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Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले पूजा में जरूर पढ़ें रक्षाबंधन की ये कथा, जानें आज कितने बजे से कितने बजे तक बांधी जाएगी राखी

आज पूजा के बाद आप यहां से रक्षाबंधन की श्री कृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी कथा का पाठ या श्रवण कर सकते हैं.

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले पूजा में जरूर पढ़ें रक्षाबंधन की ये कथा, जानें आज कितने बजे से कितने बजे तक बांधी जाएगी राखी
आज राखी बांधने का शुभ समय क्या है?
(Photo Credit: NDTV)

आज यानी 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है. इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. भाई भी बहन की हमेशा रक्षा करने का वचन देता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी बांधने से पहले भगवान की पूजा करना और पूजा में रक्षाबंधन से जुड़ी कथा पढ़ना शुभ माना जाता है. ऐसे में आज पूजा के बाद आप यहां से रक्षाबंधन की श्री कृष्ण और द्रौपदी से जुड़ी कथा का पाठ या श्रवण कर सकते हैं. 

आज राखी बांधने का शुभ समय क्या है?

ज्योतिषाचार्य डॉक्टर गौरव कुमार दीक्षित के अनुसार, आज राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इस दौरान बहनें भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं.

वहीं, आज राहुकाल सुबह 10 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा. गुलिक काल सुबह 7 बजकर 45 से 9 बजकर 19 मिनट तक और यमगंड काल दोपहर 3 बजकर 36 मिनट से शाम 5 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. धार्मिक मान्यताओं में इन समयों को शुभ कामों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है. इसलिए राखी बांधने के लिए शुभ समय का ध्यान रखें.

राखी बांधने से पहले ऐसे करें पूजा
  • ज्योतिषाचार्य बताते हैं, रक्षाबंधन के दिन भाई और बहन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. 
  • इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाएं. 
  • भगवान की विधि-विधान से पूजा करें.
  • पूजा में रक्षाबंधन की कथा का श्रवण करें.
  • इसके बाद राखी की थाली तैयार करें. इसमें राखी, रोली, अक्षत, मिठाई और दीपक रख सकते हैं. राखी बांधने से पहले इस थाली को भगवान के सामने रखें और भगवान का आशीर्वाद लें.
  • भगवान से भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और सुख बनाए रखने की प्रार्थना करें.
  • आखिर में आरती कर सूर्य देव को जल अर्पित करें.
पूजा में जरूर पढ़ें श्री कृष्ण और द्रौपदी की ये कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान श्री कृष्ण की उंगली सुदर्शन चक्र से कट गई थी. उंगली से खून निकलता देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर श्री कृष्ण की उंगली पर बांध दिया. द्रौपदी के इस प्रेम और अपनेपन को देखकर श्री कृष्ण ने हमेशा उनकी रक्षा करने का वचन दिया. मान्यता है कि बाद में जब हस्तिनापुर के राजदरबार में द्रौपदी का अपमान किया जा रहा था, तब श्री कृष्ण ने उनकी लाज बचाई और अपना वचन निभाया था. 

कथा के बाद बांधें भाई को राखी

पूजा और कथा पूरी होने के बाद भाई को साफ आसन पर बैठाएं. पहले उसके माथे पर रोली और अक्षत से तिलक करें. इसके बाद आरती करें और उसकी कलाई पर राखी बांधें. फिर भाई को मिठाई खिलाएं और उसकी लंबी उम्र व खुशहाल जीवन की कामना करें.

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