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Ravivar ke Upay: रविवार को करें श्री सूर्य अष्टकम का पाठ, जीवन में होगा सुख-समृद्धि का वास, दूर होंगे कष्ट

रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है. इस दिन सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए आप विधि-विधान से श्री सूर्य अष्टकम का पाठ कर सकते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है.

Ravivar ke Upay: रविवार को करें श्री सूर्य अष्टकम का पाठ, जीवन में होगा सुख-समृद्धि का वास, दूर होंगे कष्ट
रविवार के उपाय
Photo Credit: NDTV

हिन्दू धर्म में सप्ताह के 7 दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होते हैं. इसी तरह रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यदेव की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और सकारात्मकता का वास होता है. शास्‍त्रों में सूर्य देवता को सबसे ऊपर का स्‍थान रखा गया है. माना जाता है कि सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है और ग्रह दोषों से भी मुक्ति मिलती है. 

रविवार को करें ये श्री सूर्य अष्टकम का पाठ

सूर्यदेव को समर्पित दिन रविवार को श्री सूर्य अष्टकम का पाठ करना अत्यंत लाभदायक माना जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है. साथ ही व्यक्ति के जीवन से कष्ट दूर होने लगते हैं. इसके अलावा नियमित रूप से सूर्यदेव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में ऊर्जा और सकारात्मकता का वास होता है. 

यहां पढ़ें श्री सूर्य अष्टकम का पाठ

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर ।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते॥1॥

सप्ताश्व रथमारूढं प्रचण्डं कश्यपात्मजम् ।
श्वेत पद्माधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥2॥

लोहितं रथमारूढं सर्वलोक पितामहम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥3॥

त्रैगुण्यश्च महाशूरं ब्रह्माविष्णु महेश्वरम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥4॥

बृहितं तेजः पुञ्ज च वायु आकाशमेव च ।
प्रभुत्वं सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥5॥

बन्धूकपुष्पसङ्काशं हारकुण्डलभूषितम् ।
एकचक्रधरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥6॥

तं सूर्यं लोककर्तारं महा तेजः प्रदीपनम् ।
महापाप हरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥7॥

तं सूर्यं जगतां नाथं ज्ञानप्रकाशमोक्षदम् ।
महापापहरं देवं तं सूर्यं प्रणमाम्यहम् ॥8॥

सूर्याष्टकं पठेन्नित्यं ग्रहपीडा प्रणाशनम् ।
अपुत्रो लभते पुत्रं दारिद्रो धनवान् भवेत् ॥9॥

अमिषं मधुपानं च यः करोति रवेर्दिने ।
सप्तजन्मभवेत् रोगि जन्मजन्म दरिद्रता ॥10॥

स्त्री-तैल-मधु-मांसानि ये त्यजन्ति रवेर्दिने ।
न व्याधि शोक दारिद्र्यं सूर्य लोकं च गच्छति ॥11॥

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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