विज्ञापन

Ravivar ke Upay: रविवार को करें आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ, पूरी होंगी मनोकामना, बनेंगे करियर में सफलता के योग

रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है. मान्यता है कि इससे आत्मविश्वास, मान-सम्मान, करियर में सफलता और जीवन की बाधाओं को दूर करने में मदद मिलती है.

Ravivar ke Upay: रविवार को करें आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ, पूरी होंगी मनोकामना, बनेंगे करियर में सफलता के योग
रविवार को करें आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ
Photo Credit: NDTV

Ravivar ke Upay: हिन्दू धर्म में सप्ताह के सातों दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है. इसी तरह रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रविवार को सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करने से अच्छे स्वास्थ्य, तेज, आत्मविश्वास, मान-सम्मान और ऊर्जा की प्राप्ति होती है. साथ ही करियर और कारोबार में तरक्की होती है. रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है. मान्यता है कि जो भी व्यक्ति रविवार को विधि-विधान से इस स्तोत्र का पाठ करता है उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और करियर में भी सफलता के योग बनते हैं. इसके लिए रविवार को सुबह स्नान कर स्वच्छ कपड़े धारण करें. इसके बाद सूर्यदेव को जल-अर्पित करें. फिर इस स्तोत्र का पाठ करें.

यहां पढ़ें आदित्य हृदय स्तोत्र

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्‌.
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्‌..
दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्‌.
उपगम्याब्रवीद् राममगस्त्यो भगवांस्तदा..

राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्मं सनातनम्‌.
येन सर्वानरीन्‌ वत्स समरे विजयिष्यसे..
आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्‌.
जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम्‌..

सर्वमंगलमागल्यं सर्वपापप्रणाशनम्‌.
चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वर्धनमुत्तमम्‌..
रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्‌.
पुजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्‌..

सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावनः.
एष देवासुरगणांल्लोकान्‌ पाति गभस्तिभिः..
एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिवः स्कन्दः प्रजापतिः.
महेन्द्रो धनदः कालो यमः सोमो ह्यापां पतिः..

पितरो वसवः साध्या अश्विनौ मरुतो मनुः.
वायुर्वहिनः प्रजा प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकरः..
आदित्यः सविता सूर्यः खगः पूषा गभस्तिमान्‌.
सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकरः..

हरिदश्वः सहस्त्रार्चिः सप्तसप्तिर्मरीचिमान्‌.
तिमिरोन्मथनः शम्भुस्त्वष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान्‌..
हिरण्यगर्भः शिशिरस्तपनोऽहस्करो रविः.
अग्निगर्भोऽदितेः पुत्रः शंखः शिशिरनाशनः..

व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजुःसामपारगः.
घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः..
आतपी मण्डली मृत्युः पिगंलः सर्वतापनः.
कविर्विश्वो महातेजाः रक्तःसर्वभवोद् भवः..

नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावनः.
तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन्‌ नमोऽस्तु ते..
नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः.
ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः..

याय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नमः.
ज नमो नमः सहस्त्रांशो आदित्याय नमो नमः..
नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नमः.
नमः पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते..

ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सुरायादित्यवर्चसे.
भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नमः..
तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने.
कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नमः..

तप्तचामीकराभाय हरये विश्वकर्मणे.
नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे..
नाशयत्येष वै भूतं तमेष सृजति प्रभुः.
पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभिः..

एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठितः.
एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्‌..
देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतुनां फलमेव च.
यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमं प्रभुः..

एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च.
कीर्तयन्‌ पुरुषः कश्चिन्नावसीदति राघव..
पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगप्ततिम्‌.
एतत्त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि..

अस्मिन्‌ क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि.
एवमुक्ता ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम्‌..
एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत्‌ तदा.
धारयामास सुप्रीतो राघव प्रयतात्मवान्‌..

आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान्‌.
त्रिराचम्य शूचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्‌..
रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थं समुपागतम्‌.
सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत्‌..

अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमनाः परमं प्रहृष्यमाणः.
निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति.

यह भी पढ़ें: Rakhi: रक्षाबंधन के त्योहार के बाद कब खोल सकते हैं राखी? जानिए क्या है सही नियम और किन बातों का रखें ध्यान

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Religion News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com