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This Article is From Jul 03, 2023

सावन में शिवलिंग पर 5 जगह बेलपत्र चढ़ाना है जरूरी, एस्ट्रो एक्सपर्ट से जानें कहां, फिर हर मनोकामना होगी पूरी

Bel Patra: अगर आप हैं भोलेनाथ के भक्त हैं और उनकी रोजाना पूजा करते हैं तो जान लीजिए कि बेलपत्र चढ़ाने का सही तरीका क्या है. कहते हैं कि ऐसा करने से बिगड़े हुए काम बन जाते हैं.

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सावन में शिवलिंग पर 5 जगह बेलपत्र चढ़ाना है जरूरी, एस्ट्रो एक्सपर्ट से जानें कहां, फिर हर मनोकामना होगी पूरी
शिवलिंग पर चढ़ा रहे हैं बेलपत्र तो पहले जान लें सही तरीका.

Tips To Offer Bel Patra To Shivling: जिंदगी में अक्सर ऐसे मोड़ आ ही जाते हैं जब लगता है कि शायद अब कोई रास्ता नहीं बचा. न नौकरी (Job) में तरक्की मिल रही है, न घर के आर्थिक हालात (Financial Condition) सुधर रहे हैं. अगर बिजनेस (Buisness) में किसी नई डील का इंतजार है तो लाख कोशिशों के बावजूद भी वो पूरी नहीं हो पाती. ऐसे रूके हुए काम पूरे करने हैं तो शिवलिंग (Shivling) पर बेल पत्र (Bel Patra) चढ़ाइए. लेकिन बेल पत्र कैसे और कितने चढ़ाने हैं इसका सही  तरीका जरूर जान लीजिए. इंस्टाग्राम पर माधुरी मधु 111 नाम के इंस्टा हैंडल ने एक एस्ट्रोलॉजिकल उपाय (Astrology Tips) शेयर किया है, जिसमें ये जानकारी दी है कि बेल पत्र का उपाय किस तरह से बिगड़े हुए काम बना सकता है.

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बेल पत्र का उपाय (Astrology Tips for Bel Patra)

इस इंस्टाग्राम हैंडल के मुताबिक जो उपाय बताया गया है उसे 5 या 6 या 7 सोमवार तक लगातार करना है. हर शिवलिंग पर अपने परिवार के लिए स्थान होता है. उन सभी स्थानों पर बेल पत्र चढ़ाना है. पहले एक बेल पत्र शिवलिंग की जलहरी के सीधे हाथ पर रखना है. दूसरा बेल पत्र जलहरी के उल्टे हाथ की तरफ रखना है. एक बेल पत्र शिवलिंग के मुहाने या अंतिम सिरे पर रखना है. एक बेल पत्र उस स्थान पर रखना है जिसे हस्त कमल कहते हैं. और अंतिम बेल पत्र शिवलिंग के ऊपर रखना है और जल चढ़ाना है.

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क्या है इसका महत्व?

जो पहले बेल पत्र शिवलिंग के सीधे हाथ की तरफ है वो गणेशजी का स्थान बताया गया है. उल्टे हाथ की तरफ अर्पित किया गया बेल पत्र कार्तिकेय जी के लिए है. जो बेल पत्र शिवलिंग की जलहरी के अंतिम सिरे पर है वो अशोक सुंदरी के लिए हैं. हस्त कमल पर  चढ़ाया गया बेल पत्र माता पार्वती के लिए बताया गया है. और, शीर्ष पर अर्पित बेल पत्र भगवान शिव के लिए है.वीडियो में जो नजर आ रहा है उसके मुताबिक बेल पत्र पूरे खुले हुए तीन बेल पत्र वाली डंठल हर स्थान पर अर्पित की गई है. साथ ही बेल पत्र अर्पित करने के बाद पांचों स्थान पर जल अर्पित करना है. अंतिम बेल पत्र चढ़ाने  के बाद पात्र में रखा पूरा जल चढ़ा देना है.

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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