जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर सिर्फ अपनी भव्यता के लिए ही नहीं, बल्कि यहां निभाई जाने वाली अनोखी धार्मिक परंपराओं के लिए भी खास माना जाता है. गणेश चतुर्थी के मौके पर भगवान गणेश को मेहंदी अर्पित की जाती है और पूजा के बाद इसे प्रसाद के रूप में भक्तों को दिया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि बप्पा के चरणों में चढ़ी इस मेहंदी को हाथों में लगाने से विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और शादी के योग बनते है.। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में कुंवारे युवक-युवतियां इस खास मेहंदी के प्रसाद का इंतजार करते हैं. मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, यह परंपरा करीब 200 साल पुरानी है और समय के साथ इसका स्वरूप भी काफी बड़ा हो गया है.
200 साल पुरानी है सिंजारे की परंपरा
मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, मोती डूंगरी गणेश मंदिर में गणेश जन्मोत्सव से पहले सिंजारा उत्सव मनाने की परंपरा करीब 200 साल पुरानी है. इस दौरान भगवान गणेश को मेहंदी अर्पित की जाती है. पूजा के बाद यही मेहंदी श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में दी जाती है.
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पहले सवा किलो और अब 35 क्विंटल मेहंदी
जानकारी के अनुसार, समय के साथ इस परंपरा का स्वरूप भी बड़ा हुआ है. बताया जाता है कि पहले करीब सवा किलो मेहंदी से यह आयोजन होता था. अब राजस्थान के सोजत से बड़ी मात्रा में मेहंदी मंगाई जााती है. इस बार करीब 3500 किलो यानी 35 क्विंटल मेहंदी की व्यवस्थाा किए जाने की जानकारी है.
कुंवारों के लिए क्यों खास है ये मेहंदी
धार्मिक मान्यता है कि बप्पा को अर्पित मेहंदी को प्रसाद के रूप में हाथों पर लगाने से विवाह में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं. इसी वजह से अविवाहित युवक-युवतियां इसे पाने के लिए उत्साहित रहते हैं. कुछ श्रद्धालु मनोकामना पूरी होने के बााद अगले साल मंदिर पहुंचकर बप्पा का आभार भी जतााते हैं.
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