Karele Ka Kadwapan kaise Door Kare: करेला सेहत के मामले में बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर में शुगर को कंट्रोल करने, पेट को सही रखने और वजन कम करने में मदद करता है. हालांकि कई लोग सिर्फ इसके कड़वे स्वाद की वजह से इसे खाना पसंद नहीं करते. पर कुछ आसान घरेलू तरीकों को अगर आजमा लिया जाए, तो करेले की कड़वाहट को काफी कम किया जा सकता है. इससे इसका स्वाद भी अच्छा होता है.
क्यों कड़वा होता है करेला

दरअसल, करेले में कुछ प्राकृतिक रसायन पाए जाते हैं, जिनकी वजह से उसका स्वाद कड़वा होता है. जब हम करेला खाते हैं, तो हमारी जीभ इन कड़वे तत्वों को तुरंत पहचान लेती है. लेकिन नमक, दही, प्याज, हल्दी और सरसों का तेल जैसे पदार्थ इन तत्वों के असर को कम करने में मदद करते हैं.
नमक
सबसे पहले बात नमक की करें, तो इसे करेले की कड़वाहट कम करने का सबसे असरदार तरीका माना जाता है. जब करेले पर नमक लगाया जाता है, तो वह उसके अंदर मौजूद पानी को बाहर निकालने लगता है. इसी पानी के साथ करेले के कड़वे तत्व भी धीरे-धीरे बाहर आने लगते हैं. कुछ देर बाद करेले का स्वाद पहले से हल्का लगने लगता है. बाद में जब इसे पानी से धोया जाता है, तो काफी कड़वाहट निकल चुकी होती है.
दही
दही भी करेले की कड़वाहट को दूर करने में काफी मदद करती है. दही में हल्की खटास होती है, जो जीभ पर कड़वे स्वाद को कम महसूस कराती है. दही का स्वाद हमारी जीभ को संतुलित महसूस होता है और इससे करेले की कड़वाहट दब जाती है. इसके अलावा, दही में मौजूद बैक्टीरिया और लैक्टिक एसिड करेले के ऊपरी हिस्से पर असर डालते हैं, जिससे उसका स्वाद थोड़ा नरम हो जाता है.
ये भी पढ़ें: 99% लोगों को नहीं पता होगा करेला का आयुर्वेदिक नाम, जानें किन बीमारियों का है काल
हल्दी
हल्दी का असर थोड़ा अलग तरीके से काम करता है. वैज्ञानिक मानते हैं कि हल्दी में तेज खुशबू और खास तरह के प्राकृतिक तत्व होते हैं, जो खाने के स्वाद को बदलने में मदद करते हैं. जब करेले पर हल्दी लगाई जाती है, तो उसकी खुशबू और हल्का तीखापन कड़वाहट को कम करने लगता है. इसके अलावा, हल्दी में मौजूद करक्यूमिन नाम का तत्व स्वाद को संतुलित करने में मदद कर सकता है.

प्याज
प्याज भी इस मामले में काफी असरदार माना जाता है. जब करेले को प्याज के साथ पकाया जाता है, तो प्याज का मीठापन कड़वाहट को संतुलित करने लगता है. वैज्ञानिक कहते हैं कि हमारी जीभ एक साथ कई स्वाद महसूस करती है. ऐसे में जब मीठा और कड़वा स्वाद साथ आता है, तो कड़वाहट कम महसूस होती है. यही कारण है कि प्याज के साथ बना करेला कई लोगों को ज्यादा स्वादिष्ट लगता है.
सरसों का तेल
वहीं सरसों के तेल भी इस काम में काफी मददगार है. सरसों के तेल में तेज खुशबू और तीखा स्वाद होता है. यह हमारे स्वाद महसूस करने के तरीके को थोड़ा बदल देता है. जब करेला सरसों के तेल में पकता है, तो तेल की खुशबू और उसका स्वाद कड़वाहट को दबाने लगता है. इसके अलावा, सरसों के तेल में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए जाते हैं, जो खाने में स्वाद जोड़ते हैं.
History of Samosa- Swaad Ka Safar | समोसे का इतिहास | जानें ईरान से भारत कैसे पहुंचा समोसा
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं