विज्ञापन

Pitru Paksha 2026: तर्पण में काले तिल ही क्यों इस्तेमाल होते हैं? क्या बिना तिल के कर सकते हैं श्राद्ध?

Pitra Paksha 2026 Kale Til Daan: पितृ पक्ष में काले तिल का इस्तेमाल तर्पण और दान में विशेष माना जाता है. आचार्य मदन मोहन के अनुसार, धार्मिक मान्यता में काले तिल पवित्र हैं और पितरों की तृप्ति से जुड़े हैं. जानिए तर्पण में इनके महत्व और इस्तेमाल के नियम.

Pitru Paksha 2026: तर्पण में काले तिल ही क्यों इस्तेमाल होते हैं? क्या बिना तिल के कर सकते हैं श्राद्ध?
पितृ पक्ष में काले तिल का इस्तेमाल तर्पण और दान में विशेष माना जाता है.
ndtv

पितृ पक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और उन्हें याद करने का समय माना जाता है. इस दौरान श्राद्ध, तर्पण और दान जैसे कर्म किए जाते हैं. इन सभी में काले तिल का इस्तेमाल खास माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, तर्पण के जल में काले तिल मिलाकर अर्पित करने से पितरों की तृप्ति होती है. लेकिन काले तिल को इतना महत्वपूर्ण क्यों माना गया है और क्या इनके बिना श्राद्ध किया जा सकता है. आइए आचार्य मदन मोहन से जानते हैं.

काले तिल को क्यों माना जाता है खास

आचार्य मदन मोहन के अनुसार, धार्मिक मान्यता में काले तिल को बेहद पवित्र माना गया है. मान्यता है कि इसकी उत्पत्ति भगवान विष्णु के पसीने से हुई थी. इसी वजह से पूजा-पाठ और पितृ कर्म में इसका इस्तेमाल शुभ माना जाता है. तर्पण के दौरान जल में काले तिल मिलाकर पितरों को अर्पित करने की परंपरा है.

शनि और राहु-केतु से भी जोड़ा जाता है संबंध

आचार्य के अनुसार, ज्योतिष में काले तिल का संबंध शनि और राहु-केतु जैसे छाया ग्रहों से मााना जाता है. पितृ पक्ष में काले तिल का दान करने को पितृ दोष और शनि से जुड़े दोषों की शांति से भी जोड़ा जाता है. हालांकि ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं.

ये भी पढ़ें- Pitra Paksha 2026: आज पितृ पक्ष का पहला दिन... पितरों को तर्पण देते समय किस दिशा में मुंह होना चाहिए? जानें सही नियम

तर्पण में काले तिल कैसे करें इस्तेमाल

पितृ तर्पण करते समय जल में थोड़े काले तिल मिलाकर पितरों को अर्पित करने की परंपरा है. इसके अलावा पितृ पक्ष में दान की जाने वाली वस्तुओं के सााथ काले तिल का दान भी किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे पितरों को तृप्ति मिलने की कामना की जााती है.

क्या बिना काले तिल के कर सकते हैं श्राद्ध

आचार्य मदन मोहन के अनुसार, पितृ कर्म में काले तिल का इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण माना गया है. इसलिए तर्पण और दान करते समय इन्हें शामिल करने की परंपरा है. हालांकि किसी कारण से काले तिल उपलब्ध न हों, तो कर्मकांड रोकने या उसे निष्फल मानने के बजााय अपने परिवार की परंपरा और पुरोहित की सलाह के अनुसार विधि पूरी करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि ध्यान रखें कि काले तिल से जुड़ी बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपरााओं पर आधारित हैं. इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

ये भी पढ़ें- Aaj Ka Rashifal: आज कई राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें मेष से मीन तक आज का राशिफल

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Pitru Paksha
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com