Explained: पायलटों के ड्रग टेस्ट को लेकर क्या है नियम, कब रद्द होता है लाइसेंस?
चार साल पहले DGCA ने विमानन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ड्रग टेस्ट से जुड़े कुछ नियम बनाए थे.
एअर इंडिया की फुकेत से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट कई विवादों में घिर चुकी है. पहले खबर थी कि हल्की टर्बुलेंस की वजह से विमान की ऊंचाई में अचानक गिरावट देखने को मिली थी और इसी वजह से यात्री जख्मी हुए. लेकिन अब इसमें विमान उड़ा रहे पायलट भी विवादों में आ चुके हैं. पायलटों का जो ड्रग टेस्ट किया गया है, उसमें वे पॉजिटिव आए हैं. कन्फर्म करने के लिए दूसरी बार भी टेस्ट किया गया है. इसके आधिकारिक नतीजे का इंतजार है.
ऐसे में सभी के मन में एक सवाल है-आखिर किसी भी पायलट का ड्रग टेस्ट कैसे किया जाता है और अगर रिजल्ट पॉजिटिव आए तो क्या कार्रवाई होती है? आसान भाषा में इसे समझने की कोशिश करते हैं.
सिविल एविएशन का क्या नियम है?
असल में, चार साल पहले DGCA ने विमानन क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ड्रग टेस्ट से जुड़े कुछ नियम बनाए थे. फिर सितंबर 2021 में DGCA ने Civil Aviation Requirement यानी CAR जारी की थी जो 31 जनवरी 2022 को लागू भी हो गई.
ड्रग टेस्ट किस-किस का होगा?
इन नियमों में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि विमानन क्षेत्र में काम करने वाला कोई भी कर्मचारी नशीले या प्रतिबंधित पदार्थ का इस्तेमाल नहीं कर सकता है. इन नियमों में खास फोकस पायलट और एअर ट्रैफिक कंट्रोलर पर रखा गया था. इसके अलावा भी कई दूसरे कर्मचारियों पर ये नियम लागू होते हैं. इनमें एअरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर, विमान की जांच और उसे उड़ान के लिए प्रमाणित करने वाला स्टाफ, ट्रेनी पायलट, पायलट इंस्ट्रक्टर और एग्जामिनर भी शामिल हैं.
बड़ी बात यह है कि एक साल के अंदर कम से कम 10 फीसदी कर्मचारियों का रैंडम ड्रग टेस्ट होता है. DGCA अचानक से कुछ पायलटों को चिन्हित करता है और फिर उनका टेस्ट किया जाता है.
नियमों में यह भी स्पष्ट लिखा है कि कभी-कभी सुरक्षा कारणों की वजह से किसी पायलट या दूसरे कर्मचारी का ड्रग टेस्ट किया जा सकता है. 4 अगस्त को एअर इंडिया की फुकेत से दिल्ली जाने वाली फ्लाइट में जो हुआ, उसमें भी यही नियम लागू हो रहा है. एक सुरक्षा से जुड़ी घटना के बाद पायलटों का टेस्ट किया गया है.

किन नशीले पदार्थों के लिए होता है टेस्ट?
नियमों के तहत अगर किसी पायलट का ड्रग टेस्ट किया जाता है, तो कई तरह के नशीले और मानसिक स्थिति को प्रभावित करने वाले पदार्थों की जांच की जाती है. इस लिस्ट में एम्फेटामिन (Amphetamine), मेथामफेटामिन (Methamphetamine), बार्बिटुरेट्स (Barbiturates), बुप्रेनॉर्फिन/नॉरबुप्रेनॉर्फिन (Buprenorphine/Norbuprenorphine), बेंज़ोडायज़ेपिन (Benzodiazepine), कोकीन (Cocaine), मॉर्फिन/ओपिएट (Morphine/Opiate), मेथाडोन (Methadone), ऑक्सीकोडोन (Oxycodone), फेंसीक्लिडीन (Phencyclidine), प्रोपॉक्सीफीन (Propoxyphene), मारिजुआना/हैशिश (Marijuana/Hashish), एमडीएमए या एक्स्टेसी (MDMA or Ecstasy) शामिल है.
Procedure for Examination of the Aviation Personnel for Detection by
टेस्ट कैसे कंडक्ट किया जाना है?
यह टेस्ट किस तरीके से कंडक्ट किया जाना है, इसको लेकर भी नियम बिल्कुल स्पष्ट हैं.सबसे पहले कर्मचारी का यूरिन सैंपल कलेक्ट किया जाएगा. यूरिन सैंपल एक सुरक्षित टॉयलेट से कलेक्ट किया जाना है. जिस व्यक्ति का टेस्ट किया जा रहा है, उसकी भी अनुमति जरूरी होती है. जिस जगह पर यह टेस्ट किया जा रहा है, वह पूरी तरह साफ होनी चाहिए.
यूरिन सैंपल को एक साफ-सुथरे, फील्ड कंटेनर में रखना है. कम से कम 30 मिलीलीटर यूरिन का सैंपल होना चाहिए. सैंपल इकट्ठा करने के तुरंत बाद स्क्रीनिंग टेस्ट होता है और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी करनी होती है.
अगर वह सैंपल पॉजिटिव आ जाए, तो रिपोर्ट को कन्फर्म करने के लिए उसी सैंपल को DGCA की ऑथराइज्ड दूसरी लैबोरेटरी में भेजा जाता है. अगर दूसरा टेस्ट भी पॉजिटिव आ जाए, तो इसकी जानकारी DGCA के Director Air Safety को दी जाती है. यह जानकारी रिपोर्ट बनने के 24 घंटे के अंदर देनी होती है. वहीं, सैंपल को 12 महीने तक DGCA की ऑथराइज्ड लैबोरेटरी में सुरक्षित रखना होता है.

पॉजिटिव आने पर क्या एक्शन?
नियमों में यह स्पष्ट बताया गया है कि अगर स्क्रीनिंग टेस्ट में कोई कर्मचारी पॉजिटिव निकलता है तो उसे तुरंत सेफ्टी-सेंसिटिव ड्यूटी से हटा दिया जाता है. यानी जब तक दूसरी लैब की कन्फर्मेटरी रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक उस कर्मचारी को हर उस काम से दूर रखा जाता है जिसका संबंध विमानन सुरक्षा से हो.
वैसे ऐसा भी नहीं है कि रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही तुरंत पायलट या विमानन सुरक्षा से जुड़े किसी भी कर्मचारी के खिलाफ एक्शन हो जाता है. सबसे पहले Medical Review Officer यानी MRO को मामले की पुष्टि करनी होती है. अगर MRO यह मान जाता है कि किसी प्रतिबंधित ड्रग का इस्तेमाल हुआ है तो फिर कार्रवाई के लिए आगे बढ़ा जाता है.
पायलट का लाइसेंस कब रद्द होता है?
यहां भी अगर कोई कर्मचारी पहली बार ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव आता है, तो उसे नशामुक्ति या रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम के लिए भेजा जाता है. वहां इलाज के बाद दोबारा उसका ड्रग टेस्ट होता है. इसके बाद एक मनोचिकित्सक से क्लीयरेंस लिया जाता है. वहीं, संबंधित संस्था के Chief Medical Officer यानी CMO द्वारा फिटनेस सर्टिफिकेट भी जारी किया जाता है. इन सभी स्टेप्स के बाद ही किसी कर्मचारी को फिर से सेफ्टी-सेंसिटिव ड्यूटी में शामिल होने की अनुमति मिलती है.
अगर कोई पायलट या कर्मचारी दूसरी बार कन्फर्मेटरी टेस्ट में पॉजिटिव आ जाए तो उसका लाइसेंस रद्द हो जाएगा. वहीं, अगर कोई टेस्ट कराने से ही मना करने लगे तो उसे तुरंत सेफ्टी-सेंसिटिव ड्यूटी से हटा दिया जाता है. इसके बाद एक हफ्ते के अंदर डिटेल ड्रग टेस्टिंग प्रोफाइल क्लियर करना अनिवार्य रहता है. अगर कोई कर्मचारी या पायलट एक हफ्ते के अंदर टेस्ट क्लियर नहीं करता तो उसका लाइसेंस तीन साल के लिए सस्पेंड कर दिया जाएगा.
-
Reporter's Diary: बारिश, टूटी सड़कें, अंधेरा... फिर भी नहीं मानी हार, हमने दुनिया तक पहुंचाया नेपाल का दर्द
नेपाल में बाढ़ के बीच एनडीटीवी की रिपोर्टर सिक्ता देव ग्राउंड जीरो पर सबसे पहले पहुंचीं. वह 6 दिनों से नेपाल के अलग-अलग इलाकों की तस्वीरें दुनिया को पहुंचा रहीं हैं. उन्होंने स्टोरी कैसे की और क्या दिक्कतें झेलीं, पढ़िए उनके शब्दों में.
-
SIR का हाल के चुनावों पर कितना असर? बंगाल इलेक्शन भी हो गया पूरी तरह डीकोड
पिछले कुछ महीनों में देखें तो पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल में विधानसभा चुनाव संपन्न हुए थे. वहीं पिछले साल बिहार और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में भी विधानसभा चुनाव हुए थे.
-
विदेश में शादी और घूमने का शौक, डेटा बता रहा कितने करोड़ जा रहे भारत से बाहर
आखिर भारत के लोग विदेशी यात्रा पर कितना खर्च करते हैं? भारत के लोग जब विदेश में शादी करते हैं तो आखिर अपनी कितनी जमा पूंजी उसमें लगा देते हैं?
-
पहाड़ दरकते हैं, ग्लेशियर टूटते हैं और फिर नेपाल जैसी त्रासदी... हिमालय रीजन के डैम क्यों बन रहे खतरा?
सवाल यही है कि साफ ऊर्जा के लिए भी बनाए जा रहे प्रोजेक्ट क्या इतने जरूरी हो चुके हैं कि उसके लिए पहाड़ों की संरचना के साथ खिलावाड़ किया जाए या फिर प्रकृति को चुनौती दी जाए?
-
मैथ्स में AI अच्छा या बुरा? ऑनलाइन पोस्ट वायरल होने के बाद सबसे बेहतरीन गणितज्ञों का आया जवाब
AI से कोई प्रूफ तैयार करने में भले ही कुछ घंटे लगें, लेकिन नए नतीजों को इंसानी ज्ञान का हिस्सा बनने में सालों लग सकते हैं. इस लिहाज से, बड़ा खतरा यह नहीं है कि AI गणितज्ञों की जगह ले लेगा, बल्कि यह है कि यूनिवर्सिटीज इंसानी मेहनत को सपोर्ट करना बंद कर देंगी.
-
आरक्षण पर रार: राजभर और मांझी के बयान ने बीजेपी को कैसे दी बड़ी राहत?
अगर पिछड़े और दलित समाज की ही राजनीति करने वाले एनडीए के सहयोगी नेता बीजेपी के साथ खड़े हो जाते हैं तो पार्टी को विपक्ष के नेरेटिव को काउंटर करने में मदद मिल सकती है.
-
अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के चीफ गुप्त यात्रा पर रूस क्यों गए थे?
रैटक्लिफ की मॉस्को यात्रा से जुड़े कई पेचीदा पहलू उन दो नेताओं के बीच असाधारण रिश्तों में एक दिलचस्प नया मोड़ लाते हैं, जो एक जैसी रणनीतिक उलझन का सामना कर रहे हैं और जो उनकी विरासत तय कर सकती है.
-
'चवन्नी' बोलकर अखिलेश ने किया अपना नुकसान? पश्चिमी यूपी में जयंत-बीजेपी का चल जाएगा सिक्का
2027 के चुनाव में बात सिर्फ यह नहीं है कि जाटों का अपमान किसने किया. एक बड़ा सवाल यह भी है कि किसका नैरेटिव जनता के बीच ज्यादा असर दिखाता है?
-
नेपाल जल प्रलय: प्राकृतिक आपदा से कैसे बेहतर तरीके से लड़ें, भारत को भी भूटान से सीखने की जरूरत
वैसे तो कोई भी देश बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बड़े निर्माण और अच्छी सड़कें चाहता है, लेकिन भूटान इस अंधे शहरीकरण में पूरी तरह नहीं फंसा है.
-
राहुल गांधी कांग्रेस में बदलाव तो कर रहे हैं, लेकिन क्या इसकी कीमत पार्टी चुका रही है?
नए संगठन की तलाश में राहुल गांधी यह बड़ी भूल कर रहे हैं कि वे विरासत में मिली कांग्रेस को एक बोझ की तरह देख रहे हैं.