सावन का महीना शुरू होने वाला है. सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस समय शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और गंगा जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. इस साल कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगी. 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के दिन श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे. सावन और कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra 2026) का नाम आते ही उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में स्थित परशुरामेश्वर पुरा महादेव मंदिर की चर्चा शुरू हो जाती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध शिव धामों में शामिल यह मंदिर हर साल लाखों कांवड़ियों की आस्था का केंद्र बनता है. मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग का संबंध भगवान परशुराम से है और इसकी कई रहस्यमयी विशेषताएं आज भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं.
भगवान परशुराम से जुड़ा इतिहास
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जिस स्थान पर आज पुरा महादेव मंदिर है, वह कभी कजरी वन कहलाता था. यहीं ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका का आश्रम था. कथा के अनुसार, माता रेणुका से जुड़े घटनाक्रम के बाद भगवान परशुराम को गहरा पश्चाताप हुआ. उन्होंने इसी स्थान पर भगवान शिव की कठोर तपस्या की और शिवलिंग की स्थापना की. बाद में यह स्थान परशुरामेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ.
टेढ़े शिवलिंग को लेकर मान्यता?
मंदिर में स्थापित शिवलिंग को लेकर श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था है. मान्यताओं के अनुसार, यह शिवलिंग सामान्य शिवलिंगों से अलग दिखाई देता है और इसकी आकृति हल्की टेढ़ी मानी जाती है. कई भक्त इसे स्वयंभू शिवलिंग मानते हैं, जिसकी गहराई और वास्तविक स्वरूप आज भी रहस्य बना हुआ है.
दिन में कई बार रंग बदलने की मान्यता
पुरा महादेव मंदिर से जुड़ी एक लोकप्रिय मान्यता यह भी है कि शिवलिंग दिन के अलग-अलग समय में अलग रंगों का आभास देता है. श्रद्धालुओं के मुताबिक, सुबह, दोपहर और शाम को इसके स्वरूप में बदलाव दिखाई देता है, जिसके कारण यह मंदिर और भी अधिक प्रसिद्ध है.
यहां कैसे पहुंचे?
पुरा महादेव मंदिर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के पुरा गांव में स्थित है. यह मेरठ से करीब 32 से 36 किलोमीटर और बागपत से लगभग 28 से 30 किलोमीटर दूर है. सड़क मार्ग से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है. सावन और महाशिवरात्रि के दौरान यहां विशेष मेले का आयोजन होता है और लाखों श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लाकर यहां जलाभिषेक करते हैं.
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