PM Modi Heartfelt Words: मां के हाथ का खाना सिर्फ एक आम कहावत नहीं, बल्कि हर इंसान की जिंदगी से जुड़ी सबसे भावुक यादों में से एक है. चाहे इंसान दुनिया के किसी भी कोने में चला जाए, कितने भी बड़े होटल या रेस्टोरेंट में खाना खा ले, लेकिन मां के हाथ से बने खाने जैसा सुकून कहीं नहीं मिलता. उस खाने में सिर्फ मसाले और स्वाद नहीं होते, बल्कि उसमें छिपा होता है अपनापन, चिंता, देखभाल और बिना शर्त वाला प्यार. सादी दाल-चावल हो या घी से भरा आलू पराठा, हर निवाले में मां की मेहनत और परिवार के लिए उसका समर्पण महसूस होता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने 74वें जन्मदिन पर कुछ ऐसा ही अनुभव शेयर किया, जिसने लाखों लोगों को अपनी मां और उनके हाथ के खाने की याद दिला दी थी.
वो पकवान जिसने उन्हें अपनी मां की याद दिला दी
प्रधानमंत्री मोदी हमेशा अपनी मां के प्रति अपने प्यार और करीबी के बारे में खुलकर बात करते रहे हैं. हर साल अपने जन्मदिन पर, वह आशीर्वाद लेने और मां के हाथ का खाना खाने के लिए अपने गृहनगर जाकर उनसे मिलते थे. उनकी मृत्यु के बाद उन्होंने एक सार्वजनिक सभा में उन्हें प्यार से याद किया और कहा, "आज जब मैं एक ओडिया परिवार से मिलने गया, तो उस मां ने मुझे 'खीरी' (खीर) खिलाई और इससे मुझे अपनी मां की याद आ गई, जो हर साल मेरे जन्मदिन पर मुझे गुड़ खिलाया करती थीं. आज वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन एक ओडिया मां ने उस खालीपन को भर दिया और एक कटोरी खीर खिलाकर मुझे बहुत अपनापन महसूस कराया." ठीक प्रधानमंत्री मोदी की तरह, हम सभी के पास 'मां के हाथ के खाने' की प्यारी यादें हैं.
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दाल-चावल, सादगी में छिपा असली सुकून
दाल-चावल भारतीय घरों की सबसे आम लेकिन सबसे दिल के करीब डिश मानी जाती है. गर्म चावल पर घी डालकर उसके साथ अरहर की दाल खाना कई लोगों के लिए बचपन की सबसे प्यारी याद होती है.
बीमार होने पर मां का हाथ से खिलाया गया दाल-चावल आज भी लोगों को सबसे ज्यादा आराम देता है. शायद इसी वजह से इसे कंफर्ट फूड भी कहा जाता है.
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राजमा-चावल और कढ़ी-चावल
उत्तर भारत में राजमा-चावल सिर्फ खाना नहीं, बल्कि एक भावना है. रविवार के दिन घर में बनने वाले राजमा-चावल की खुशबू आज भी लोगों को अपने बचपन में पहुंचा देती है.
वहीं कढ़ी-चावल का स्वाद भी हर घर में अलग होता है. कहीं पंजाबी कढ़ी बनती है तो कहीं गुजराती या राजस्थानी. लेकिन, हर जगह इसमें मां का प्यार एक जैसा ही होता है.

आलू पराठा, हर मां का सुपरहिट नाश्ता
सुबह-सुबह तवे पर सिकते आलू पराठों की खुशबू शायद ही कोई भूल सकता है. मक्खन, दही और अचार के साथ परोसा गया आलू पराठा सिर्फ पेट नहीं भरता, बल्कि दिल भी खुश कर देता है. कई लोग बाहर जाकर पिज्जा और बर्गर जरूर खाते हैं, लेकिन घर लौटते ही सबसे पहले मां के हाथ का पराठा ही मांगते हैं.
दक्षिण भारत के स्वाद भी दिल से जुड़े हैं
सिर्फ उत्तर भारत ही नहीं, दक्षिण भारत में भी मां के हाथ के खाने का अलग ही महत्व है. रसम-चावल, पुट्टू-कडला करी और फिश करी-चावल जैसे व्यंजन वहां के लोगों के दिल से जुड़े होते हैं.
खास बात यह है कि इन व्यंजनों में मसालों से ज्यादा घर का प्यार महसूस होता है. यही वजह है कि लोग विदेशों में रहकर भी अपने घर के खाने को सबसे ज्यादा मिस करते हैं.
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मीठे में छिपा मां का प्यार
गाजर का हलवा, खीर और पूरन पोली जैसे मीठे व्यंजन त्योहारों और खास मौकों की याद दिलाते हैं. सर्दियों में मां के हाथ का गरमा-गरम गाजर का हलवा शायद ही कोई मना कर पाए.
वहीं पूरन पोली का मीठा स्वाद महाराष्ट्र के घरों की परंपरा और मां के स्नेह को दर्शाता है.

मां के हाथ का खाना क्यों होता है इतना खास?
असल में मां के हाथ के खाने का स्वाद सिर्फ रेसिपी की वजह से खास नहीं होता. उसके पीछे छिपी भावनाएं उसे अनमोल बना देती हैं. मां बिना बोले समझ जाती है कि बच्चे को क्या पसंद है, कौन सी चीज कम या ज्यादा चाहिए और कब उसे प्यार से खाना खिलाने की जरूरत है.
शायद यही कारण है कि दुनिया का सबसे महंगा खाना भी मां के हाथ के खाने की बराबरी नहीं कर पाता. क्योंकि वहां स्वाद से ज्यादा दिल जुड़ा होता है.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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