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Parvati Jayanti 2026: आज है पार्वती जयंती, जाने अखंड सौभाग्य के लिए कैसे करें देवी की पूजा

Parvati Jayanti 2026 सनातन परंपरा में आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि कुंआरी कन्याओं और सुहागिन महिलाओं दोनों के लिए बेहद खास मानी गई है क्योंकि इसी दिन सभी कामनाओं को पूरा करके जीवन में मंगल ही मंगल करने वाली माता पार्वती की जयंती मनाई जाती है. आज इस व्रत की पूजा कब और कैसे करें, जानने के लिए पढ़ें ये लेख

Parvati Jayanti 2026: आज है पार्वती जयंती, जाने अखंड सौभाग्य के लिए कैसे करें देवी की पूजा
Parvati Jayanti 2026: पार्वती जयंती व्रत की विधि एवं महत्व
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Parvati Jayanti 2026 Puja Vidhi: हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की पावन अष्टमी तिथि न सिर्फ गुप्त नवरात्रि में कन्या पूजन बल्कि देवों के देव महादेव की अर्धांगिनी यानि माता पार्वती की पूजा एवं व्रत आदि के लिए जानी जाती है. सनातन परंपरा में माता पार्वती को अखंड सौभाग्य की देवी और महादेव की परम शक्ति माना जाता है. जिनकी पूजा करने पर साधक के जीवन से जुड़े सारे कष्ट दूर और कामनाएं पूरी होती हैं. आज पार्वती जयंती पर माता पार्वती की कब और कैसे पूजा करनी चाहिए? माता पार्वती की पूजा के क्या लाभ हैं, आइए इन सभी बातों को विस्तार से जानते हैं. 

पार्वती जयंती का शुभ मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार जिस आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी ति​थि पर माता पार्वती की जयंती मनाई जाती है वो इस साल 21 जुलाई 2026 को भोर में 04:02 प्रारंभ होकर अगले दिन 22 जुलाई 2026 को प्रात:काल 05:16 को समाप्त हो जाएगी. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर आज 21 जुलाई 2026, मंगलवार को ही माता पार्वती का व्रत, पूजा और जप-तप करना उचित रहेगा. 

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पार्वती जयंती पर कैसे करें पूजा?

पार्वती जयंती पर माता की विशेष पूजा एवं व्रत करने के लिए प्रात:काल स्नान करके तन और मन दोनों से पवित्र हो जाएं. इसके बाद यदि संभव हो तो लाल या पीले रंग के वस्त्र आज धारण करें. इसके बाद माता पार्वती के व्रत को विधि-विधान से करने का संकल्प लें और अपने पूजा घर या फिर घर के ईशान कोण में एक चौकी पर आसन बिछाकर माता पार्वती की मूर्ति या चित्र रखें. इसके पश्चात् माता पार्वती पर गंगाजल छिड़कें और रोली, चंदन, अक्षत आदि से तिलक करें तथा धूप-दीप जलाएं.

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इसके बाद माता को लाल रंग की चुनरी, लाल पुष्प, सुहाग की सामग्री अर्पित करें. फिर माता को खीर या फिर जो भी भोग बनाया हो उसे अर्पित करें. इसके बाद माता पार्वती के साथ महादेव की की भी पूजा करें. इसके पश्चात् माता पार्वती की कथा का पाठ करें या फिर किसी के माध्यम से सुनें. इसी प्रकार माता पार्वती और महादेव के मंत्र को जपने के बाद अंत में पूरे श्रद्धा भाव के साथ माता पार्वती की आरती करते हुए अपने कल्याण की कामना करें. 

पार्वती जयंती का धार्मिक महत्व 

हिंदू मान्यता के अनुसार माता पार्वती साक्षात दुर्गा का स्वरूप हैं. माता को शक्ति और प्रकृति का समन्वित स्वरूप भी माना जाता है. देवी पार्वती की पूजा जीवन से सभी दुखों को दूर करके सुख-सौभाग्य प्रदान करने वाली है. महादेव की तरह माता पार्वती भी अपने भक्तों पर शीघ्र ही कृपा बरसाकर उनका कल्याण करती है. माता पार्वती की पूजा से साधक के सभी मनोरथ पूरे होते हैं. माता पार्वती की पूजा न सिर्फ सुहागिन महिलाओं के लिए कल्याणकारी मानी गई है बल्कि उनकी साधना से अविवाहित कन्याओं के विवाह में आ रहीं अड़चने दूर होती हैं और उन्हें मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है. देवी पार्वती की पूजा से महिलाओं को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है. 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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