हमारे घरों में लोहे की कढ़ाई का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है. दादी-नानी के जमाने से ही इसमें खाना बनाने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि लोहे की कढ़ाई में बना खाना खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ता है और आयरन की कमी दूर होती है. बात काफी हद तक सही भी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर चीज लोहे की कढ़ाई में नहीं पकाई जा सकती?
जी हां, रसोई की यह पुरानी साथी आपकी सेहत बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है. अगर आप इसमें गलत चीजें बनाएंगे तो खाने का स्वाद तो खराब होगा ही, साथ ही आपकी सेहत पर भी बुरा असर पड़ सकता है. आइए आज बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं कि लोहे की कढ़ाई में क्या बनाना चाहिए और क्या बिलकुल नहीं.
लोहे की कढ़ाई में क्या नहीं बनाना चाहिए?
लोहे का सबसे बड़ा दुश्मन होता है एसिड यानी खट्टापन. जब भी हम कोई खट्टी चीज लोहे के बर्तन में पकाते हैं, तो लोहा और एसिड आपस में रिएक्शन यानी रासायनिक क्रिया करने लगते हैं. इससे खाने का रंग काला पड़ जाता है और स्वाद में अजीब सी कड़वाहट या लोहे का स्वाद आने लगता है. इतना ही नहीं, यह केमिकल रिएक्शन आपके पेट के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है.
इन चीजों को लोहे की कढ़ाई में बनाने से बचें:
टमाटर और टमाटर की ग्रेवी:
आजकल लगभग हर सब्जी में टमाटर डाला जाता है. लेकिन अगर आप टमाटर से बनी गाढ़ी ग्रेवी या टमाटर की चटनी बना रहे हैं, तो लोहे की कढ़ाई का इस्तेमाल न करें. टमाटर में भरपूर मात्रा में एसिड होता है जो लोहे के साथ तुरंत रिएक्ट करता है. इससे सब्जी का रंग काला और स्वाद कसैला हो जाता है.
नींबू और अमचूर वाली चीजें:
अगर आप पोहा, चाट या कोई ऐसी सब्जी बना रहे हैं जिसमें नींबू का रस या अमचूर पाउडर ज्यादा पड़ता है, तो उसे लोहे की कढ़ाई में न पकाएं. नींबू का साइट्रस एसिड लोहे को पिघलाकर खाने में मिला देता है, जिससे पेट में गैस या एसिडिटी की समस्या हो सकती है.
कढ़ी और छाछ की चीजें:
बेसन की कढ़ी या दही वाली कोई भी ग्रेवी लोहे के बर्तन में नहीं बनानी चाहिए. दही और छाछ में लैक्टिक एसिड होता है. जब यह लोहे से मिलता है तो कढ़ी का स्वाद एकदम खराब हो जाता है. कई बार तो कढ़ी फटने भी लगती है और उसका रंग भी अजीब सा भूरा-काला हो जाता है.
पालक और हरी पत्तेदार सब्जियां:
यह बात सुनकर आपको थोड़ा अचंभा होगा क्योंकि अक्सर लोग कहते हैं कि पालक लोहे की कढ़ाई में ही बनानी चाहिए. लेकिन सच यह है कि पालक में ऑक्सैलिक एसिड होता है. जब पालक को ज्यादा देर तक लोहे की कढ़ाई में पकाया जाता है, तो वह काली पड़ जाती है. इसे खाने से पेट भारी हो सकता है. अगर आप पालक बना भी रहे हैं, तो बनते ही तुरंत उसे किसी दूसरे बर्तन में पलट लें.
इमली की चटनी या सांभर:
सांभर और इमली की खट्टी-मीठी चटनी में खट्टापन बहुत ज्यादा होता है. इसे लोहे की कढ़ाई में पकाने से धातु का अंश खाने में ज्यादा घुल जाता है. इससे खाने का असली जायका पूरी तरह खत्म हो जाता है.
पास्ता और नूडल्स:
बच्चे पास्ता और नूडल्स बहुत पसंद करते हैं. इन्हें बनाने के लिए लोग अक्सर लोहे की कढ़ाई या वॉक का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन इसमें सिरका और सॉस मिलाया जाता है, जो खट्टे होते हैं. इसके अलावा, पास्ता कढ़ाई की सतह से चिपकता भी बहुत है, जिससे वह जल सकता है.
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