Surya Grahan 2026: आज यानी 17 फरवरी को साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. यह वलयाकार सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) होगा, जिसे 'रिंग ऑफ फायर' भी कहा जाता है. हालांकि, यह भारत में नजर नहीं आएगा, जिसके चलके सूतक काल के नियम भी लागू नहीं होंगे. इसके अलावा यह ग्रहण दक्षिण अर्जेंटीना, अफ्रीका और अंटार्कटिका समेत अन्य कई जगहों पर दिखाई देगा. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं, कि ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के क्या मायने हैं. साथ ही हम इससे जुड़े दोष, प्रभाव और उपाय भी जानेंगे. इसकी जानकारी ज्योतिर्विद और वास्तु विशेषज्ञ राकेश चतुर्वेदी ने दी है.
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ग्रहों के राजा- सूर्य
ज्योतिर्विद बताते हैं कि वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है. यह आत्मा, ऊर्जा, नेतृत्व, पिता, सरकार, प्रतिष्ठा और जीवन शक्ति का प्रतीक है. कुंडली में सूर्य की स्थिति व्यक्ति के आत्मविश्वास, सामाजिक सम्मान और निर्णय क्षमता को प्रभावित करती है. ऐसे में अगर सूर्य मजबूत हो तो व्यक्ति प्रभावशाली व्यक्तित्व का स्वामी होता है, वहीं कमजोर या पीड़ित सूर्य जीवन में कई बाधाएं उत्पन्न कर सकता है.
ज्योतिष में सूर्य का महत्व
ज्योतिष के अनुसार सूर्य को बहुत महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है, क्योंकि यह जीवन ऊर्जा और आत्मविश्वास का मुख्य स्रोत माना जाता है. सूर्य आत्मबल और आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और प्रशासनिक शक्ति, पिता और वरिष्ठों से संबंध, प्रतिष्ठा, सम्मान और प्रसिद्धि, और स्वास्थ्य, विशेषकर हृदय और आंखों का कारक माना जाता है. मान्यता है कि जिसकी कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, उसे समाज में पहचान, सम्मान और अधिकार आसानी से मिलता है, जबकि कमजोर सूर्य इन क्षेत्रों में चुनौतियां पैदा कर सकता है.

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कुंडली में कमजोर सूर्य के संकेत
ज्योतिर्विद बताते हैं कि अगर सूर्य नीच राशि में हो, शत्रु ग्रहों से पीड़ित हो या छठे, आठवें या बारहवें भाव में अशुभ स्थिति में हो, तो व्यक्ति को आत्मविश्वास की कमी, पिता से मतभेद, सरकारी कार्यों में बाधा, सम्मान में कमी या अपमान, आंखों या हृदय से जुड़ी समस्याएं झेलनी पड़ सकती हैं.
क्या हैं उपाय?
- सुबह उगते सूर्य को जल अर्पित करें. तांबे के लोटे का उपयोग शुभ माना जाता है.
- आदित्य हृदय स्तोत्र या गायत्री मंत्र का पाठ या 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का पाठ करें.
- रविवार का व्रत या संयम रविवार को नमक कम खाएं
- पिता और गुरु का सम्मान करें सूर्य पिता और गुरु का कारक है. ऐसा करने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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