FIFA World Cup 2026: मैदान पर FIFA वर्ल्ड कप में यादगार मैच, चौंकाने वाले नतीजे और स्पेन जैसा चैंपियन देखने को मिला, लेकिन मैदान के बाहर, इसने मॉडर्न फ़ुटबॉल के सामने मौजूद कई चुनौतियों को भी उजागर किया. रेफरी के फैसलों पर विवाद, राजनीतिक विवाद, अनुशासन से जुड़ी जांच, वीज़ा की दिक्कतें और पिच की वजह से यह टूर्नामेंट अपने फुटबॉल के साथ-साथ विवादों के लिए भी चर्चा में रहा.अब 2030 वर्ल्ड कप की तैयारियां शुरू हो रही हैं, फीफा पर अपनी गवर्नस में भरोसा बहाल करने, रेफरी के फैसलों में पारदर्शिता लाने और यह पक्का करने का दबाव बढ़ सकता है कि भविष्य के टूर्नामेंट मुख्य रूप से खेल के लिए ही याद किए जाएं ने कि विवाद के लिए ऐसे में जानते हैं कि इस बार के वर्ल्ड कप में किस-किस विवाद ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी
बालोगुन को मिली राहत से टूर्नामेंट की निष्पक्षता पर सवाल उठे
ट्रंप के सीधे दखल के बाद USA के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर वर्ल्ड कप में रेड-कार्ड की वजह से लगे बैन को हटाने के FIFA के फैसले के बाद, इन्फेंटिनो को फीफा की अनुशासनात्मक प्रक्रिया का बचाव करना पड़ा.इस फैसले से ऐसे आरोप लगे कि FIFA राजनीतिक दबाव में झुक गया है.इन्फेंटिनो ने कहा कि "FIFA की न्यायिक संस्थाओं ने "स्वतंत्र और स्वायत्त" रूप से काम किया है." उन्होंने ट्रंप को बताया था कि बालोगुन का मामला एक चल रही कानूनी प्रक्रिया के अधीन है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने उनसे व्यक्तिगत रूप से इस मामले की समीक्षा करने का आग्रह किया था. इस मामले की यूरोपीय फुटबॉल संस्था UEFA ने निंदा की और कहा कि FIFA ने "एक रेड लाइन पार कर ली है". रॉयल बेल्जियन फुटबॉल एसोसिएशन, कई राष्ट्रीय संघों, वरिष्ठ फुटबॉल कोचों, अधिकारियों और राजनेताओं ने भी इसकी आलोचना की. कई लोगों का तर्क था कि FIFA ने अपनी ही अनुशासनात्मक प्रणाली में भरोसे को कमज़ोर किया है.
मैदान में ट्रंप का जंप!
इन सबके बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप सुर्ख़ियां बटोरकर ही रहे. टिकट की महंगाई, सोमालिया के रेफरी उमर अब्दुलकादिर आर्टन को वैध वीजा होने के बावजूद अमेरिका में एंट्री नहीं मिलना, ईरान के खेलने को लेकर बयानबाज़ी जैसे मुद्दों की वजह से राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर ख़बरें छायीं रहीं. वर्ल्ड कप के इतिहास में ट्रंप ने अमेरिकी खिलाड़ी फोलारिन बैलोगुन के रेड कार्ड को लेकर प्रोटेस्ट कर दिया. यही नहीं मेज़बान टीम के राष्ट्रपति ट्रंप ने फ़ीफ़ा चीफ़ जियानि इन्फ़ैन्टिनो को फ़ोन कर फ़ैसले को ‘रीव्यू' करने को कहा. ट्रंप ने मैदान के फ़ैसलों को बदलने के लिए राजनीतिक कोशिश की मिसाल रखकर वर्ल्ड कप का ज़ायका बिगाड़ दिया.
VAR को लेकर नाराजगी
वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) सिस्टम, जिसकी काफी आलोचना हुई., उसके इस्तेमाल को लेकर कई विवादित फैसले हुए. शायद सबसे ज्यादा हंगामा तब हुआ जब अर्जेंटीना ने वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 16 में मिस्र को रोमांचक मुकाबले में 3-2 से हराया. मिस्र टूर्नामेंट के सबसे बड़े उलटफेर की ओर बढ़ रहा था. वे डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना के खिलाफ़ 11 मिनट बाकी रहते 2-0 से आगे थे, लेकिन आखिर में तीन गोल खाकर बाहर हो गए. ज्यादातक विवाद मिस्र के मुस्तफा ज़िको के 62वें मिनट में किए गए गोल पर था, जिससे उनकी टीम की बढ़त दोगुनी हो जाती. VAR रिव्यू में पता चला कि गोल से पहले मिस्र के एक खिलाड़ी ने फाउल किया था, इसलिए गोल को अमान्य कर दिया गया.
मैच के बाद कोच होसाम हसन और कप्तान मोहम्मद सलाह ने निराशा जताई, जबकि कई पूर्व खिलाड़ियों और टीवी पंडितों ने भी रेफरी के फैसलों पर सवाल उठाए. इंग्लैंड के पूर्व गोलकीपर रॉब ग्रीन ने फॉक्स पर मैच के लाइव टेलीकास्ट के दौरान कहा, "निश्चित रूप से, VAR के दायरे में इसका रिव्यू करना नहीं आता, वे उस फाउल का जिक्र कर रहे थे जिसके कारण जिको का गोल रद्द कर दिया गया था. यह पिच के दूसरे छोर पर हुआ था."
मुंह छिपाने पर रोक वाले नियम को लेकर मचा बवाल
ग्रुप स्टेज के दौरान FIFA के नए नियमों में से एक ने सुर्खियाँ बटोरीं. मैदान पर बहस के दौरान मुंह छिपाने पर रोक लगाने वाले नियम के तहत पैराग्वे के मिगुएल अल्मिरॉन को बाहर (रेड कार्ड) भेजा गया. ऐसा करने वाले वे पहले खिलाड़ी बने. तुर्की के डिफेंडर मेर्ट मुल्डुर के साथ हुई घटना के कारण अटलांटा यूनाइटेड के विंगर को एक मैच के लिए सस्पेंड कर दिया गया. FIFA ने कहा कि इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील नहीं की जा सकती, जिससे वे ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पैराग्वे के आखिरी ग्रुप मैच से बाहर हो गए.
पिच को लेकर बवाल
वर्ल्ड कप के कई वेन्यू पर खेले गए मैच के दौरान पिच की स्थिति को लेकर काफी आलोचना हुई है. मेटलाइफ़ स्टेडियम की सूखी और ऊबड़-खाबड़ पिच की खिलाड़ियों, जानकारों और फैन्स ने आलोचना की, उनका कहना था कि इससे खेल में रुकावट आई और चोट लगने का खतरा बढ़ गया था.
हाफटाइम के समय को बढ़ाने पर भी विवाद
FIFA ने सितारों से सजे शो के लिए ब्रेक का समय 15 मिनट की सीमा से बढ़ाकर 27 मिनट कर दिया, जिसने भी काफी सुर्खियां बटोरी.
लिएंड्रो परेडेस के स्पेनिश खिलाड़ी एरिक गार्सिया और गावी के बीच धक्का-मुक्की
अर्जेंटीना के मिडफील्डर लिएंड्रो परेडेस के स्पेनिश खिलाड़ी एरिक गार्सिया और गावी से आक्रामक तरीके से भिड़ने के बाद झगड़ा शुरू हो गया. इस टकराव के कारण दोनों टीमों के बीच बड़ी लड़ाई छिड़ गई, जिसमें खिलाड़ियों को एक-दूसरे से अलग करने के लिए काफी धक्का-मुक्की हुई.हेड कोच लियोनेल स्कालोनी को भी अपने खिलाड़ियों को शांत कराने के लिए बीच-बचाव करना पड़ा. रॉयटर्स के अलावा, ब्रिटिश चैनल स्काई स्पोर्ट्स ने भी खबर दी है कि फीफा इस हंगामे की जांच करेगा.
इस घटना के बाद रेफरी स्लावको विंसिच ने मैच खत्म होने की सीटी बजने के बाद परेडेस को रेड कार्ड दिखाया. मैच के दौरान स्पेन ने शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा और मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना को लगातार दबाव में रखा. 90 मिनट तक कोई गोल नहीं होने के बाद मैच एक्स्ट्रा टाइम में चला गया, जिसमें फेरान टोरेस ने 106वें मिनट में विजयी गोल किया. स्पेन ने मैच के आखिर तक अपनी 1-0 की बढ़त बनाए रखी और इतिहास में स्पेनिश टीम के लिए दूसरा वर्ल्ड कप खिताब पक्का किया.
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