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तीसरा मंगला गौरी व्रत आज, पूजा के बाद यहां से पढ़ें मां गौरी की आरती

आज तीसरा मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है. ऐसे में पूजा के बाद आप यहां से पढ़कर श्रद्धा से मां गौरी की आरती गा सकते हैं-

तीसरा मंगला गौरी व्रत आज, पूजा के बाद यहां से पढ़ें मां गौरी की आरती
मां गौरी की आरती | Maa Gauri Aarti
(Photo Credit: NDTV)

सावन का पावन महीना चल रहा है. ये महीना भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए बहुत खास माना जाता है. सावन में आने वाले हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. आज 18 अगस्त को तीसरा मंगला गौरी व्रत है. इस दिन सुहागिन महिलाएं माता गौरी की पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र, सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत में सच्चे मन से माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है.

मंगला गौरी व्रत के दिन महिलाएं सुबह स्नान करके पूजा का संकल्प लेती हैं. इसके बाद माता गौरी की विधि-विधान से पूजा की जाती है. पूजा में माता को सुहाग की सामग्री, फूल, फल और अन्य चीजें अर्पित की जाती हैं. मान्यता के अनुसार, माता गौरी को श्रद्धा से याद करने और व्रत रखने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है.

वहीं, हिंदू धर्म में किसी भी पूजा के बाद आरती का विशेष महत्व बताया गया है. माना जाता है कि आरती से ही पूजा पूरी होती है. ऐसे में आज मंगला गौरी व्रत की पूजा के बाद आप यहां से मां गौरी की आरती पढ़कर श्रद्धा से गा सकते हैं.

मां गौरी की आरती | Maa Gauri Aarti

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको ॥।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी।
सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी।
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों।
बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू ॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता,
भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

भुजा चार अति शोभित, वर मुद्रा धारी।
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥
ॐ जय अम्बे गौरी।।

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती।।
ॐ जय अम्बे गौरी।।

श्री अंबेजी की आरती, जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपत्ति पावे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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