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दूध में डालते ही जम जाता है दही... जानिए इस खास पत्थर के बारे में!

How To Make Curd Using Habur Stone: आमतौर पर लोग जामन या पहले से जमे दही का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई जगहों पर एक अलग ही तरीका अपनाया जाता है. यहां दूध में एक खास पत्थर डालकर दही जमाया जाता है.

दूध में डालते ही जम जाता है दही...  जानिए इस खास पत्थर के बारे में!
Dahi Jamane Wala Pathar
AI

How To Make Curd Using Habur Stone: गर्मी शुरू होते ही घर में दही जमाना रोज़ की जरूरत बन जाती है. आमतौर पर लोग जामन या पहले से जमे दही का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कई जगहों पर एक अलग ही तरीका अपनाया जाता है. यहां दूध में एक खास पत्थर डालकर दही जमाया जाता है. सुनने में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह एक पुराना और दिलचस्प देसी तरीका है. अब सोशल मीडिया और लोकल परंपराओं के कारण यह फिर से चर्चा में आ गया है और लोग इसके बारे में जानना चाहते हैं.

क्या है यह दही जमाने वाला पत्थर?

इस खास पत्थर को आम बोलचाल में “हबूर स्टोन” (Habur Stone) कहा जाता है. यह कोई साधारण पत्थर नहीं होता बल्कि इसमें प्राकृतिक बैक्टीरिया (Bacteria) मौजूद होते हैं. यही बैक्टीरिया दूध को दही में बदलने की प्रक्रिया को शुरू करते हैं. पुराने समय में जब हर घर में जामन नहीं होता था, तब इसी पत्थर का सहारा लिया जाता था.

कैसे करता है काम?

दूध को दही में बदलने के लिए फर्मेंटेशन (fermentation) की जरूरत होती है. इस पत्थर में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया दूध के लैक्टोज (Lactose) को लैक्टिक एसिड (Lactic Acid) में बदल देते हैं. जब यह प्रक्रिया शुरू होती है तो कुछ घंटों में दूध गाढ़ा होकर दही बन जाता है. यह बिल्कुल उसी तरह काम करता है जैसे जामन करता है.

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इस्तेमाल करने का आसान तरीका- (How To Make Curd From Habur Stone)

  1. दूध को पहले अच्छी तरह उबाल लें.
  2. इसे हल्का गुनगुना होने दें.
  3. अब साफ किया हुआ पत्थर दूध में डाल दें.
  4. बर्तन को ढककर 6 से 8 घंटे के लिए रख दें.
  5. दही जमने के बाद पत्थर को निकालकर धो लें और दोबारा इस्तेमाल के लिए रख लें.

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क्या यह तरीका सुरक्षित है?

अगर पत्थर साफ और भरोसेमंद जगह से लिया गया है, तो इसका इस्तेमाल सुरक्षित माना जाता है. हर बार इस्तेमाल से पहले और बाद में इसे अच्छी तरह साफ करना जरूरी है. गंदगी रहने पर संक्रमण का खतरा हो सकता है.

आजकल लोग केमिकल फ्री और देसी तरीकों की तरफ लौट रहे हैं. इसी वजह से यह पारंपरिक तरीका एक बार फिर लोगों का ध्यान खींच रहा है. खासकर ग्रामीण इलाकों में आज भी यह तरीका आम है.

ट्राय करना चाहिए या नहीं?

अगर आप पारंपरिक तरीकों को अपनाना पसंद करते हैं, तो इसे एक बार आजमा सकते हैं. बस ध्यान रखें कि साफ सफाई और सही पत्थर का चुनाव बेहद जरूरी है. इस तरह यह दही जमाने वाला पत्थर न सिर्फ एक पुरानी परंपरा है बल्कि इसमें छुपा विज्ञान भी इसे खास बनाता है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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