सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान लाखों श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं. आपने भी देखा होगा कि ज्यादातर भक्त जल चढ़ाने के लिए तांबे के लोटे का ही इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या यह सिर्फ परंपरा है या इसके पीछे कोई धार्मिक और शास्त्रीय कारण भी छिपा है. ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि तांबे के पात्र से जल अर्पित करने का विशेष महत्व धर्म शास्त्रों और ज्योतिष दोनों में बताया गया है.
तांबे का लोटा क्यों माना जाता है शुभ
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल पांडेय के अनुसार, तांबा सूर्य का प्रतिनिधित्व करने वाली धातु माना जाता है. सूर्य ऊर्जा, तेज और आत्मबल का प्रतीक हैं. ऐसे में तांबे के पात्र से भगवान शिव का जलाभिषेक करने से शिव और सूर्य दोनों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है.
धर्म शास्त्रों में क्या कहा गया है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा-पाठ में तांबे के पात्र को सबसे पवित्र धातुओं में गिना गया है. इसलिए शिवलिंग पर जल, गंगाजल या पंचामृत अर्पित करने के लिए तांबे के लोटे का प्रयोग शुभ माना जाता है. हालांकि तांबे का पात्र न होने पर किसी भी स्वच्छ पात्र से श्रद्धापूर्वक जल चढ़ाया जा सकता है.
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ज्योतिषीय दृष्टि से क्या है महत्व
पंडित कौशल पांडेय बताते हैं कि सावन में तांबे के लोटे से जलाभिषेक करने से सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ने की मान्यता है. यह उपाय सूर्य से जुड़े दोषों की शांति के लिए भी लाभकारी माना जाता है.
जलाभिषेक करते समय इन नियमों का रखें ध्यान
जलाभिषेक के लिए साफ तांबे का लोटा इस्तेमाल करें. संभव हो तो जल में गंगाजल मिलाएं और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते हुए धीरे-धीरे शिवलिंग पर जल अर्पित करें. पूजा के दौरान मन शांत और श्रद्धा से भरा होना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है.
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