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This Article is From Nov 24, 2017

क्यों बजाई जाती है मंदिरों में घंटी?

एक पौराणिक कथा के मुताबिक जब इस संसार का प्रारंभ हुआ था, तब जो नाद (आवाज) गूंजी थी वही नाद घंटी बजाने पर भी आती है. इसीलिए घंटी को उसी नाद का प्रतीक माना जाता है. 

क्यों बजाई जाती है मंदिरों में घंटी?
क्यों बजाते हैं घंटी?
नई दिल्ली: माना जाता है कि पूजा करते वक्त घंटी ज़रूर बजानी चाहिए. घंटी बजाने से भगवानों तक हमारी प्रार्थना जल्दी पहुंचती है. इसी वजह से मंदिरों में अंदर घुसते ही सबसे पहले बड़ी घंटी लगाई जाती है. मंदिर के पेड़ों पर और मूर्तियों के पास घंटियां लगाई जाती है. लेकिन यहां आपको बता दें कि घंटी बजाने की ये मान्यता पूरी तरह से सच नहीं है. बल्कि इसके पीछे साइंटिफिक कारण है और वो क्या है जानें यहां.

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वैज्ञानिकों का ये मानना है कि घंटी बजाने से कंपन पैदा होता है, जिस वजह से उस जगह पर मौजूद विषाणु भाग जाते हैं और सकारात्मक शक्ति बनी रहती है. इसी वजह से आस-पास का वातारण शुद्ध हो जाता है. आपको बता दें इसी वजह से घरों के दरवाज़ों और खिड़कियों पर घंटियां और विंड चाइम्स लगाएं जाते हैं. ताकि इसके शोर से घर के पास से भी विषाणु दूर रहें, घर शुद्ध रहे और कोई भी बुरी शक्ति अंदर प्रवेश ना कर सके.

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वहीं, एक पौराणिक कथा के मुताबिक जब इस संसार का प्रारंभ हुआ था, तब जो नाद (आवाज) गूंजी थी वही नाद घंटी बजाने पर भी आती है. इसीलिए घंटी को उसी नाद का प्रतीक माना जाता है. 

इसी के साथ धार्मिक मान्यता के अनुसार घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है जिसके बाद उनकी पूजा ज़्यादा फलदायक और प्रभावशाली बन जाती है.

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