तिल को सेहत का खजाना कहा जाता है. तिल दो तरह की आती है काली और सफेद. खाने में आमतौर पर सबसे ज्यादा सफेद तिल का इस्तेमाल किया जाता है. सर्दी की दस्तक जैसे ही होती है बाजारों में रेवड़ी, गजक और तिल के लड्डू नजर आने लगते हैं. खासकर उत्तर भारत में रेवड़ी को सर्दियों की पहचान माना जाता है. मकर संक्रांति, लोहड़ी और अन्य पारंपरिक त्योहारों पर भी इसका खूब सेवन किया जाता है. तिल और गुड़ से तैयार होने वाली यह छोटी-सी मिठाई स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी कमाल है.
क्यों ठंड में खाई जाती है रेवड़ी?
रेवड़ी बनाने में मुख्य रूप से तिल और गुड़ का इस्तेमाल किया जाता है. आयुर्वेद में तिल को गर्म तासीर वाला माना जाता है. सर्दियों में इसका सेवन शरीर को भीतर से गर्म रखने में मदद कर सकता है. वहीं गुड़ भी ठंड के मौसम में पसंद किया जाता है क्योंकि इसे एनर्जी का अच्छा सोर्स माना जाता है. गांवों और कस्बों में आज भी सर्दियां शुरू होते ही लोग तिल और गुड़ से बनी चीजों को खानपान का हिस्सा बना लेते हैं. यही वजह है कि रेवड़ी कई पीढ़ियों से सर्दियों की पसंदीदा मिठाई बनी हुई है.

रेवड़ी को डाइट में कैसे करें शामिल?
- सुबह या शाम की चाय के साथ 2 से 4 रेवड़ी खा सकते हैं.
- ड्राई फ्रूट्स के साथ इसे स्नैक के रूप में लिया जा सकता है.
- तिल, मूंगफली और रेवड़ी को मिलाकर विंटर मिक्स तैयार किया जा सकता है.
- खाना खाने के बाद मीठे के तौर पर इसे खाया जा सकता है.

क्या मिलता है रेवड़ी खाने से-
तिल में कैल्शियम, आयरन, हेल्दी फैट और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. वहीं गुड़ में मौजूद खनिज तत्व इसे साधारण सफेद चीनी की तुलना में अलग बनाते हैं.
नोट- रेवड़ी में चीनी या गुड़ की मात्रा होती है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों और वजन कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए. डाइट में कोई भी नई चीज शामिल करने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह जरूर लें.
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