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Surdas Jayanti 2026: सूरदास जयंती कब है? जानिए तारीख, इतिहास और महत्व

Surdas Jayanti 2026: सूरदास जयंती मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाई जाती है. खासकर वृंदावन, मथुरा और गोवर्धन में इस दिन विशेष आयोजन होते हैं. सूरदास जी के भक्त इस दिन भजन‑कीर्तन करते हैं और कई लोग व्रत भी रखते हैं.

Surdas Jayanti 2026: सूरदास जयंती कब है? जानिए तारीख, इतिहास और महत्व
Surdas Jayanti 2026
file photo

Surdas Jayanti 2026: सूरदास जयंती वह खास दिन है, जो महान भक्त कवि सूरदास जी को समर्पित होता है. इस दिन उनकी जयंती मनाई जाती है. सूरदास जी अपनी मधुर भक्ति रचनाओं और पदों के लिए प्रसिद्ध थे. वे श्रीकृष्ण के परम भक्त थे और उनकी रचनाओं में कृष्ण भक्ति की गहरी छाप दिखाई देती है. यह वर्ष सूरदास जी की 548वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है. हिंदू पंचांग के अनुसार, सूरदास जी का जन्म वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को हुआ था. साल 2026 में सूरदास जयंती 21 अप्रैल को मनाई जा रही है.

सूरदास जयंती 2026: तिथि और समय

  • पंचमी तिथि शुरू: 21 अप्रैल 2026, सुबह 4:14 बजे
  • पंचमी तिथि समाप्त: 22 अप्रैल 2026, रात 1:19 बजे

सूरदास जयंती 2026: उत्सव

सूरदास जयंती मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाई जाती है. खासकर वृंदावन, मथुरा और गोवर्धन में इस दिन विशेष आयोजन होते हैं. सूरदास जी के भक्त इस दिन भजन‑कीर्तन करते हैं और कई लोग व्रत भी रखते हैं. लोग पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ यह दिन मनाते हैं. स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं में कविता और भजन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं. इस दिन ब्राह्मणों को भोजन और वस्त्र दान करने की भी परंपरा है.

सूरदास जयंती 2026: इतिहास

सूरदास जयंती हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण दिनों में से एक मानी जाती है. यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है. सूरदास जी के जन्म स्थान को लेकर अलग‑अलग मत हैं. कुछ लोगों के अनुसार उनका जन्म हरियाणा के सीही गांव में हुआ था. वहीं कुछ मानते हैं कि उनका जन्म आगरा के रुनकटा क्षेत्र में एक सरस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था और उनके पिता का नाम पंडित रामदास सरस्वत था. सूरदास जी अपनी श्रीकृष्ण भक्ति और मधुर पदों के कारण आज भी श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किए जाते हैं.

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कहा जाता है कि जन्म से ही दृष्टिहीन होने के कारण और पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से सूरदास जी का जीवन कठिन रहा. उन्होंने अपना पूरा जीवन यमुना नदी के किनारे बिताया. वे भगवान श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त थे. सूरदास जी श्री वल्लभाचार्य के शिष्य बने और उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, जन्म, बाल लीलाओं और अनुभवों का सुंदर वर्णन किया. कृष्ण भक्ति सीखने के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन कृष्ण भक्ति को समर्पित कर दिया.

सूरदास और श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति

भगवान श्रीकृष्ण के जीवन का सूरदास जी पर गहरा प्रभाव पड़ा. उन्होंने श्रीकृष्ण की महिमा में अनेक सुंदर भजन और पद रचे. उनकी सभी रचनाएं ब्रज भाषा में लिखी गई थीं, जो उस समय की लोकभाषा थी. उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में ‘सूरसागर', जिसमें राधा‑कृष्ण के प्रेम का वर्णन है, ‘साहित्य लहरी' और ‘सूरसारावली' शामिल हैं. इन रचनाओं ने उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सूरदास जी आज भी अपनी भक्ति, काव्य और श्रीकृष्ण प्रेम के कारण श्रद्धा से स्मरण किए जाते हैं.

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