Vrat Kaise Shuru Kare: सनातन परंपरा में मनुष्यों के कल्याण के लिए देवी-देवताओं से जुड़े व्रत का विधान बताया गया है, जिसे ईश्वर पर आस्था रखने वाला कोई भी व्यक्ति शुभ दिन और शुभ मुहूर्त में प्रारंभ कर सकता है. हिंदू धर्म में व्रत या फिर कहें उपवास न सिर्फ कष्टों को दूर करके कामनाओं को पूरा करने के लिए ही नहीं बल्कि तमाम तरह के पाप और दोष को दूर करके मोक्ष की प्राप्ति के लिए रखा जाता है. यदि आप भी अपने आराध्य का आशीर्वाद पाने के लिए व्रत करना चाहते हैं तो उसका पूरा पुण्यफल पाने के लिए आपको इस लेख में बताए गये नियम और उपाय को जरूर अपनाना चाहिए.
- हिंदू मान्यता के अनुसार किसी भी व्रत को प्रारंभ करने से पहले किसी गुरु या पंडित आदि की मदद से शुभ दिन और समय का चयन करना चाहिए. इसके बाद व्रत की संख्या और उसे विधि-विधान से करने का संकल्प करना चाहिए.

- यदि किसी व्रत को प्रारंभ करने के लिए पूर्व में संकल्प कर लिया गया हो और व्रत प्रारंभ हो जाए तो उसमें जन्म और मृत्यु से जुड़ा सूतक बाधक नहीं बनता है. इसी प्रकार यदि कोई महिला रजस्वला हो जाए तो उसमें भी व्रत प्रारंभ हो जाने के बाद कोई बाधा नहीं आती है. सिर्फ इस दौरान व्रत की पूजा और देवी-देवता की मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए.
- व्रत को हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार करना चाहिए और जितने नियम सहजता के साथ फालो हो सकें उतने का संकल्प करना चाहिए.
- यदि व्रत वाले दिन आपका शरीर साथ नहीं देर रहा है और तबीयत खराब हो तो व्रत नहीं करना चाहिए. इसी प्रकार आधे-अधूरे मन से भी व्रत नहीं करना चाहिए. गर्भवती और बहुत ज्यादा बुजुर्ग व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत रखना चाहिए.

- हिंदू मान्यता के अनुसार देवी-देवता या ग्रह विशेष आदि के लिए रखे जाने वाले व्रत में तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए और व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.
- हिंदू मान्यता के अनुसार एक बार किसी व्रत को प्रारंभ करके उसे बीच में नहीं छोड़ना चाहिए. यदि किसी कारणवश कोई व्रत छूट जाए या फिर टूट जाए तो उसकी संख्या को आगे चलकर पूरा करना चाहिए.
- किसी भी व्रत के टूट जाने पर व्यक्ति को सबसे पहले स्नान करने के बाद संबंधित देवी या देवता से क्षमाचायना करनी चाहिए और उस व्रत से संबंधित अन्न, धन आदि का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को करना चाहिए.
- व्रत या उपवास के दिन साधक को भूलकर भी अपने मन में किसी के लिए गलत विचार नहीं लाना चाहिए और न ही किसी की निंदा करनी चाहिए.
- व्रत की संकल्प संख्या पूरी हो जाए तो व्यक्ति को उसका विधि-विधान से पारण करना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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