Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga LIVE Darshan: भगवान शिव के भक्तों के लिए उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का विशेष धार्मिक महत्व है. माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से भगवान महाकाल का स्मरण करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. आज 16 मार्च 2026, सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है. ऐसे में आप चाहें तो घर बैठे भी भगवान महाकाल के दिव्य दर्शन कर सकते हैं और आरती का आनंद ले सकते हैं.
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उज्जैन में स्थित महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे भगवान शिव का अत्यंत पवित्र धाम माना जाता है. यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. जो भक्त किसी कारण से मंदिर नहीं जा पाते, वे मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट या यूट्यूब चैनल के माध्यम से भगवान महाकाल की आरती का सीधा प्रसारण देख सकते हैं और घर बैठे ही दर्शन का लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
महाकाल मंदिर में हर दिन भगवान शिव की छह विशेष आरतियां की जाती हैं, जिनका अपना अलग धार्मिक महत्व है. दिन की शुरुआत सबसे प्रसिद्ध भस्म आरती से होती है, जो सुबह लगभग 4 बजे होती है. यह आरती महाकाल मंदिर की सबसे खास और अनोखी परंपराओं में से एक मानी जाती है. इसके बाद सुबह 7 बजे दत्योदक आरती, सुबह 10 बजे भोग आरती, शाम 5 बजे पूजन आरती, शाम 7 बजे संध्या आरती और अंत में रात 10:30 बजे शयन आरती की जाती है.
महाकाल की आरती का दृश्य बेहद दिव्य और आध्यात्मिक माना जाता है. आरती से पहले भगवान शिव का विधि-विधान से अभिषेक किया जाता है. इसके बाद मंदिर के पुजारी वैदिक मंत्रों के साथ भगवान महाकाल की आरती करते हैं. इस दौरान मंदिर में बजने वाले शंख, घंटियां और डमरू की आवाज से पूरा वातावरण भक्तिमय और पवित्र हो जाता है.
धार्मिक मान्यता है कि महाकालेश्वर की आरती का दर्शन करने से जीवन के दुख दूर होते हैं और भक्तों को मानसिक शांति प्राप्त होती है. यही कारण है कि हर दिन हजारों श्रद्धालु मंदिर में उपस्थित होकर या ऑनलाइन माध्यम से इस दिव्य आरती का आनंद लेते हैं.
अगर आप भी भगवान शिव के भक्त हैं, तो आज घर बैठे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की आरती देखकर भगवान महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और अपने दिन की शुरुआत सकारात्मक ऊर्जा के साथ कर सकते हैं.
यहां देखें लाइव आरती-
बाबा महाकाल आरतीऊं जय शिव जय महाकाल
स्वामी जय शंभू महाकाल,
ज्योतिर्लिंग स्वरूपा
ज्योतिर्लिंग स्वरूपा,
तुम कालो के काल
ओम जय शिव जय महाकाल।
बारह ज्योतिर्लिंग में
महिमा बड़ों है नाम,
क्षिप्रा तट उज्जैन में,
महाकाल को धाम
ऊं जय शिव जय महाकाल।
प्रभु तुम भीमेश्वर देवा
तुम काशी विश्वनाथ,
गोमती तट त्रयंभकेश्वर
दारूकवन नागनाथ,
ओम जय शिव जय महाकाल।
हाथ जोड़ तेरे द्वारे
काल खड़ा लाचार,
सुर नर असुर चराचर,
सब के हो करतार,
ऊं जय शिव जय महाकाल।
चिता भस्म से तेरो
नित नित हो शृंगार,
भक्तन का मन मोहे,
तेरो रूप निहार,
ऊं जय शिव जय महाकाल।
भस्म आरती तेरी
अद्भुत है भगवान,
भाग्यवान नर नारी,
पाएं शुभ दर्शन
ऊं जय शिव जय महाकाल।
साथ में गणपति गौरा,
कार्तिक है देवा,
द्वार खड़े हैं नंदी,
नित्य उठ करें सेवा,
ऊं जय शिव जय महाकाल।
जो जन तेरा दर्शन
श्रद्धा से कर जाए,
मौत अकाल ना आए,
सुख वैभव पा जाए
ऊं जय शिव जय महाकाल।
महाकाल की आरती
जो नर नारी गाए,
कहत महेश प्रभु से,
मन इच्छा फल पाए
ऊं जय शिव जय महाकाल।
ऊं जय शिव जय महाकाल
स्वामी जय शंभू महाकाल,
ज्योतिर्लिंग स्वरूपा,
ज्योतिर्लिंग स्वरूपा,
तुम कालो के काल,
ऊं जय शिव जय महाकाल।।
जय शिव ओंकारा, ओम जय शिव ओंकारा,
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा।
एकानन चतुरानन पंचानन राजे,
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे।
दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे,
तीनों रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।
अक्षमाला वनमाला मुंडमाला धारी,
चंदन मृगमद सोहे भाले शशिधारी।
श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे,
सनकादिक ब्रह्मादिक भूतादिक संगे।
कर में त्रिशूल चक्र खड्ग परशु धारी,
जगकर्ता जगभर्ता जगपालनकारी।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका,
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका।
लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा,
पार्वती अर्द्धांगी शिवलहरी गंगा।
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