Kumbh Sankranti 2022: आज कुंभ संक्रांति पर किया जाता है इस कथा का पाठ

साल 2022 में सूर्य का कुंभ राशि में गोचर आज 13 फरवरी, रविवार को हो रहा है, यानि की इस दिन कुंभ संक्रांति (Kumbh Sankranti) मनाई जाएगी. संक्रांति के दिन पूजा, जप, तप और दान का विशेष महत्व होता है. कुंभ संक्रांति के दिन पूजन के समय इस कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है.

Kumbh Sankranti 2022: आज कुंभ संक्रांति पर किया जाता है इस कथा का पाठ

Kumbh Sankranti 2022: आज कुंभ संक्रांति पर पढ़ें ये कथा

नई दिल्ली:

सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना संक्रांति (Sankranti 2022) कहलाता है. इसी तरह जब सूर्य मकर राशि से निकलकर कुंभ राशि में प्रवेश करता है, तो इसे कुंभ संक्रांति (Kumbh Sankranti 2022) कहते हैं. साल 2022 में सूर्य का कुंभ राशि में गोचर आज 13 फरवरी, रविवार को हो रहा है, यानि की इस दिन कुंभ संक्रांति (Kumbh Sankranti) मनाई जाएगी.

Kumbh Sankranti 2022: कब है कुंभ संक्रांति, जानिए शुभ मुहूर्त और महा पुण्य काल का समय

संक्रांति के दिन पूजा, जप, तप और दान का विशेष महत्व होता है. कहते हैं कि इस दिन गंगा स्नान कर पूजा-व्रत करने से जातक को अमोघ फल की प्राप्ति होती है. माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना और दान पुण्य करना विशेष रूप से फलदायी होता है. कुंभ संक्रांति के दिन पूजन के समय इस कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है.

Kumbh Sankranti 2022: कुंभ संक्रांति पर किया जाता है सूर्य चालीसा का पाठ

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कुंभ संक्रांति की पौराण‍िक कथा | Kumbh Sankranti Ki Kath

पौराणिक कथा के अनुसार,  हरिदास नाम का एक बेहद दयालु ब्राह्मण था, जिनकी पत्नी का नाम गुणवती था. गुणवती भी अपेन पति हरिदास की तरह ही दयालु और धार्मिक थी. गुणवती सभी देवी-देवताओं की विधि-विधान से पूजन और व्रत करती थी. गुणवती ने कभी भी ना ही धर्मराज की पूजा की और ना ही उनका कोई व्रत रखा. मृत्यु के पश्चात जब भगवान चित्रगुप्त गुणवती के पापों का लेखा-जोखा कर रहे, तब भगवान चित्रगुप्त ने गुणवती से कहा कि तुमने कभी भी धर्मराज के नाम से कोई भी व्रत-पूजन नहीं किया और ना ही दान-पुण्य किया. यही कारण है कि आपको यह सब भुगतना पड़ रहा है.

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भगवान चित्रगुप्त की यह बात सुनकर गुणवती ने कहा, 'हे भगवान' यह भूल मैंने जानबूझकर नहीं की है. यह भूल मुझसे अनजाने में हुई है. अनजाने में की गई इस भूल को सुधारने का आप हमें कोई उपाय बताएं. यह सुनकर धनराज ने कहा कि आप जब भगवान सूर्य उत्तरायण में रहेंगे, तब मेरी विधि-विधान से पूजन-व्रत आरंभ करके पूरे वर्ष कथा सुनना और दान करना. वहीं, एक साल के बाद इस व्रत का उद्यापन जरूर करना.

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धर्मराज ने गुणवती से कहा, मेरी पूजा के साथ-साथ भगवान चित्रगुप्त जी की भी पूजा करना. उस दिन सफेद और काले तिल के लड्डू का भोग लगाना और यथाशक्ति ब्राह्मणों को दान करना. ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन की सभी विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं और व्यक्ति का समस्त जीवन सुखमय व्यतीत होता है.

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संक्रांति पर दान का महत्व | Sankranti Significance

बता दें कि साल भर पड़ने वाली सभी 12 संक्रांतियों पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है. कहते हैं इस दिन दान-पुण्य करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है. बता दें कि संक्रांति के पर्व पर पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद सूर्यदेव को अक्षत के साथ जल अर्पित किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संक्रांति के दिन सूर्य देव (Surya Dev) के पूजन के समय उनके मंत्रों का जाप करना और इनसे जुड़ी वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. इस दिन आप गेहूं, धान, कंबल, गरम कपड़े आदि का दान कर सकते हैं.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)