Psychologist on Diego Maradona Death Case: अर्जेंटीना के फ़ुटबॉल दिग्गज की मौत के मामले में चल रहे मुक़दमे में गुरुवार को उनके मनोवैज्ञानिक ने बताया कि डिएगो माराडोना बाइपोलर थे और उन्हें नार्सिसिस्टिक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर था. मनोवैज्ञानिक कार्लोस डियाज ने माराडोना की मेडिकल टीम के मुक़दमे के दौरान कहा, "यहां एक क्लिनिकल तस्वीर साफ है, एक लत, एक बाइपोलर डिसऑर्डर और एक पर्सनैलिटी डिसऑर्डर. ये तीनों ही पुरानी और जिंदगी भर रहने वाली स्थितियां हैं." माराडोना की मेडिकल टीम पर 2020 में 60 साल की उम्र में उनके आखिरी दिनों में लापरवाही बरतने का आरोप है. हालांकि, इस स्टार को कोकीन और शराब जैसी चीज़ों की लत के बारे में सभी जानते थे, लेकिन गुरुवार को सामने आई इन बीमारियों की जानकारी पहले कभी सार्वजनिक नहीं की गई थी.
डियाज इस मुकदमे में आरोपी पक्ष में शामिल हैं. माराडोना की मानसिक सेहत को लेकर उनके बयानों का मकसद यह दिखाना था कि वह एक मुश्किल मरीज थे. यह बचाव पक्ष की टीम की उस बड़ी दलील का हिस्सा है, जिसके मुताबिक फ़ुटबॉल स्टार की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी.
डियाज ने बताया कि माराडोना के क़रीबी लोगों ने उन्हें बताया था, "नशीली चीजों का उनका इस्तेमाल उनकी खेल की उपलब्धियों से काफी जुड़ा हुआ था. जब भी उन्हें किसी तरह की निराशा होती थी, तो उन्हें यह समझ नहीं आता था कि उससे कैसे निपटा जाए." अब तक के सबसे महान फ़ुटबॉल खिलाड़ियों में से एक माने जाने वाले माराडोना का निधन नवंबर 2020 में हुआ था. उस समय वह घर पर ही दिमाग़ में जमे ख़ून के थक्के (ब्रेन क्लॉट) की सर्जरी के बाद ठीक हो रहे थे. सर्जरी के दो हफ्ते बाद दिल का दौरा पड़ने और एक्यूट पल्मोनरी एडिमा (फेफड़ों में पानी भर जाने की स्थिति) के कारण उनकी मौत हो गई.
सात मेडिकल कर्मचारियों पर मुकदमा चल रहा है. इनमें एक न्यूरोसर्जन, एक मनोचिकित्सक और एक नर्स शामिल हैं. अगर इन पर 'संभावित इरादे से हत्या' (यानी यह जानते हुए भी कोई काम करना कि उससे किसी की जान जा सकती है) का आरोप साबित हो जाता है, तो उन्हें आठ से 25 साल तक की जेल हो सकती है. इन पर माराडोना के आखिरी दिनों में उनकी देखभाल में लापरवाही बरतने का आरोप है.
आरोपियों ने माराडोना की मौत की जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि 1986 के वर्ल्ड कप के इस स्टार खिलाड़ी की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई थी. डियाज ने अदालत को बताया कि वह अक्टूबर 2020 में माराडोना से मिले थे. उन्होंने कहा, "मुझे याद है कि माराडोना एक आरामकुर्सी पर बैठे शराब पी रहे थे. उन्हें देखकर मुझे अपने पिता की याद आ गई. वह भी शराब के आदी थे और कुछ महीने पहले ही उनका निधन हुआ था."
मनोवैज्ञानिक ने आगे कहा, "मुझे महसूस हुआ कि वह सचमुच बदलना चाहते थे, वह इसके लिए पूरी तरह से तैयार थे." फ़ुटबॉल खिलाड़ी की मौत के मामले में पहला मुक़दमा पिछले साल रद्द कर दिया गया था. ऐसा तब हुआ, जब यह बात सामने आई कि इस मामले से जुड़ी एक गुप्त डॉक्यूमेंट्री में जजों में से एक ने हिस्सा लिया था. जजों के एक नए पैनल द्वारा संचालित यह दूसरा मुक़दमा, इस महीने शुरू हुआ.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं