीफाइनल सिर्फ दो टीमों की लड़ाई नहीं, बल्कि दो अलग-अलग दौर के सितारों की भी टक्कर होगी. एक तरफ फ्रांस के कप्तान किलियन एम्बाप्पे हैं, जिन्होंने इस टूर्नामेंट में अब तक आठ गोल दागकर गोल्डन बूट की दौड़ में खुद को सबसे आगे बनाए रखा है. दूसरी तरफ स्पेन के युवा स्टार लामिन यामल हैं, जिन्हें दुनिया फुटबॉल का अगला बड़ा सुपरस्टार मान रही है.
यूरो 2024 में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके यामल ने इस वर्ल्ड कप में भी धीरे-धीरे लय पकड़ी है. बेल्जियम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में उनका प्रदर्शन शानदार रहा और उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया.
फ्रांस की ताकत उसका आक्रमण
फ्रांस लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंचने के इरादे से मैदान में उतरेगा. 2018 में उसने खिताब जीता था, जबकि 2022 में फाइनल तक पहुंचने के बावजूद अर्जेंटीना से पेनल्टी शूटआउट में हार गया था. एम्बाप्पे के अलावा फ्रांस के पास उस्मान डेम्बेले और माइकल ओलिस जैसे तेज और रचनात्मक फॉरवर्ड मौजूद हैं. ओलिस की रफ्तार और ड्रिब्लिंग विरोधी डिफेंस को लगातार दबाव में रखती है, जबकि डेम्बेले किसी भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं.बेंच पर भी ब्रैडली बारकोला और डेसिरे डौए जैसे विकल्प फ्रांस की अटैकिंग गहराई को और मजबूत बनाते हैं.
स्पेन की पहचान बना संतुलन
दूसरी ओर स्पेन इस टूर्नामेंट में बेहद संतुलित प्रदर्शन करता आया है. शुरुआती मैच में केप वर्डे के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ के बाद टीम ने लगातार शानदार खेल दिखाया और सेमीफाइनल तक का सफर तय किया. कोच लुइस डे ला फुएंते ने टीम को फिर उसी पजेशन-आधारित फुटबॉल की राह पर लौटाया है, जिसने कभी स्पेन को दुनिया की सबसे मजबूत टीम बनाया था. गेंद पर नियंत्रण, छोटे-छोटे पास और धैर्य के साथ हमला तैयार करना इस टीम की सबसे बड़ी ताकत है.
डिफेंस ने भी पूरे टूर्नामेंट में प्रभावित किया है. बेल्जियम के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में मिला गोल स्पेन के खिलाफ इस वर्ल्ड कप का पहला गोल था.
हालिया रिकॉर्ड स्पेन के पक्ष में
अगर हाल के मुकाबलों पर नजर डालें तो स्पेन का पलड़ा भारी दिखाई देता है. उसने यूरो 2024 के सेमीफाइनल में फ्रांस को 2-1 से हराया था. इसके बाद 2025 नेशंस लीग के रोमांचक सेमीफाइनल में भी स्पेन ने 5-4 से जीत दर्ज की थी.
इसी आत्मविश्वास के साथ लामिन यामल ने कहा था कि फ्रांस को स्पेन से डरना चाहिए. हालांकि बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मतलब सिर्फ इतना था कि स्पेन यूरोपियन चैंपियन है और उसे किसी टीम से डरने की जरूरत नहीं है.
कोच डेसचैम्प्स के लिए आखिरी मिशन
फ्रांस के मुख्य कोच डिडिएर डेसचैम्प्स के लिए यह टूर्नामेंट भावनात्मक भी है. 14 साल तक टीम की कमान संभालने के बाद वह इस वर्ल्ड कप के बाद पद छोड़ देंगे. खिलाड़ी और कोच, दोनों भूमिकाओं में विश्व कप जीत चुके डेसचैम्प्स अपने कार्यकाल का अंत एक और खिताब के साथ करना चाहेंगे.
हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि हाल के नतीजों को देखते हुए स्पेन इस मुकाबले में मजबूत दावेदार है. डेसचैम्प्स ने कहा कि केप वर्डे के खिलाफ पहला मैच छोड़ दिया जाए तो स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में साबित किया है कि वह खिताब जीतने की सबसे बड़ी दावेदार टीमों में शामिल है.
2006 के बाद पहली बार फ्रांस और स्पेन आमने-सामने
विश्व कप में 2006 के बाद पहली बार फ्रांस और स्पेन आमने-सामने होंगे. पिछली बार फ्रांस ने बाजी मारी थी, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं. एक तरफ एम्बाप्पे की धार है, दूसरी ओर यामल की चमक. एक टीम लगातार तीसरे वर्ल्ड कप फाइनल का सपना देख रही है, जबकि दूसरी 2010 के बाद फिर से विश्व विजेता बनने की राह पर है. अब देखना दिलचस्प होगा कि विश्व कप के इतिहास में दूसरी बार होने वाली इस मुकाबले में जीत किसकी होती है और फाइनल का टिकट कौन हासिल करता है.
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