पितृ पक्ष चल रहा है. हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का खास महत्व माना जाता है. यह समय अपने पूर्वजों को याद करने, उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का होता है. मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्रद्धा से किए गए कामों से पितरों का आशीर्वाद मिलता है. इन 16 दिनों में पूर्वजों का श्राद्ध निकाला जाता है. श्राद्ध करने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराने की परंपरा है. इसके साथ ही गाय, कौवे, कुत्ते और चींटियों को भी भोजन दिया जाता है. हालांकि, इससे अलग भोजन को लेकर भी कुछ नियम बताए गए हैं. मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, श्राद्ध का भोजन हर किसी को नहीं देना चाहिए. खासकर कुछ लोगों के इस भोजन के लिए योग्य नहीं माना गया है. आइए जानते हैं इससे जुड़े नियम-
इन लोगों को नहीं देना चाहिए श्राद्ध का भोजन
- मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी गलत काम से जुड़ा हुआ है, तो उसे श्राद्ध का भोजन नहीं देना चाहिए. छल-कपट, चोरी, हिंसा या कोई भी अन्य गलत काम करने वाले लोगों को श्राद्ध के भोजन के योग्य नहीं माना जाता है.
- इसके अलावा जो लोग अपने फायदे के लिए दूसरों को दुख देते हैं उन्हें भी श्राद्ध के भोजन के लिए उचित नहीं माना गया है.
- जो लोग अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करते, गुरुजनों और बुजुर्गों का आदर नहीं करते, उन्हें भी श्राद्ध के भोजन के लिए अपात्र बताया गया है.
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, ब्राह्मण या पुजारी से अलग और भी लोग श्राद्ध का भोजन ग्रहण कर सकते हैं. खासकर श्राद्ध के समय जरूरतमंद और भूखे व्यक्ति को भोजन कराना पुण्य का कार्य माना जाता है. इससे अलग अगर श्राद्ध के दिन कोई साधु, संत, तपस्वी या अतिथि बिना बुलाए घर आ जाए, तो उसे भी भोजन जरूर कराएं. परिवार के सदस्य, रिश्तेदार और पड़ोसी भी श्राद्ध का प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं.
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बता दें कि इस साल पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हुई. 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध किया गया. इसके बाद 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध, 28 सितंबर को द्वितीया श्राद्ध, 29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध, 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी श्राद्ध और 1 अक्टूबर को षष्ठी श्राद्ध किया गया. अब, आज यानी 2 अक्टूबर को सप्तमी श्राद्ध किया जा रहा है. पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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